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कुरुक्षेत्र: कोरोना युद्ध के दूसरे दौर में फ्रंट फुट पर आए गैर भाजपाई मुख्यमंत्री
Sun, 12 Apr 2020 03:47 AM IST
योगेश साहू
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 12 Apr 2020 03:47 AM IST
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महाराष्ट्र के ठाणे में लॉकडाउन को लेकर जरूरी दिशा—निर्देशों की घोषणा करता एक पुलिस कर्मी।
- फोटो : PTI
कोरोना संक्रमण के खिलाफ जारी देशव्यापी जंग में अब कांग्रेस शासित और गैर एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। कांग्रेस अपने मुख्यमंत्रियों को मीडिया में आगे करके यह सियासी संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके मुख्यमंत्री कोरोना विरोधी लड़ाई में भाजपा एनडीए शासित राज्यों की तुलना में ज्यादा अच्छा काम कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शनिवार को हुए मुख्यमंत्रियों के संवाद में गैर एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री बेहद मुखर थे, जबकि पिछली बार जब प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से संवाद किया था, तब सिर्फ आठ मुख्यमंत्री ही बोले थे और उन्होंने भी ज्यादातर मामलों में प्रधानमंत्री की हां में हां ही मिलाई थी। लेकिन इस बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, अशोक गहलौत, भूपेश बघेल, और सहयोगी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन और ममता बनर्जी ने राज्यों के अधिकारों और आर्थिक हिस्सेदारी को लेकर केंद्र से खुलकर अपनी बात की।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए ज्यादा वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। सोरेन ने कहा कि झारखंड के हिस्से का बकाया जीएसटी और राज्य में केंद्र सरकार के उपक्रमों पर बकाया करोड़ों रुपए का तत्काल भुगतान कराया जाए। जबकि बघेल ने कहा कि वह लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में तो हैं लेकिन उनके राज्य में कोरोना के संक्रमण को लगभग सीमित और नियंत्रित कर लिया गया है इसलिए कुछ आर्थिक गतिविधियों को चलाने की अनुमति दी जाए।
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दरअसल भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जहां अपनी ही केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुशासन की सीमाओं में बंधे हैं, वहीं गैर एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कोरोना विरोधी जंग में खुद भी धड़ाधड़ फैसले ले रहे हैं और साथ साथ वह केंद्र सरकार पर भी अपने माकूल निर्णय लेने का दबाव बना रहे हैं। उड़ीसा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने जिस तरह केंद्र की घोषणा से पहले ही अप्रैल के आखिर तक अपने अपने राज्यों में लॉकडाउन बढ़ाकर केंद्र लॉकडाउन आगे बढ़ाने का दबाव बढ़ाया उसका नतीजा था कि शनिवार को प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में लगभग सभी मुख्यमंत्री लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में दिखे।
उधर एक रणनीति के तहत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी के बाद पार्टी ने अपने मुख्यमंत्रियों को अलग से भी मैदान में उतार दिया है। अब कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत, भूपेश बघेल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और वी नारायणसामी सीधे मीडिया के सामने आकर न सिर्फ कोरोना के खिलाफ अपनी सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दे रहे हैं, बल्कि इस लड़ाई में केंद्र सरकार की कमियों की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार देर से जागी इसलिए कोरोना का संकट देश में बढ़ गया।
जहां कांग्रेस शासित राजस्थान में कोरोना के बढ़े मामलों के बावजूद कोरोना संक्रमण को पूरी तरह नियंत्रित करने वाला भीलवाड़ा मॉडल है जिसे कांग्रेस कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक शो केस बना रही है। वहीं उसका दूसरा राज्य छत्तीसगढ़ और उसके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टीवी मीडिया में जबर्दस्त तरीके से कोरोना विरोधी जंग का अभियान छेड़ रखा है। मीडिया में इतना सघन प्रचार किसी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री का नहीं है। बघेल के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प.बंगाल सरकार के भी विज्ञापन मीडिया में दिखते हैं।
