बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में कोरोना की चिंगारी, भारतीय सीमा में घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ ने कसी कमर
भारत बांग्लादेश सीमा पर कई ऐसे इलाके हैं, जहां बड़ी नदियां और नाले हैं। ऐसी जगहों पर फेंसिंग नहीं है। साथ ही बॉर्डर पर 302 गांव ऐसे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा और फेंसिंग के बीच में हैं।
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वहां रहने वाले लोग अब किसी तरह से बाहर निकलने का मौका तलाश रहे हैं। ऐसी स्थिति में वे भारतीय सीमा का रूख कर सकते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग भी घुसपैठ के इंतजार में हैं।
इन्हीं सब बातों के मद्देनजर बीएसएफ ने सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। सीमा सुरक्षा बल का दावा है कि बांग्लादेश की तरफ से भारतीय सीमा में परिंदा भी पर नहीं मार सकता। 4096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ ने अपने तकनीकी उपकरणों एवं खुफिया तंत्र की मदद से अचूक सुरक्षा व्यवस्था की है।
बता दें कि बांग्लादेश में अभी तक कोरोना संक्रमण के 20 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें से 3882 लोगों की रिकवरी हो गई है, जबकि 298 लोगों की मौत हो चुकी है। कॉक्स बाजार के कैंप को दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी कैंप कहा जाता है।
यह बहुत तंग इलाका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना से बचने के लिए जो गाइडलाइन जारी की हैं, यहां पर उनका पालन होना बहुत मुश्किल है। अगर यहां कोरोना फैलता है तो बड़ी संख्या में लोग भारत की सीमा का रूख कर सकते हैं।
भारत बांग्लादेश सीमा पर कई ऐसे इलाके हैं, जहां बड़ी नदियां और नाले हैं। ऐसी जगहों पर फेंसिंग नहीं है। साथ ही बॉर्डर पर 302 गांव ऐसे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा और फेंसिंग के बीच में हैं। कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां पर अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा घरों और गलियों के बीच से गुजरती है।
यही इलाके घुसपैठ के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। बीएसएफ प्रवक्ता शुभेंदु भारद्वाज का कहना है कि हमारा बल 24 घंटे सीमा की चौकसी में लगा हुआ है। बल के पास पर्याप्त संसाधन हैं। हम यकीन के साथ कहते हैं कि बांग्लादेश की ओर से कोई भी व्यक्ति भारतीय सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता।
पिछले दिनों ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई थीं। बीएसएफ की कड़ी चौकसी की वजह से सीमा पर पहुंचे लोगों को तुरंत वापस कर दिया गया। उन्हें भारतीय सीमा में पांव तक नहीं रखने दिया। चेतावनी देकर उन्हें बीच में ही रोक दिया गया।
मामले की जानकारी 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' को दी गई। बिना किसी देरी के सभी लोग बीजीबी को सौंप दिए गए। शुभेंदु के अनुसार, सीमावर्ती गांवों के लोगों को भी कोरोना के प्रति सचेत किया जा रहा है।
तकनीकी उपकरणों की मदद से भी निगरानी की जा रही है। खासतौर पर वे गांव जो अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा और फेंसिंग के बीच में बसे हैं, वहां 24 घंटे नजर लगी रहती है। यह अलग बात है कि वहां रह रहे लोगों के लिए बीएसएफ ही सबसे बड़ी मददगार है।
मुसीबत के वक्त उन लोगों को राशन भी दिया जाता है। अब वहां चौकसी बढ़ा दी गई है। ये देखा जा रहा है कि सीमा पार से कोई व्यक्ति उन तक न पहुंचने पाए।