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कोरोना वायरस : उत्तर प्रदेश के जिले महामारी से मुकाबले के लिए तैयार हैं क्या?

Mon, 30 Mar 2020 02:30 AM IST
योगेश साहू डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली/लखनऊ।
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली/लखनऊ। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 30 Mar 2020 02:30 AM IST
सार

  • अगले 2-3 दिनों में 3-4 हजार लोग जिले के बाहर से अपने घर लौट सकते हैं, ऐसे एक जिले का उदाहरण
  • जांच किट का अभाव, टेस्टिंग लखनऊ के आसरे
  • आइसोलेशन और क्वारंटीन सेंटरों को कर रहे तैयार
  • गांव-कस्बें के घरों में 2500 क्वारंटीन, ग्रामीण भी सतर्क
  • जिले की सीमाओं पर थर्मल चेकअप
  • डॉक्टर, पैरा-मैडिकल स्टाफ के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अभाव
  • निर्धनों, मजदूरों को सीधे भुगतान की मशक्कत जारी
  • सब जुटे हैं सूचियां बनाने में

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Coronavirus: Are the districts of Uttar Pradesh ready to compete or fight against Corona virus, lockdown india
कोरोना वायरस : देश में लागू लॉकडाउन के दौरान घर के बाहर सड़क पर खेलते बच्चे। - फोटो : PTI

विस्तार

उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में प्रशासन के सामने कोरोना वायरस से निपटने की चुनौती हर आने वाले पल के साथ गहरा रही है। जिस तरह से देश के अलग-अलग हिस्सों से दिहाड़ी मजदूर अपने गांव को लौटने के लिए मजबूर हो निकल पड़े हैं, उससे नई किस्म की चुनौतियां प्रदेश के अनेक जिलों के प्रशासन के लिए पनपने लगी हैं।

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कितना तैयार है जिला प्रशासन इसके लिए, यह समझने के लिए अमर उजाला ने नेपाल की सीमा से लगे प्रदेश के एतिहासिक महत्व के जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को जानने की कोशिश की। जितनी गंभीर चुनौती बन रही है, उसके मुकाबले तैयारी कमजोर है अभी।
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जहां अगले 2-3 दिनों में 3-4 हजार लोग जिले के बाहर से अपने घर लौट सकते हैं, ऐसे एक जिले के उदाहरण से जानते हैं, किस तरह से हो पा रही हैं व्यवस्थाएं।  शुरुआती शिथिलता और असमंजस के बाद अब प्रशासनिक अमला, पुलिस और कुछ स्थानीय सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम कर रहे हैं।
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पूरे जिले की रिपोर्ट शाम 5 बजे डीएम तक जा रही है। प्रशासन समझ रहा है कि बीमारी बाहर से आए लोगों से फैल रही है। इसलिए जो संक्रमित हैं या जिनमें संक्रमण की आशंका है, सबसे पहले उन्हें क्वारंटीन करने की व्यवस्था करने पर फोकस किया जा रहा है।

टेस्टिंग लखनऊ के आसरे
जांच किट की कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में नाक और मुंह से स्वैब लेकर उसे लखनऊ भेजने भर की व्यवस्था है। विशेष वाहन से सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। रिपोर्ट 4 दिन में आए या हफ्ते में, पता नहीं। जिन्हें क्वारंटीन में जिला मुख्यालय में रखा गया है, उनकी लक्षणों के आधार पर देखभाल की गई और फिर ठीक पाए जाने पर घर भेजा गया है।

आइसोलेशन और क्वारंटीन सेंटर कर रहे तैयार

गंभीर संक्रमित या संभावितों के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन सेंटर बनाया है। जिला मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर भी आइसोलेशन सेंटर तैयार कर रहे हैं। इसी के साथ जिला अस्पताल के पास एक क्वारंटीन सेंटर भी बनाया है।

इसके अलावा पॉलिटैक्निक और आईटीआई समेत जिला मुख्यालय के 13 अन्य सरकारी शैक्षिक संस्थानों पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इन स्थानों पर खाने की व्यवस्था के साथ ही डॉक्टर और आशा संगनी की ड्यूटी लगाई गई है। यहां क्वारंटीन में अब तक 77 लोगों को रखा गया था। कुछ दिन की जांच के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई। रविवार को 10 और आए।

जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आइसोलेशन सेंटर की (या क्वारंटीन) की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।

घरों में 2500 क्वारंटीन, ग्रामीण भी सतर्क

आंगनबाड़ी, एएनएम तथा पंचायत के कर्मचारियों द्वारा ढाई हजार ऐसे लोगों की सूची स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है जो बाहर से आए हैं। इनको अनिवार्य रूप से क्वारंटीन में रखा जा रहा है। या तो इनके घरों में या फिर प्रशासन द्वारा तैयार किए 12 केंद्रों पर। गांव-कस्बों में लोग घरों में क्वारंटीन किए गए हैं।

