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चौंकाने वाला खुलासा: दिमाग की नसों को कमजोर कर रहा कोरोना वायरस
Wed, 21 Oct 2020 07:03 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 21 Oct 2020 07:03 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
कोरोना वायरस के विषाणु शरीर के विभिन्न अंगों पर असर डालते हैं। अब तक के कई चिकित्सीय अध्ययन में इस बात का भी पता चला है कि कोरोना वायरस की वजह से मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है। पहली बार देश में कोविड संक्रमण के चलते दिमाग की नसें कमजोर होने का मामला सामने आया है।
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एम्स दिल्ली में भर्ती एक 11 वर्षीय बच्ची में यह परेशानी देखने को मिली
नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती एक 11 वर्षीय बच्ची में यह परेशानी देखने को मिली जिसके बाद डॉक्टरों ने भी उसे बचाने के लिए अध्ययन शुरू कर दिया है। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के कुछ दिन बाद बच्ची की हालत बिगड़ने लगी थी।
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उसे आनन-फानन में एम्स के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया इसके बाद चिकित्सकीय जांच में पता चला है कि संक्रमण की वजह से उसके मस्तिष्क की नसें कमजोर पड़ गई हैं। हालांकि एक लंबे अध्ययन और गहन निगरानी की वजह से बच्ची अब संक्रमण मुक्त है, लेकिन उसके मस्तिष्क पर अभी भी इसका असर है।
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एम्स के बाल न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ. शेफाली गुलाटी का कहना है कि नसें कमजोर पड़ने के चलते बच्चे की आंखों पर बुरा असर पड़ा है। इससे पहले कोविड संक्रमण का ऐसा मामला देखने को नहीं मिला है यह केस डॉक्टरों के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है। डॉक्टर गुलाटी ने बताया कि कोरोना की वजह से बच्ची के दिमाग में एक्यूट डेमालिनेटिंग सिंड्रोम (एडीएस) नामक परेशानी देखने को मिली। आमतौर पर 35 से 40 वर्ष की आयु के बाद या परेशानी देखने को मिलती है लेकिन कोरोना की वजह से इतनी कम आयु में पहली बार ही देखने को मिला है।
अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित की जा सकती है डॉक्टरों की अध्ययन रिपोर्ट
संक्रमण से बच्चों को बचा कर रखना बेहद जरूरी डॉ. गुलाटी
डॉ. गुलाटी का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर अब तक काफी कुछ स्थिति स्पष्ट हो चुकी है लेकिन बच्चों में यह किस तरह का प्रभाव डाल रहा है? इस पर आज भी बहुत कुछ पता करना बाकी है। इसलिए संक्रमण से बच्चों को बचा कर रखना बेहद जरूरी है। इस दुर्लभ मामले को लेकर एम्स के डॉक्टर एक अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं जिसे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जिन नसों के जरिए दिमाग शरीर के अन्य हिस्सों को संदेश पहुंचाता है उसे काफी नुकसान हुआ है। अगर बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं लाया गया तो उसके पूरे शरीर को नुकसान हो सकता था। उसकी दृष्टि, मांसपेशियां, ब्लैडर इत्यादि को नुकसान पहुंचा है।