Coronavirus: सांसद निधि खत्म करके प्रधानमंत्री ने सबको लाचार बना दिया- बसपा सांसद रितेश पांडे
- भाजपा सांसद भी दुखी, दर्द ऐसा न कह सकें न सह सकें
- अब कैसे पूरी करेंगे आपदा या विकास में जनता की जरूरतें
- केवल प्रशासन, सरकार के सामने गुहार लगाने का ही बचा चारा
- गुलामनबी आजाद ने भी प्रधानमंत्री को दिया है सांसद निधि के इस्तेमाल पर सुझाव
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रितेश कहते हैं कि उनकी नेता, पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी कोविड-19 से मुकाबले के लिए समर्थन देने की घोषणा कर दी है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो साल के सासंद निधि को डायवर्ट करके उन जैसे तमाम सांसदों को लाचार बना दिया है। रितेश का कहना है कि यह इकलौते उन्हीं का दर्द नहीं है। तमाम दलों के सांसद भी इस फैसले से चिंतित हैं।
दर्द ऐसा कि न कह सकें और न सह सकें
रितेश का कहना है कि यह ऐसा मामला है कि वह कुछ नहीं कह सकते। कोविड-19 महामारी है। पूरी दुनिया पीडि़त है। भारत में भी इसने पांव पसार लिए हैं। इसलिए देश की जनता की जान बचाना ही सर्वोपरि है। इसलिए सांसद निधि के इस मद में खर्च किए जाने का वह किस अधिकार से विरोध करें? कर ही नहीं सकते।
रितेश का कहना है कि 700 जिले हैं। सांसध निधि में केन्द्र सरकार 12 महीने में 3500 करोड़ रुपया देती है। इस तरह से 24 महीने में 7000 करोड़ रुपये की राशि इस मद की कोविड-19 का संक्रमण रोकने के क्रम में खर्च की जानी है। इसका खर्च केन्द्र सरकार अपने हिसाब से जहां उचित समझेगी करेगी। लेकिन इसे लेकर चिंता भी है।
आखिर हम सांसद क्या करेंगे?
बसपा सांसद का कहना है कि सांसद निधि का उपयोग हम सांसद अपने क्षेत्र के विकास में करते हैं। आपदा के समय जनहित में करते हैं। सांसदों का वेतन 30 प्रतिशत तक कम हो गया, यह तो ठीक हुआ। हमें इसमें खुशी होती है, लेकिन सांसदों के पास अपने क्षेत्र की जनता की सेवा के लिए अगले दो साल तक क्या रह गया?
लोग हमारे पास अपनी पीड़ा लेकर आएंगे और हम सब लाचार हैं। लोगों की मदद नहीं कर सकेंगे, उन्हें सहायता नहीं दे सकेंगे। गावों या कम विकसित क्षेत्रों में अब विकास के लिए जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, मंत्री या केन्द्र सरकार का मुंह देखना पड़ेगा। वैसे भी सब अपने में व्यस्त हैं तो कौन हमारी सुनेगा?
गांवों में चिकित्सा संसाधन विकसित करने में लगे यह धन
रितेश पांडे ने अपील की है कि केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह सांसद निधि का उपयोग सांसदों के क्षेत्र में, गावों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा गांवों के विकास पर खर्च करे। इसका क्षेत्रवार उपयोग हो ताकि जहां दूर-दराज के क्षेत्र में विकास या संसाधन नहीं हैं, उनका विकास हो सके।
रितेश पांडे जो मांग कर रहे हैं, यही मांग राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने भी की है। उन्होंने भी प्रधानमंत्री से कहा कि सांसद निधि का प्रयोग जिस राज्य और क्षेत्र के सांसद हैं, उधर किया जाए।
अकेले हमारी पीड़ा नहीं है
रितेश ने कहा कि उन्होंने कई सांसदों का मन टटोला। यह केवल उनकी समस्या नहीं है। यह कई पार्टियों के सांसदों की समस्या है। भाजपा के कुछ सांसदों ने भी रितेश से इस बाबत सहमति जताई है। सब को इससे हैरानी है। यह बात अलग है कि किसी कारण से अन्य सांसद अपनी पीड़ा नहीं व्यक्त कर पा रहे हैं।
सांसदों के पास वैसे भी क्षेत्र में विकास कार्य कराने का कोई और स्रोत नहीं होता। पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक सांसद को भी सांसद निधि का खुद के विवेक से प्रयोग न कर पाने का दुख है। उत्तराखंड के एक सांसद ने भी कहा कि सांसद निधि का वह प्रयोग कर पाते तो अच्छा था।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों की निधि केवल एक साल तक ही इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। यह निर्णय केंद्र की तुलना में ज्यादा अच्छा है।