धर्मांतरण: इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने वालों को न दें आरक्षण का लाभ, विहिप का अभियान सोमवार से
विहिप ने इस मांग को लेकर विभिन्न दलों के 327 सांसदों से संपर्क किया है। इन सांसदों में भाजपा, कांग्रेस, जदयू, राजद, आप, तृणमूल, माकपा, नेशनल कांफ्रेंस शामिल हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में धर्मांतरण के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) सोमवार से 11 दिनी अभियान छेड़ रही है। इस दौरान गैर कानूनी धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने और इस्लाम व ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को आरक्षण व अन्य लाभ नहीं देने की मांग की जाएगी।
देशव्यापी अभियान शुरू करने के पूर्व शनिवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि इस मांग को लेकर विभिन्न दलों के 327 सांसदों से संपर्क किया है। इन सांसदों में भाजपा, कांग्रेस, जदयू, राजद, आप, तृणमूल, माकपा, नेशनल कॉन्फ्रेंस शामिल हैं। आलोक कुमार ने उन सांसदों के नाम नहीं बताए, जिनसे विहिप ने अपनी मांगों को लेकर संपर्क किया है। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले अभियान के दौरान हिंदू समाज को मजबूत करने वाले विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विहिप द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सांसदों के साथ संगठन की बैठक के दौरान चर्चा किए गए मुद्दों में से एक प्रलोभन या धोखे के माध्यम से धर्म परिवर्तन था। इस पर विहिप ने केंद्र और राज्य सरकार से कुप्रथा के खिलाफ कड़े कानून बनाने की मांग की। विहिप ने यह भी कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं के उत्पीड़न पर ध्यान दिया जाए।
घर वापसी के भी प्रयास होंगे
विहिप नेता ने कहा कि अभियान के दौरान इस बात के भी प्रयास किए जाएंगे कि जो लोग धर्म बदल चुके हैं, उन्हें वापस हिंदू धर्म में शामिल कराया जाए। इस दौरान पर्चों व सामग्री, जनसभाओं, समूह बैठकों के जरिए जनजागृति के प्रयास किए जाएंगे। बैठकों व सभाओं में हिंदू समाज को यह बताया जाएगा कि धर्मांतरण में जुटे लोग किस तरह से हिंदू विरोधी व राष्ट्र विरोधी साजिशें रच रहे हैं। समाज को इसे रोकने के लिए जागृत किया जाएगा।
कुमार ने दावा किया कि लोग अंतरात्मा की वजह से अन्य धर्मों में शामिल नहीं हो रहे हैं बल्कि उन्हें लालच, भय या धोखे के माध्यम से धर्मांतरित किया जा रहा है। प्रलोभन, भय या धोखे से कोई भी धर्म परिवर्तन संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है और किसी व्यक्ति की गरिमा के भी खिलाफ है। राज्यों और केंद्र द्वारा इस तरह के धर्मांतरण के खिलाफ एक सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।
धर्मांतरण के बाद अजा को नहीं मिलता लाभ
आलोक कुमार ने आदिवासियों के धर्मांतरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए कि दूसरे धर्म में परिवर्तित होने वाले आदिवासियों को आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ न मिले। अनुसूचित जाति के सदस्यों को दूसरे में धर्मांतरण के बाद आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। ऐसे में अनुसूचित जनजातियों के लोगों के मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए।
यूपी व एमपी में बनाया गया कानून, धर्मांतरण में आई कमी
विहिप नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गैरकानूनी धर्मांतरण और लव जिहाद के मामलों में कमी आई है, क्योंकि दोनों राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया और कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।