कोरोना संक्रमण को लेकर सबसे पहले चेतने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ भी एक राज्य है। फरवरी में जब राजस्थान और दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य प्रशासन को अलर्ट कर दिया। राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासन ने राज्य के सभी प्रवेश मार्गों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर यात्रियों की निगरानी और जांच शुरु करवा दी थी।
मार्च के पहले सप्ताह में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद और सार्वजनिक कार्यक्रम न करने के आदेश दे दिए गए।आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व घोषित कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए। होली के फौरन बाद सभी माल्स, सिनेमा घर और मनोरंजन केंद्र बंद करवा दिए गए। रेस्त्रां में बैठकर खाने पर रोक लग गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 22 मार्च के जनता कर्फ्यू से पहले 19 से 21 मार्च तक राज्य में स्वैच्छिक लॉकडाउन कराया गया।
छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कामयाबी अब तक यह है कि राज्य के गावों और आदिवासी इलाकों में ग्रामीणों ने स्वैच्छिक नाकेबंदी करके गावों में बाहरी लोगों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। नतीजा ये कि गांवों तक यह बीमारी अभी तक नहीं पहुंची। राज्य सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि गावों में कोई भूखा न रहे, इसके लिए राज्य सरकार ने हर ग्राम पंचायत को दो कुंतल चावल लगातार देना शुरु कर दिया है।ग्राम पंचायत यह चावल उन परिवारों को निशुल्क देती है जिनके पास चावल नहीं होता। जैसे ही यह चावल खत्म होने वाला होता है दो कुंतल चावल की आपूर्ति फिर कर दी जाती है।
यह सिलसिला टूटने नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे के बीपीएल कार्ड धारक परिवारों को दो महीने का अग्रिम राशन उपलब्ध करा दिया गया है। जिसमें 70 किलो चावल, चार किलो चीनी और दो किलो नमक शामिल है। जिस परिवार में चार से ज्यादा सदस्य हैं उनको प्रति अतिरिक्त व्यक्ति सात किलो चावल प्रति माह दिया जाता है जो दो महीने के अग्रिम राशन के रूप में 14 किलो चावल प्रति सदस्य दे दिया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि इसलिए छत्तीसगढ़ के गावों में किसी के सामने भूख मिटाने का संकट नहीं है।
करीब करीब इसी तरह आदिवासी बहुल दूसरे राज्य झारखंड में भी राज्य सरकार समय से पूर्व चेत गई। सबसे पहले राज्य से मिलने वाली बिहार, प.बंगाल और छत्तीसगढ़ की सीमाएं सील की गईं। झारखंड में सबसे ज्यादा दबाव बिहार से आने वालों का था। राज्य सरकार ने पूरी सख्ती से बिहार से लगी सीमाओं की नाकेबंदी करवा दी। लेकिन झारखंड के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने लाखों प्रवासी मजदूर जो दूसरे राज्यों से वापस अपने गावों में आ गए हैं, उन्हें संभालने की है। राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिए राज्य सरकार ने आपदा निधि से स्वास्थ्य विभाग को तत्काल 25 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए।
हर जिले के उपायुक्तों को 50-50 लाख रुपए की राशि दी गई। सभी 4562 पंचायतों के मुखिया को दस-दस हजार रुपए की राशि भेजी गई। सभी नगर निकायों के प्रत्येक वार्ड को दस-दस हजार रूपए की राशि दी गई। प्रदेश के सभी 342 पुलिस थानों में पुलिस की मदद से सामुदायिक रसोई शुरु की गई। राज्य में 875 दाल भात केंद्र चालू किए गए, जिनमें 388 केंद्रों पर खिचड़ी दी जा ही है। 498 विशेष दालभात केंद्र शुरू किए गए जिनमें लॉकडाउन तक हर केंद्र में रोज 200 लोगों को मुफ्त भोजन मिल रहा है।
पिछले दिनो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडिया कान्फ्रेंसिंग के जरिए पहली बार बात की तो उन्होंने हर राज्य में कोरोना के खिलाफ उठाए गए कदमों और उनके नतीजों का जायजा लिया था। हालांकि महज आठ मुख्यमंत्री ही उसमें अपनी बात कह पाए थे, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री को जो जानकारी मिली थी, उससे वह कोरोना विरोधी जंग में जिन दस राज्यों के कामकाज से संतुष्ट थे, उनमें ज्यादातर छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य आगे थे।