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15 अगस्त से शुरू होगा 'शुद्ध ब्राह्मण लंच बॉक्स', बवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:12 PM IST
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स्वतंत्रता दिवस आने में अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। इस मौके पर बंगलूरू की एक केटरिंग कंपनी ने अपनी नई सेवा का प्रचार करना शुरू कर दिया है। कंपनी 15 अगस्त से शुद्ध ब्राह्मण लंच बॉक्स सेवा शुरू करने वाली है। मंगलवार को वकील और सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर बी कार्तिक नवयान ने ट्विटर पर शुद्ध ब्राह्मण लंच बॉक्स सेवा के बैनर की एक फोटो शेयर की।
इस विज्ञापन में ब्राह्मण लंच बॉक्स कंपनी ने घोषणा की है कि वह जेपी नगर, बीटीएम लेआउट, पुत्तनहल्ली, बिलेकहल्ली और आस-पास के इलाकों सहित बंगलूरू के कई क्षेत्रों तक ग्राहकों के दरवाजे तक शुद्ध ब्राह्मण भोज पहुंचाएगी। मेन्यू में शाकाहारी भोजन की कीमत 40, 45 और 60 रुपए बताई गई है। इस समय बाजार में ऐसी ही कई सेवाएं मौजूद हैं।
अक्षय एस होममेड फूड डिलिवरी सर्विसेज भी चेन्नई में काफी मशहूर है जो ब्राह्णण भोज परोसता है। यहां तक कि बहुत से निवासियों ने इस तरह की सर्विसेज को विदेशों में भी लॉन्च किया है। जिसमें कैलिफोर्निया बेस्ड मायलापोर एक्सप्रेस शामिल है जो बे क्षेत्र में शुद्ध ताम ब्रह्म भोजन मुहैया करवाती है। इस तरह की सेवाएं स्विगी और जोमैटो जैसी एप्स पर भी मौजूद हैं।
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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस सर्विस के लॉन्च होने पर समर्थन किया। उनका दावा है कि जब जैन और हलाला खाना हो सकता है तो ब्राह्मण खाने में क्या बुराई है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह विज्ञापन जातीयता को बढ़ावा देता है। तुलिका नाम की यूजर ने लिखा- 'पहियों पर जातिवाद।' विनय मौज नाम के यूजर ने लिखा, 'जैन, हलाला और मुगलई खाना समझ में आता है। लेकिन तामब्रम नहीं क्या वह यह कहना चाहते हैं कि केवल तामब्रम इसे खा सकते हैं? इस बेवकूफी को बंद करो।'
राधिका ने कहा, 'इसने मुझे बहुत परेशान किया। मैं दूसरे तट पर रहती हूं और प्रार्थना करती हूं कि यह यहां ना हो।' द व्हाइट वाल्कर ने लिखा, 'सर फिर तो सब्जी वाला किसान भी ब्राह्मण होना चाहिए। पार्सल बॉक्स बनाने वाला भी ब्राह्मण और डिलिवरी ब्वॉय भी ब्राह्मण ही होना चाहिए।' सूर्या ने कहा, 'जातिवाद हर जगह है। हर किसी ने अपने तरीके से शोषण किया या फायदा उठाया।'
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इस विज्ञापन में ब्राह्मण लंच बॉक्स कंपनी ने घोषणा की है कि वह जेपी नगर, बीटीएम लेआउट, पुत्तनहल्ली, बिलेकहल्ली और आस-पास के इलाकों सहित बंगलूरू के कई क्षेत्रों तक ग्राहकों के दरवाजे तक शुद्ध ब्राह्मण भोज पहुंचाएगी। मेन्यू में शाकाहारी भोजन की कीमत 40, 45 और 60 रुपए बताई गई है। इस समय बाजार में ऐसी ही कई सेवाएं मौजूद हैं।
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अक्षय एस होममेड फूड डिलिवरी सर्विसेज भी चेन्नई में काफी मशहूर है जो ब्राह्णण भोज परोसता है। यहां तक कि बहुत से निवासियों ने इस तरह की सर्विसेज को विदेशों में भी लॉन्च किया है। जिसमें कैलिफोर्निया बेस्ड मायलापोर एक्सप्रेस शामिल है जो बे क्षेत्र में शुद्ध ताम ब्रह्म भोजन मुहैया करवाती है। इस तरह की सेवाएं स्विगी और जोमैटो जैसी एप्स पर भी मौजूद हैं।
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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस सर्विस के लॉन्च होने पर समर्थन किया। उनका दावा है कि जब जैन और हलाला खाना हो सकता है तो ब्राह्मण खाने में क्या बुराई है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह विज्ञापन जातीयता को बढ़ावा देता है। तुलिका नाम की यूजर ने लिखा- 'पहियों पर जातिवाद।' विनय मौज नाम के यूजर ने लिखा, 'जैन, हलाला और मुगलई खाना समझ में आता है। लेकिन तामब्रम नहीं क्या वह यह कहना चाहते हैं कि केवल तामब्रम इसे खा सकते हैं? इस बेवकूफी को बंद करो।'
राधिका ने कहा, 'इसने मुझे बहुत परेशान किया। मैं दूसरे तट पर रहती हूं और प्रार्थना करती हूं कि यह यहां ना हो।' द व्हाइट वाल्कर ने लिखा, 'सर फिर तो सब्जी वाला किसान भी ब्राह्मण होना चाहिए। पार्सल बॉक्स बनाने वाला भी ब्राह्मण और डिलिवरी ब्वॉय भी ब्राह्मण ही होना चाहिए।' सूर्या ने कहा, 'जातिवाद हर जगह है। हर किसी ने अपने तरीके से शोषण किया या फायदा उठाया।'
Yes yes. Agreed. There is no caste in India 😎 pic.twitter.com/EREUhZkv7q
— Dr. B. Karthik Navayan (@Navayan) August 7, 2018
This bothered me so much! I live on the other coast and am praying this doesn’t happen here.
— Radhika (@rads) August 8, 2018
Sir fir to vegetables Wala farmer bhi Brahmin hona chahiye.....parcel box banane Wala bhi Brahmin aur delivery boy bhi Brahmin hi hona chahiye!!!!!
— TheWhiteWalker (@Tauseef12356591) August 8, 2018