सोशल मीडिया पर लड़े जाएंगे कोरोना काल के चुनाव, बदल जाएगी राजनीतिक पैंतरेबाजी
- इसी साल के अंत में बिहार विधानसभा का महत्वपूर्ण चुनाव होने की उम्मीद
- सोशल मीडिया पर चुनावी आहट महसूस की जाने लगी है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार विधानसभा के चुनाव होने में लगभग छह महीने का समय शेष रह गया है, इसके बाद भी जमीन पर चुनावी हलचल कहीं नजर नहीं आ रही है। लेकिन सोशल मीडिया पर चुनावी आहट महसूस की जाने लगी है।
गुरुवार को भी बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने प्रदेश के प्रभारी भूपेंद्र यादव और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली।
ऐसी बैठकें लगातार चल रही हैं। कोरोना पीड़ितों की सहायता के साथ ही जनता से जुड़ने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। विपक्ष भी लगातार लोगों की मदद के लिए सक्रिय है और यह जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा कहते हैं कि कोरोना काल में वे चुनाव के बारे में सोच भी नहीं रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता कोरोना पीड़ितों, प्रवासी मजदूरों और गरीबों के रोजगार को सुनिश्चित करने की है। उनकी उम्मीद है कि विश्व के वैज्ञानिक जल्दी ही कोरोना का कोई उपाय अवश्य ढूंढ लेंगे।
लेकिन अगर कोरोना की समस्या लंबी खिंचती है, तो चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा, इस सवाल पर मनोज कुमार झा कहते हैं कि इस संकट के बीच उन्होंने पहली बार दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की ऑनलाइन क्लास लेनी शुरू की हैं। यह काफी सफल हो रही हैं।
अगर इसी माहौल में चुनाव होता है तो देश की जनता के लिए यह भी एक नया सबक होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में सोशल मीडिया ही सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनकर उभर सकता है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि हर परीक्षा में खरी उतरने वाली भारतीय जनता नए बदलावों को भी बेहतर ढंग से अपनाएगी।
भाजपा के सोशल मीडिया सेल के कार्यकर्ता पुनीत अग्रवाल कहते हैं कि सोशल मीडिया राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हों या प्रदेश स्तर के नेता, सभी लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें आयोजित कर रहे हैं। अगर इसी माहौल में चुनाव होता है तो यही माध्यम जनता से जुड़ने के काम आएंगे।
केंद्रीय नेताओं की पहुंच से कार्यकर्ताओं को दिख रही राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राहुल गांधी, जनता के मुद्दे उठाने के लिए सभी नेताओं ने सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। उनकी बातों ने जनता के बीच खूब असर दिखाया है और उन पर तीव्र प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। इससे कार्यकर्ता भी उत्साहित हैं।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना के कारण वे जमीन पर जाकर लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इसी बीच वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं से जुड़ पा रहे हैं।
वे उन्हें लगातार लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सोशल मीडिया राजनीति में ज्यादा बड़ी और अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
कीमतों में कमी
भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने कहा कि भारत में पंचायत चुनाव हो या लोकसभा का, इसमें भारी धन खर्च होता है, लेकिन सोशल मीडिया जैसे माध्यमों के बढ़ते चलन के कारण इसमें काफी गिरावट आएगी। चुनाव प्रचार में अन्य माध्यमों की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और सोशल मीडिया पर खर्च बढ़ेगा।
यह आवाज गुम न हो जाए
वहीं, बारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवायएम) के नेता रोहित सिंह कहते हैं कि पारंपरिक चुनावों में देश की सबसे गरीब जनता की आवाज भी सुनाई पड़ती थी। नेता लोगों से सीधा संपर्क करते थे, लेकिन कोरोना काल में यह संभव है कि इस वर्ग तक ज्यादा लोगों की पहुंच न हो पाए।
वे कहते हैं कि देश में आज भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत कम है, इसलिए सोशल मीडिया जनता की एकमात्र आवाज नहीं बन सकता। दूसरे, सोशल मीडिया में भारी मात्रा में भ्रामक जानकारी भी साझा कर दी जाती है।
अगर इसका असर बढ़ता है तो इससे लोगों में भ्रम फैलने की आशंका भी बहुत अधिक रहेगी। ऐसे माहौल में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।