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न खाना-न पैसा, पर पैदल ही दस दिन में पुणे से प्रयागराज पहुंच जाएंगे
Mon, 11 May 2020 05:08 AM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 11 May 2020 05:08 AM IST
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छत्तीसगढ़ से पैदल चलकर परिवार के साथ लखनऊ जाता प्रवासी मजदूर।
- फोटो : PTI
लॉकडाउन के चलते रोजी रोटी बंद होने से बदहाल प्रवासी मजदूर भूखे प्यासे पैदल ही घरों की ओर रुख कर चुके हैं। पुणे से साथियों संग यूपी के लिए पैदल निकले संदीप के होंठ अपनी पीड़ा बताते हुए कांपने लगते हैं।
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वो कहता है ‘हमारे पास खाने को एक रुपया भी नहीं है, किसी ने बताया नहीं कि प्रयागराज को ट्रेनें चल रही हैं। इसलिए पैदल ही जाने का फैसला कर लिया है, उम्मीद है कि दस दिन में पहुंच जाएंगे। राजेश बताते हैं, थाने गए थे, वहां बताया गया कि यातायात का साधन नहीं है। इसलिए पैदल निकल पड़े।
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दस साल बाद परिवार से मिला
लॉकडाउन ने मूक-बधिर युवक को परिवार से दस साल बाद मिला दिया। महाराष्ट्र से निकले 500 मजदूर जब मप्र के सेंधवा पहुंचे तो इंस्पेक्टर विनोद यादव ने पूछताछ की। बीस वर्षीय युवक ने जाति नाम ‘उरावे’ लिखा।
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उन्होंने यह जानकारी आयकर अधिकारी युवराज ठाकुर को दी तो उन्होंने युवक की फोटो वाट्सएप पर वायरल कर दी। वायरल फोटो देखने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया कि ये कोरबा जिले के स्याहीमुडी गांव का है जो 2010 में लापता हो गया था।