उनकी सूचना घरों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई है। जिसकी की भी प्रवासन (माइग्रेशन) की हिस्ट्री है, उसे घर पर ही क्वारंटीन कर रहे हैं। चिकित्सा विभाग ने इनके घरों के बाहर सूचना चस्पा कर दी है कि इन्हें 14 दिन घर से बाहर न निकलने दें, न किसी से मिलने दें।

इसे लेकर गांव के लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। जैसे ही कोई बाहर से गांव में पहुंचता है, ग्रामीण खुद ही कह रहे हैं कि जाओ, चेकअप करा कर आओ।

जिले की सीमाओं पर थर्मल चेकअप

बीते शुक्रवार से शनिवार के बीच ही लगभग दो हजार लोग बाहर से पैदल या बसों से अपने घरों को लौटे हैं। अगले दो दिनों में यह संख्या 6-7 हजार तक पहुंच सकती है। जिले की सीमा पर बाहर से आने वालों का थर्मल चेकअप माथे का ताप माप कर किया जा रहा है। बाहर से आने वालों में सऊदी से आने वाले भी हैं, सभी को क्वारंटीन किया गया है। नेपाल से लगी सीमा पर परीक्षण शिविर लगे हैं।

डॉक्टर, पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अभाव
कोरोना संक्रमितों और संभावितों की सेवा में लगे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के इंतजामों की बात करें तो अभी केवल प्लास्टिक के शू-कवर, हाथ के दस्ताने और एन-95 मास्क हैं, और कुछ नहीं। सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) की नई खेप का इंतजार है।

जिले में केवल 2-3 पीपीई अभी उपलब्ध हैं। सैनेटाइजर का भी इंतजार है। पूछने पर अधिकारी ने कहा कि जिले में इन्हें बनाने की अभी कोई व्यवस्था नहीं है। जिले के निजी नर्सिंग होम और अस्पताल निष्क्रिय से नजर आ रहे हैं।

गरीबों, मजदूरों को सीधे भुगतान की मशक्कत जारी

गांवों में जो निर्धनतम लोग हैं उनकी सूची बन रही है। औसतन गांव में 20-25 ही ऐसे लोग हैं। इनके खातों में 31 मार्च तक एक-एक हजार रुपये भेजने की कोशिश जारी है। श्रम विभाग से भी मजदूरों की सूची ली जा रही है। लगभग 12 हजार की उन मजदूरों की सूची तैयार की गई है जिन्होंने नवीकृत (रिन्यूअल) कराया है।

उन्हें कोरोना त्रासदी के तहत सीधे एक-एक हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पुराने रजिस्टर्ड मजदूरों की भी सूची तैयार हो रही है। लखनऊ से शासनादेश आने पर इन्हें भी इसी तरह से भुगतान किया जा सकता है। मनरेगा के वे मजदूर जिन्होंने अपने पंजीकरण को नवीकृत करा लिया था, उनको बकाया भुगतान किया जा रहा है।

खेतों पर बिना प्रतिबंध काम-काज, चहल-पहल
गांवों में खेतों पर काम करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लोग मसूर और लाही निकाल रहे हैं और गेहूं की कटाई 12-15 दिनों में होगी। गेहूं की कटाई के लिए ग्रामीण कंबाइन कटाई मशीन का पंजाब की तरफ से आने का इंतजार कर रहे हैं। 12-15 दिन के बाद उसी से कटाई का काम शुरू करने की तैयारी है ग्रामीणों की। दुकानें खुलने नहीं दी जा रही हैं।

सब जुटे हैं सूचियां बनाने में, हेल्पलाइन भी है

बावजूद इसके कि डीएम ने पूरे अमले को काफी दौड़ाया हुआ है, शासन से धन भी काफी आ रहा है, सबकुछ पूरी तरह से ढर्रे पर आने में अभी एक हफ्ता लग सकता है। कई कर्मचारी जो पदस्थ तो यहां हैं लेकिन शहर से बाहर थे, वे अपने स्थानों से ही व्हाट्सएप से सूची वगैरह बना कर भेज रहे हैं।

ब्लॉक में सारे कर्मचारी सूचियां बनाने में जुटे हैं। मनरेगा का पैसा ट्रांसफर करने में, गांवों के निर्धनतम लोगों की सूची बनाने में। साथ ही, फल-सब्जियों के मार्केट रेट की रोज सूची बनकर डीएम के पास जा रही है। मुख्यमंत्री भी रोज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहे हैं, रात 9 बजे के आसपास। डीएम, कमिश्नर से पूरा अपडेट ले रहे हैं।

हेल्पलाइन है, उपयोग कम ही कर रहे लोग
अपरिहार्य पारिवारिक कारणों से जिन्हें जिले से बाहर जाने की जरूरत है, उनकी कठिनाई अभी भी वैसी ही बनी हुई है। हालांकि मदद के लिए या पास बनवाने के लिए पुलिस की गाड़ी बुलाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 है। पुलिस कंट्रोल रूम के जरिए जरूरतमंदों को मदद दी जा रही है। यह दीगर बात है कि लोग इसका प्रयोग कम ही कर रहे हैं।

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