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वैक्सीन की किल्लत: कंपनियों का राज्यों को सप्लाई से इनकार, कई टीकाकरण केंद्र बंद, तीसरी लहर का खतरा बरकरार

Tue, 25 May 2021 06:38 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 25 May 2021 06:38 AM IST
सार

जिन राज्यों ने ग्लोबल टेंडर निकाले थे, उन्हें भी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। कंपनियां केंद्र सरकार को ही वैक्सीन मुहैया कराने पर जोर दे रही हैं। चिंता की बात है कि वैक्सीन की कमी लगातार बनी हुई है और टीकाकरण केंद्र बंद करने पड़े हैं। 

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Corona vaccine Global Tender Manufacturer companies denied state request
कोरोना टीकाकरण - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देशभर में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या तीन लाख को पार कर गई है। रोज आने वाले कोरोना मामलों की संख्या भले ही थोड़ी कम हुई हो लेकिन मौतें में कमी आती नहीं दिख रही है। ऐसे में एकमात्र कारगर हथियार टीकाकरण है, लेकिन देश में उसको भी लेकर दिक्कतें नजर आ रही हैं, केंद्र से राज्यों की शिकायत पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन को लेकर है।

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राजधानी दिल्ली का उदाहरण ले लीजिए, सीएम केजरीवाल ने 22 मई को ट्वीट कर कहा कि वैक्सीन खत्म होने के कारण वैक्सीनेशन सेंटर बंद करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार के मुताबिक मई महीने में दिल्ली को केवल 16 लाख वैक्सीन मिलीं। वहीं, जून के महीने में केंद्र सरकार दिल्ली को इसकी भी आधी यानी केवल 8 लाख वैक्सीन ही देगी।

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वैक्सीन कंपनियों का राज्यों को सप्लाई से इनकार
कोरोना का टीका बनाने वाली अमेरिकी कंपनियां फाइजर और मॉडर्ना सीधे केंद्र सरकार को अपना टीका देंगी। फाइजर ने सेामवार को कहा, देश में टीकाकरण अभियान का संचालन उनका अंदरूनी मामला है। हम इसमें राज्य सरकारों के साथ कोई लेनदेन नहीं करेंगे। फाइजर सीधे केंद्र सरकार को टीका देगी। वहीं तेलंगाना और पंजाब को मना करने के बाद मॉडर्ना ने दिल्ली को भी टीका देने से इनकार कर दिया।
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अब वैक्सीनेशन को जारी रखने के लिए दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों ने ग्लोबल टेंडर निकाल दिया। अखबारों में टेंडर छप भी गए लेकिन इस कवायद का भी कोई फायदा होते नहीं दिख रहा है।
 

इस बीच राज्यों के लिए विदेशी कंपनियों से झटके पर झटके लग रहे हैं। पंजाब की तरफ से कहा गया है कि कोविड-19 वैक्सीन की कमी की वजह से पिछले तीन दिनों से फेज 1 और फेज 2 का वैक्सीनेशन रोका गया है और अब वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने कोविड वैक्सीन की सप्लाई करने से इनकार कर दिया है। कंपनी का कहना है कि वो सिर्फ केंद्र सरकार से ही डील करेगी।

महाराष्ट्र, यूपी....ग्लोबल टेंडर की स्थिति क्या है?
महाराष्ट्र ने पांच करोड़ वैक्सीन डोज के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है, जिसकी आखिरी तारीख 26 मई है। राज्य की तरफ से स्पुतनिक को लिखे गए मेल का अब तक जवाब नहीं आया है। अब भी मॉडर्ना, फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियों से बातचीत करने की कोशिश की जा रही है। इस बीच बीएमसी को तीन आवेदन जरूर मिले हैं लेकिन किसी भी कंपनी ने वैक्सीन मैन्युफेक्चरर से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखाए हैं।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो चार करोड़ डोज के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले गए थे। ज्यादा से ज्यादा कंपनियां शामिल हो सकें इसलिए नियमों ढील दी गई, जैसे निविदा राशि को भी घटाकर 16 करोड़ से 8 करोड़ कर दिया गया। किस तापमान पर वैक्सीन स्टोर होनी चाहिए, इसमें भी ढील दी गई हैं। अब टेक्निकल बिड को 31 मई तक बढ़ा दिया गया है।


इसी तरह तमिलनाडु में 3.5 करोड़ वैक्सीन के लिए टेंडर जारी किया गया था। आवेदन की आखिरी तारीख 5 जून है, कर्नाटक में 24 मई है। 18-44 आयुवर्ग के लोगों के वैक्सीनेशन की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई दूसरे राज्य भी ग्लोबल टेंडर के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन अभी इसके नतीजों के बारे में पुख्ता तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता।
 

इस बीच वैक्सीनेशन कुछ जगहों पर रुकने और वैक्सीनेशन ड्राइव में देरी कोरोना संक्रमण को और भी घातक बना सकती है। उधर दूसरी लहर खत्म होने से पहले ही एक्सपर्ट तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं।
 

केंद्र और राज्यों को समन्वय बनाना चाहिए : एसबीआई ईकोरैप
वैक्सीन की कमी से जूझ रहे देश को एसबीआई ईकोरैप की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को वैक्सीन खरीद के लिए यूरोपीय संघ के मॉडल का पालन करना चाहिए। यूरोपीय संघ आयोग एक संयुक्त वार्ता दल के साथ संयुक्त रूप से वैक्सीन आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत करता है।


 

संयुक्त वार्ता दल के सदस्य
सात सदस्य राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए, एक संचालन समिति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। संचालन समिति हस्ताक्षर से पहले उन्नत खरीद समझौते (एपीए) अनुबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा करती है। इस समिति में सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। इसने आगे सुझाव दिया गया कि सरकार को सबसे अधिक प्रभावित जिलों के लोगों को पहले टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए, ताकि प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।

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