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Loan Moratorium: कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर लोन मोरेटोरियम की गुहार, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
Sat, 05 Feb 2022 10:38 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार संभव
Updated Sat, 05 Feb 2022 10:38 PM IST
सार
तिवारी ने अपने आवेदन में कहा है कि अभी तक कोई संरचित नीति निर्माण और दिशा-निर्देश विकसित नहीं किए गए हैं। कोविड महामारी की चल रही तीसरी लहर को देखते हुए आवेदक ने कहा है कि नीति निर्माण और दिशानिर्देशों की अनिच्छा ने भारत की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोरोना महामारी की तीसरी लहर के मद्देनजर लोन मोरेटोरियम के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने कोविड-19 की तीसरी लहर में वित्तीय तनाव से जूझ रहे कर्जदारों को राहत देने के लिए ऋण स्थगन (लोन मोरेटोरियम) जैसे उपायों को अपनाने की बात की है।वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और आरबीआई को इस पर विचार करने के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई है।
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वकील विशाल तिवारी द्वारा यह आवेदन अपनी पूर्व रिट याचिका में दायर किया गया है, जिसमें कोविड-19 के मद्देनजर ऋण स्थगन, एनपीए की घोषणा पर अस्थायी रोक के रूप में वित्तीय राहत मांगी गई थी। यह देखते हुए कि न्यायालय वित्तीय राहत के लिए निर्देश पारित नहीं कर सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने जून 2021 में उसकी रिट याचिका का निपटारा कर दिया था। कोर्ट ने स्थिति का आकलन करने और उचित निर्णय लेने का जिम्मा केंद्र सरकार और आरबीआई पर छोड़ दिया था।
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तिवारी ने अपने आवेदन में कहा है कि अभी तक कोई संरचित नीति निर्माण और दिशा-निर्देश विकसित नहीं किए गए हैं। कोविड महामारी की चल रही तीसरी लहर को देखते हुए आवेदक ने कहा है कि नीति निर्माण और दिशानिर्देशों की अनिच्छा ने भारत की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। लिहाजा भारत की अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रभाव का आकलन करने और आगे का रास्ता तय करने के लिए न्यायालय को हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।
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