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कोरोना के प्रसार में केरल बनने से बच सकता है पश्चिम बंगाल
Tue, 20 Oct 2020 03:00 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 20 Oct 2020 03:00 AM IST
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Calcutta High Court
- फोटो : www.calcuttahighcourt.gov.in
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कोलकाता हाईकोर्ट का सोमवार को आया फैसला संभवत: पश्चिम बंगाल को केरल बनने से रोक सकता है। ओणम का त्यौहार मनाने के दौरान केरल में कोरोना बहुत तेजी से फैला। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसी ही आशंका थी।
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हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शकों के घुसने पर लगाए प्रतिबंध
इसीलिए कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजीव बनर्जी ने किसी भी पूजा पंडाल में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूर्णतया निषेध घोषित कर दिया है। उन्होंने अपने आदेश में राज्य की पुलिस को निर्देशित किया कि वह दुर्गा पूजा पंडाल से 10 मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाए और उनसे आगे केवल आयोजकों और पुजारियों को जाने की अनुमति हो।
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जस्टिस बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सोमवार के अखबार में दुर्गा पूजा की तैयारियों की तस्वीरें देखीं और उन्हें देखकर वे अंदर तक हिल गए। बाजारों में जिस तरह की भीड़ है उसे देखकर लगता ही नहीं कि राज्य किसी महामारी की चपेट में है। उन्होंने राज्य सरकार को आदेश दिया कि बड़े पंडालों में 25 से अधिक लोगों की उपस्थिति ना होने पाए और छोटे पंडालों में केवल 15। और यह भी सिर्फ स्थानीय आयोजक और पुजारी ही होंगे।
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यह हुआ केरल में
कोरोना के भारत में प्रवेश से पहले ही बचाव के इंतजाम शुरू करने वाला सबसे पहला प्रदेश केरल था। यही वजह है कि जब पूरा देश इस महामारी की चपेट में था तो केरल में इससे मरने वालों की संख्या दहाई तक भी नहीं पहुंची थी। लेकिन ओणम के बाद से वह नौ से दस हजार मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं। यह संख्या अन्य किसी भी राज्य से कहीं अधिक है।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी चेताया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी रविवार को केरल के हालात को चिंताजनक बताया था। उन्होंने कहा था कि मई के आखिर तक केरल में सिर्फ 449 मरीज थे।