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विशेषज्ञों ने कहा: कोरोना की नई बड़ी लहर की आशंका नहीं, त्योहारों में रहें सावधान
Fri, 22 Oct 2021 10:40 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 22 Oct 2021 10:40 PM IST
सार
भारत में पिछले तीन महीने के दौरान कोरोना के केस धीरे-धीरे घटे हैं। पहले रोजाना 40 हजार केस आते थे और अब यह आकंड़ा 15,000 के आसपास पहुंच गया है।
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भारत में कोरोना
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कई वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसी कोई अन्य खतरनाक लहर आने की संभावना कम है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने अभी भी त्योहारों के मद्देनजर सावधानी बरतने को कहा है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के आकंड़े जरूर घटे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि महामारी खत्म हो गई है।
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त्योहारों पर रहें सावधान
वैज्ञानिकों ने चेताया है कि दीपावली समेत अभी अन्य त्योहार आ रहे हैं। कोरोना का ग्राफ गिरना सिर्फ इस बड़े कैनवास का एक हिस्सा है। अभी बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाते रहने की है। वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कोरोना के अलग वैरिएंट ने फिर से दहशत पैदा कर दी है।
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अभी महामारी खत्म नहीं हुई
भारत में 100 करोड़ से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो चुका है। हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व विषाणु विज्ञानी शाहीद जमील ने पीटीआई को भेजे गए एक ईमेल में कहा कि वैक्सीनेशन की संक्रमण दर में काफी सुधार हुआ है, लेकिन अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। मैं इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हूं कि अभी हम महामारी के खत्म होने की स्थिति तक पहुंच चुके हैं। हमने 100 करोड़ टीकाकरण का जश्न मनाया है, लेकिन अभी आगे बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
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उन्होंने कहा कि भारत में पिछले तीन महीने के दौरान कोरोना के केस धीरे-धीरे घटे हैं। पहले रोजाना 40 हजार केस आते थे और अब यह आकंड़ा 15,000 के आसपास पहुंच गया है। अभी एनडेमिक स्टेज नहीं आया है। उन्होंने कहा कि किसी बीमारी के एनडेमिक स्टेज का मतलब यह है कि जब यह एक निश्चित भू-भाग में मौजूद हो लेकिन इसका असर बिलकुल न के बराबर हो।
देश में रोजाना 15 हजार मामले
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शुक्रवार के आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 के 15,786 नए मामले सामने आए। 231 मौतों के साथ कुल मृतक संख्या बढ़ कर 4,53,042 पर पहुंच गई। देश के सर्वश्रेष्ठ विषाणु विज्ञानियों में शामिल जमील ने कहा कि देश में मृत्यु दर करीब 1.2 प्रतिशत पर बनी हुई है। इससे पता चलता है कि भारत में टीकाकरण कवरेज को और बढ़ाने की जरूरत है।
वहीं, ब्रिटेन की मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी में गणित के वरिष्ठ लेक्चरर मुराद बानजी ने कहा कि इस बारे में हाल में कुछ भ्रमित करने वाले दावे किए गए हैं। कुछ समय तक मामले कम रहने का मतलब स्थानिकता से नहीं है। यह संभव है कि देश के कुछ हिस्सों में स्थानिकता करीब है लेकिन इसकी पुष्टि करने के लिए आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर हम नहीं जानते हैं कि अभी कितनी संख्या में ऐसे लोगों को संक्रमण हो रहा है जो टीका लगवाने से पहले भी संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, महामारी विशेषज्ञ रामनन लक्ष्मीनारायण ने कहा कि देश के सामने भविष्य में कोविड-19 का बड़ा खतरा आने का निर्धारण करने से पहले हमे दो महीने इंतजार करना चाहिए।