संक्रमण ज्यादा, लेकिन हालात बेकाबू नहीं, ज्यादा टेस्ट से अधिक दिख रही है संख्या
गुजरात समृद्ध राज्यों में शुमार है, लेकिन यह देश में दूसरा सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित प्रदेश भी बन गया है। हालात इतने खराब हो गए कि केंद्र सरकार को अपनी टीम भेजनी पड़ी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के मजदूर लगातार खराब व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्हीं मामलों और महामारी के बाद राज्य के आर्थिक हालात पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से शरद गुप्ता ने लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश...
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विस्तार
गुजरात में इतने व्यापक संक्रमण की वजह क्या है?
यह सच है, कुछ दिनों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे बड़ा कारण ज्यादा संख्या में टेस्ट भी हैं। अभी हम रोज 3000 से अधिक टेस्ट कर रहे हैं। एक लाख से अधिक टेस्ट किए गए हैं। लगभग 7000 से अधिक पॉजिटिव आए हैं। अहमदाबाद जैसे घनी आबादी वाले शहर में तब्लीगी जमात के लोगों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार भी जिम्मेदार है। इसके पहले अहमदाबाद में केस काफी कम थे। जमात के लोगों ने अपनी ट्रैवल हिस्ट्री छिपाई और सरकार के साथ नहीं किया। तभी लग गया था कि नुकसान काफी हो चुका है। हमें संख्या की परवाह नहीं है, हमें लोगों की परवाह है, हालात काबू में है।
चिकित्सा प्रणाली में कोई खामी है?
देखिए, यह सामान्य बीमारी नहीं है, जिसे केवल चिकित्सीय नज़रिए से देखा जाए। स्वास्थ्य क्षेत्र में हम किसी से पीछे नहीं है। यह जंग किसी एक सरकार, समाज के किसी एक वर्ग और किसी एक उद्योग या व्यापार समूह की नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज की लड़ाई है। हम तभी विजय प्राप्त कर सकते हैं जब समग्रता के साथ इससे लड़ा जाए और गुजरात यही कर रहा है।
क्या कदम उठाए गए?
हम शुरुआत से ही सक्रिय रहे हैं। 19 मार्च को पहले केस के आने से कई दिन पहले ही हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। गुजरात में भी इंटरनेशनल ट्रैवलिंग काफी होती है। शुरुआती दिनों में ही स्कूल, कॉलेज, मॉल, धार्मिक आयोजन बंद कर दिए। चार महानगरों में मात्र 6 दिन में डेडिकेटेड अस्पताल तैयार कर लिए। आज गुजरात में लगभग साढ़े 12 हजार से भी अधिक डेडिकेटेड आइसोलेशन बेड्स हैं। 61 प्राइवेट अस्पताल कोरोना के इलाज में सरकार का सहयोग कर रहे हैं। सूरत में डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग कर रहे हैं। हमारे राज्य में ही वेंटिलेटर का प्रोडक्शन किया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ है?
आबादी का मात्र 5 फीसदी वाला गुजरात देश की जीडीपी में 7.5 फीसदी का योगदान देता है। सभी उद्योग-धंधे बंद हैं, इसलिए जाहिर है, राजस्व पर काफी प्रभाव पड़ा है। लेकिन, गुजरात की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता की बात नहीं है। 20 अप्रैल के बाद से हमनें सख्त नियम व शर्तों के साथ कुछ उद्योगों और दुकानों को खोलने की अनुमति दी है।
किसानों-उद्योगों की कैसे मदद कर रहे हैं?
किसानों के लिए कृषि उत्पाद विपणन समिति को शुरू करने से लेकर रबी फसलों की कटाई, ढुलाई और मार्केटिंग यार्ड तक लाने की अनुमति दी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद कर रहे हैं। अप्रैल में ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रति किसान को 2000 रुपये को भुगतान किया। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को किस्त में भी दो महीनों की छूट दी है। ये दो किस्तें सरकार देगी।
अर्थव्यवस्था पटरी पर आने में कितना समय लगेगा?
गुजरात हमेशा से ही प्रो-इंडस्ट्री और प्रो-लेबर स्टेट रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पटरी में लाने का पहला चरण शुरू हो चुका है। हालात पर नजर बनाए हुए हैं जैसे-जैसे गुजरात के बाकी हिस्सों में हालात बेहतर होंगे, पूरी सतर्कता के साथ उद्योगों-धंधों को पूरी तरह खोल देंगे। अब तक 45 हजार से अधिक उद्योग शुरू हो चुके हैं और इसमें 7 लाख से अधिक मजदूर भाई-बहन काम कर रहे हैं।
मजदूरों के लिए क्या कर रहे हैं?
मजदूरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। हमने बिना राशनकार्ड भी प्रवासी परिवारों को मुफ्त गेहूं, चावल, दाल, चीनी व नमक उपलब्ध कराया। फूड पैकेट्स भी दे रहे हैं। शेल्टर होम की व्यवस्था भी की है। यह सही है कि शुरुआत में सूरत के कुछ हिस्सों में मजदूर सड़कों पर निकल आए थे, पर उन्हें हालात की गंभीरता के बारे में समझाया। वो समझ रहे हैं। जो घर जाना चाहते हैं, उन्हें भी हम ट्रेनों से भेज रहे हैं।
गुजराती दुनियाभर में हैं? क्या सरकार उनकी खोज खबर ले रही है?
बिल्कुल, हम हर नागरिक से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं। मेरी भी बात हुई है, बाकी से प्रशासन संपर्क कर रहा है। 29,540 गुजराती देश के अलग-अलग हिस्सों से वापस आ चुके हैं। गुजरात के विद्यार्थी व पर्यटक जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं उन्हें भी वापस लाया जा रहा है। पहले राउंड में फिलीपींस, अमेरिका, सिंगापुर, ब्रिटेन व कुवैत से लाया जाएगा। विदेशों से आने वाले छात्रों व व्यापारियों के लिए क्वारन्टीन की भी व्यवस्था कर ली है।
संकटकाल की सबसे बड़ी सीख...
हमारा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि हर चुनौती के बाद गुजरात और निखर कर दुनिया का सामने उभरा है। यह सदी की सबसे बड़ी महामारी है। विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। चुनौतियों का सामना करना गुजरात की परंपरा बन गई है। इसीलिए आज हम देश के सबसे विकासशील राज्यों में से एक हैं। कोरोना अग्निपरीक्षा की तरह है। मुझे विश्वास है कि गुजरात इसे जरूर पार करेगा।