दर्दनाक: बिहार में बेटी ने अकेले दफनाया मां का शव, किसी ने नहीं की मदद
मां के शव को दफनाने के लिए अकेली लड़की की गड्ढा खोदती तस्वीर अखबार में प्रकाशित होने के बाद मामला सुर्खियों में आया। सोनी कुमारी के पिता वीरेंद्र मेहता एक झोला छाप डॉक्टर थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक मरीजों का इलाज करने के दौरान वो संक्रमित हो गए थे।
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कोरोना के इस समय में न जाने कितने बच्चों से मां-बाप का साया उठ गया। ऐसी एक खबर बिहार से है यहां अररिया के मधूलता में माता की कोविड-19 से मौत के बाद 14 साल की लड़की सोनी कुमारी और उसके भाई-बहन का गांववालों ने बहिष्कार कर दिया था। उन्हें माता-पिता का दाह संस्कार तक नहीं करने दिया गया।
इस घटना पर लगातार नजर बनाए रखनेवाले अररिया की मैं मीडिया नाम की संस्था के रिपोर्टर मेराज खान बताते हैं कि सोनी के पिता की मौत तीन मई को पूर्णिया में हो गई थी। उसकी 12 साल की एक बहन और 10 साल का एक भाई है।
परिवार ने वीरेंद्र मेहता के इलाज के लिए उनके पास बची जो थोड़ी जमीन और मवेशी थे, उसे बेच डाला। लेकिन पूर्णिया के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराने के बावजूद मेहता बच नहीं सके।
गांव का कोई व्यक्ति मेहता के अंतिम संस्कार में मदद के लिए नहीं आया तो तीनों बच्चों ने ही गड्ढा खोद कर पिता के शव को दफना दिया। तीन दिनों बाद, सात मई को बच्चों की मां प्रियंका देवी की भी मौत हो गई। बच्चों ने मां के शव को भी पिता की कब्र के बगल में गड्ढा खोद कर दफना दिया।
मुआवजे के लिए जद्दोजहद
बिहार सरकार ने पीड़ित बच्चों को मुआवजे में चार लाख रुपये का चेक दिया है। प्रियंका देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र मिल गया था जिसके बाद जिला प्रशासन ने मुआवजे के तौर पर चार लाख रुपए का चेक दे दिया है। लेकिन अभी तक पिता की मौत का प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है।
मेराज उसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बच्चों को पिता की मौत का भी मुआवजा मिल सके। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महामारी में मारे गए लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रूपये देने का ऐलान किया था। मेराज कहते हैं कि कुछ लोग बाद में मदद के लिए आगे आए
अफवाहों, मौतों और सामाजिक बहिष्कारों की कहानी
मेराज कहते हैं कि इस घटना को लोगों के सामने लाना जरूरी है। बिहार सरकार ने पीड़ित बच्चों को मुआवजे में चार लाख रुपये का चेक दिया है। प्रियंका देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र मिल गया था जिसके बाद जिला प्रशासन ने मुआवजे के तौर पर चार लाख रुपए का चेक दे दिया है।
लेकिन अभी तक पिता की मौत का प्रमाण पत्र नहीं मिल सका है। मेराज उसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बच्चों को पिता की मौत का भी मुआवजा मिल सके।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महामारी में मारे गए लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रूपये देने का ऐलान किया था। मेराज कहते हैं कि कुछ लोग बाद में मदद के लिए आगे आए।
पटना हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
मेराज कहते हैं कि यह घटना बिहार में कोरोना महामारी की कहानी का सार है ये कहानियां हैं अफवाहों, मौतों और गांवों में हो रहे सामाजिक बहिष्कारों की यह कहानी है अपनों की मौत के बाद अकेले पड़ जाने की। जैसे सोनी की दास्तां या फिर कहानी उन शवों की जो बक्सर में गंगा नदी के तट पर बहकर किनारे लग गए।
बक्सर में गंगा नदी के किनारे तैरती लाशों की घटना सामने आने के बाद पटना हाईकोर्ट ने अलग-अलग सरकारी एजेंसियों की ओर से बताई जाने वाली मौतों की संख्या में अंतर पर खासी नाराजगी जताई है।
जजों ने बिहार के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव से पूरी तरह जाँच-पड़ताल के बाद दो दिन बाद नए सिरे से रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है, डिवीजनल कमिश्नर के आधिकारिक बयान के मुताबिक 5 से 14 मई के बीच बक्सर के चारधाम घाट पर 789 शवों का अंतिम संस्कार हुआ था।