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मुंबई: बहकावे और प्रलोभन के चलते बांद्रा स्टेशन पर जुटे मजदूर, सरकार से चाहते थे सहूलियतें

Fri, 17 Apr 2020 02:42 AM IST
योगेश साहू सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई।
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 17 Apr 2020 02:42 AM IST
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Coronavirus Case News In Hindi : Mumbai, Workers gathered at Bandra station due to seduction, wanted privileges from government
सूरत में लॉकडाउन के बीच अपने घर जाने देने की मांग करते प्रवासी मजूदर। - फोटो : PTI

मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर मजदूरों की भीड़ क्यों जुटी। क्या किसी ने उकसाया था या फिर और कोई वजह थी। इसको लेकर पुलिस की छानबीन जारी है। लेकिन, अंदरखाने से जो बातें छनकर सामने आ रही हैं, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मजदूरों की भीड़ महज बहकावे में ही नहीं बल्कि प्रलोभन के चलते इकट्ठा हुई थी। मजदूर चाहते थे कि उनके खाने-पीने की उचित व्यवस्था हो।

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मुंबई में लॉकडाउन का उल्लंघन कर भीड़ कैसे जुटी, जबकि बांद्रा से लेकर मुंबई के दूसरे छोर दहिसर तक करीब 17 स्थानों पर पुलिस की नाकाबंदी है। जगह-जगह पुलिस ने पहरा लगाया हुआ है। लेकिन जीवनावश्यक और अत्यावश्यक सेवाओं की अनुमति है। ऐसे में हजारों की संख्या में बांद्रा स्टेशन के पास भीड़ कैसे इकट्ठा हो गई।
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यह भीड़ बांद्रा से शास्त्री नगर और महाराष्ट्र नगर से आई थी। जो मस्जिद के पास खाली पड़े बेस्ट बस डिपो परिसर में इकट्ठा हुई। बांद्रा पश्चिम के स्थानीय निवासी गफ्फार शेख बताते हैं कि बेस्ट डिपो के पास ही चार-चार मंजिली झुग्गियां बनाई गई हैं जिसमें मुर्गी के दड़बे की भांति दूसरे राज्यों से आए मजदूर रहते हैं। जो भीड़ इकट्ठा हुई थी, उसमें अधिकांश लोग इसी झोपड़पट्टी से आए थे।
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दूसरी ओर, गांव जाने के लिए जुटे लोगों के पास कोई बैग या झोला नहीं था। बताया गया कि इन मजदूरों में सभी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के थे। लेकिन इस रूट की रेलगाड़ियां लोकमान्य तिलक टर्मिनस से छूटती हैं, जबकि बांद्रा टर्मिनस से उत्तर प्रदेश व बिहार की ओर जाने वाली इक्का-दुक्का गाड़ियां ही हैं।

इस बारे में जावेद बरमारे बताते हैं कि कुछ लोगों को यह लगा कि भीड़ जुटेगी तो मीडिया आएगी और नेता भी पहुंचेंगे। उनके आने से मजदूरों के लिए कुछ न कुछ घोषणाएं हो सकेंगी। इससे मजदूर लॉकडाउन-2 में आसानी से 3 अप्रैल तक अपना गुजारा कर सकेंगे।

किसी को खाने की समस्या तो किसी को गांव जाने की चिंता

बांद्रा के शास्त्रीनगर और महाराष्ट्र नगर की झोपड़पट्टियों से बेस्ट के डिपो में जुटी भीड़ में अधिकांश मजदूर खाने-पीने की समस्या से परेशान थे, तो कई लोगों को गांव जाने कि चिंता सता रही है। इस झोपड़पट्टी क्षेत्र की 10 बाई 10 की एक झोपड़ी में 10 से 15 मजदूर रहते हैं।

पहले शिफ्ट में लोग आराम से रह लेते थे। लेकिन अब परेशानी हो रही है। जावेद बरमारे कहते हैं कि पश्चिम बंगाल से आए कुछ परिवार ऐसे हैं जो एक ही झोपड़ी में करीब दर्जनभर लोग रहते हैं। अब कोई काम नहीं है। रोज कमाने और खाने वाले मजदूरों का दिन-रात एक ही झोपड़ी में गुजारा नहीं हो रहा है। उनके पास पैसे की कमी तो है ही, रहने के लिए जगह भी मुअस्सर नहीं है।

मोबाइल रिचार्ज नहीं होने से परिवार से टूटा संपर्क: शेलार

कोरोना महामारी के संकट में जारी लॉकडाउन के बीच मजदूरों की एक और छोटी समस्या है लेकिन उनकी दृष्टि में वह बहुत बड़ी है। दरअसल, इस वक्त मजदूरों का एकमात्र सहारा मोबाइल फोन है, जिससे वे अपने गांव और परिवार में बात कर समय बिताते हैं।

बांद्रा पश्चिम से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री आशीष शेलार ने बांद्रा स्टेशन पर भीड़ जुटने की घटना के बाद कई दिहाड़ी मजदूरों से उनकी समस्या के बारे में बात की। शेलार ने बताया कि अधिकतर मजदूर प्रीपेड मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हैं। अब रिचार्ज खत्म हो गया है और रिचार्ज करने वाली दुकानें भी बंद हैं।  इसलिए गांव में परिवारवालों से भी संपर्क टूट गया है। इससे उनकी टेंशन और बढ़ी है।

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