Coronavirus से लड़ाई में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को मिली छूट, कमजोर नहीं पड़ेगी मुहिम
- जीएफआर 166 के तहत मेडिकल उपकरण खरीदने के लिए कहा गया
- पीएसयू या स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंजूर कंपनियों से त्वरित खरीददारी की जा सकेगी
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असम राइफल, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी और सीआईएसएफ अब जनरल फाइनेंशियल रूल 2017 के बदले हुए नियमों के आधार पर कोरोना की लड़ाई में काम आने वाले उपकरणों की खरीदारी कर सकेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत सभी अर्धसैनिक बलों को जो आदेश जारी किया है, उसमें कहा गया कि ये बल कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जो भी मेडिकल उपकरण या अन्य वस्तुएं खरीदेंगे, उन्हें तय प्रकिया वाली सभी औपचारिकताओं का पालन नहीं करना होगा।
बता दें कि इन बलों में खरीदारी की मौजूदा प्रक्रिया काफी जटिल रहती है। फाइलें कई टेबल से होकर गुजरती हैं। उसके बाद तकनीकी अधिकारियों की टीम उपकरणों की गुणवत्ता परखती है। ट्रायल में सफलता मिलती है, तो ही फाइनल ऑर्डर तैयार होता है।
कई तरह की आंतरिक छूट मिल जाएगी
अभी कोरोना की लड़ाई के दौरान सभी अर्धसैनिक बलों को पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट 'पीपीई' और मेडिकल उपकरणों की बड़ी जरूरत है। सभी बल जनरल फाइनेंशियल रूल (जीएफआर) 2017 के नियम 160 ई-प्रोक्योरमेंट के तहत खरीदारी करते हैं, लेकिन अब उन्हें इन नियमों में छूट प्रदान कर जीएफआर 166 के तहत मेडिकल उपकरण खरीदने के लिए कहा गया है।
इस प्रक्रिया में बलों को कई तरह की आंतरिक छूट मिल जाती हैं। खासतौर पर पीएसयू या स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंजूर कंपनियों से त्वरित खरीददारी की जा सकती है। जैसे एचएलएल लाइफकेयर कंपनी को सौ फीसदी एडवांस देकर उपकरण या दूसरी वस्तुएं खरीदने के लिए कहा गया है।
यहां बैंक गारंटी देना अनिवार्य नहीं होगा। अगर वह सामान प्राइवेट फर्म से खरीदना है तो उसके लिए पचास फीसदी पेमेंट एडवांस देनी पड़ेगी। हालांकि इसके लिए बैंक गारंटी देनी होगी। गवर्नमेंट ई-मार्केट के तहत भी उपकरणों की खरीददारी की जा सकेगी।