केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में तेजी से बढ़ा कोरोना संक्रमण, नपेंगे दोषी अफसर
- एसएसबी में 13 और आईटीबीपी में भी 21 केस पॉजिटिव
- बीएसएफ में 42 जवानों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव
- सीआरपीएफ में करीब 150 जवानों की रिपोर्ट पॉजिटिव
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इसी तरह बीएसएफ मुख्यालय का भी एक हिस्सा बंद किया गया है। एसएसबी में 13 और आईटीबीपी में भी 21 केस पॉजिटिव मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय के निर्देश पर अब उस चूक का पता लगाया जा रहा है, जिसकी वजह से इन बलों में कोरोना फैला है।
चूक वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सीआरपीएफ में एक ऐसी ही रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे मंगलवार को डीजी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ में पिछले दस पंद्रह दिनों के दौरान कोरोना संक्रमण के केसों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। अब इस बल में डेढ़ सौ से अधिक पॉजिटिव केस हो गए हैं।
बीएसएफ में 42 जवानों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कोरोना के इतने ज्यादा मामले फोर्स में क्यों आ रहे हैं। इसके पीछे किससे चूक हुई है। सीआरपीएफ में ऐसे मामलों की जांच पूरी कर ली गई है।
इस रिपोर्ट पर डीजी की मौजूदगी में चर्चा की जाएगी। इसके लिए बल के एडीजी मेडिकल, नॉर्थ जोन के आईजी और डायरेक्टर मेडिकल को तलब किया गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि सीआरपीएफ में एक शिकायत ये भी मिली है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित जवानों का हालचाल जानने के लिए कोई बड़ा आईपीएस अधिकारी क्वारंटीन सेंटर में नहीं पहुंचा है।
किसी ने बटालियन में पहुंचकर ये जानने का प्रयास नहीं किया कि कोरोना के मामले आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़े हैं। बल के अनेक जवान मंडोली और नरेला क्वारंटीन सेंटर में भेजे गए हैं। सभी बलों में खासतौर पर जवानों में कई बातों को लेकर नाराजगी बताई जा रही है।
इसमें समय रहते कोई उपयुक्त कदम न उठाना भी शामिल है। कुछ जवानों के सवाल जवाब भी रिपोर्ट में शामिल हैं। बता दें कि कोकराझार के लोकसभा सांसद नाबा हीरा कुमार सरणिया ने इस बाबत केंद्र सरकार को शिकायत दी थी।
उन्होंने कहा था कि इन जवानों के मामले में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई है, क्या उनका इलाज ठीक तरह से हो रहा है, आदि बातों की जांच कराई जाए।