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दवाओं पर सरकार की जल्दबाजी का नुकसान झेल रहे कोरोना मरीज

Mon, 13 Jul 2020 05:29 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला , नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला , नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 13 Jul 2020 05:29 AM IST
सार

  • कई औषधियों पर कम भरोसा होने के बाद भी संक्रमितों के उपचार प्रबंधन में किया गया शामिल
  • महज 30 मरीजों पर परीक्षण परिणाम भी स्पष्ट नहीं, फिर भी इटोलीजुमैब देने की सलाह

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Coronavirus drugs remdesivir,dexamethasone, Corona patients suffering from government speedy use on drugs
रेमडेसिवीर - फोटो : Hetero website

विस्तार

महामारी के सातवें महीने में भी कोरोना का न इलाज है न दवा। इसके चलते इलाज में लगातार नई-नई दवाओं को शामिल किया जा रहा है। इसका फायदे से ज्यादा नुकसान हो रहा है। एक दिन पहले ही सरकार ने इटोलीजुमैब इंजेक्शन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी है। जबकी इसका महज 30 मरीजों पर ही फेज 2 का परीक्षण किया गया है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि, दवाओं पर जल्दबाजी का नुकसान मरीजों को झेलना पड़ रहा है। महज 30 मरीजों पर किए परीक्षण के आधार पर करोड़ों मरीजों को दवा देना अनैतिक है।
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महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज चिकित्सीय अधीक्षक डॉ. एसपी कलंत्री के मुताबिक, सरकार एक अतिसूक्ष्म अध्ययन पर कैसे अनुमति दे सकती है? इसी तरह टोसिलिजुमैब दवा को भी अनुमति दी गई। इसके परीक्षण नतीजों के अनुसार 25 मरीजों को दवा दी जाए तो एक का जीवन बच सकता है।
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इसकी उपलब्धतता कम और कीमत हजारों में है। उन्होंने कहा कि केवल अनुसंधान के नाम पर प्रयोग नहीं किया जा सकता। दिल्ली के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनुपम सिंह का कहना है कि ऐसे प्रयोग कालाबाजारी को बढ़ावा दे सकते हैं।

प्रो. अनंत भान का कहना है कि कोरोना के उपचार में रेमडेसीविर, टोसिलिजुमैब, इटोलीजुमैब, फेविपिराविर जैसी दवाओं को सशर्त मंजूरी देने के साथ ही इनकी कालाबाजारी की शिकायतें आने लगी हैं। 5400 रुपये में मिलने वाली रेमडेसीविर दवा 40 हजार तक में बेची जा रही है। जबकि दवा का अब तक बेहतर परिणाम सामने नहीं आया हैं।

इलाज की अवधि कर रहीं कम
मंत्रालय का कहना है कि इन दवाओं को शर्तों के साथ सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। रेमडेसिवीर और टोसिलिजुमैब जान बचाने में सहायक नहीं है लेकिन निगरानी में देने पर मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकता है।


मिले-जुले असर दिखे...
दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि अभी तक दवाओं के मिले-जुले असर ही नजर आ रहे हैं। कुछ दवाओं जैसे रेमडेसिविर और डेक्सामेथासन के परिणाम अच्छे हैं, लेकिन अभी यह परीक्षण दौर में ही हैं। इसलिए हर मरीज या हर स्थिति में नहीं दे सकते। उन्होंने बताया, एक हजार से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों के डॉक्टरों को इन दवाओं के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी जा रही है।

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