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सूरत में पीएम मोदी के नाम पर मछली बाजार: बिना मंजूरी लगा बोर्ड, कारोबारियों ने जताई आपत्ति; क्यों हुआ विवाद?
Tue, 25 Aug 2026 12:11 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, सूरत (गुजरात)।
पीटीआई, सूरत (गुजरात)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 25 Aug 2026 12:11 AM IST
सार
सूरत में नए मछली बाजार के नाम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। पीएम नरेंद्र मोदी के नाम वाला बोर्ड लगाए जाने पर कुछ कारोबारियों ने सवाल उठाए, जबकि एसोसिएशन ने इसे सही बताया। इसके लिए नगर निगम की मंजूरी अभी बाकी है। आखिर पूरा मामला क्या है? रिपोर्ट में जानिए।
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पीएम मोदी के नाम वाला बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/@PKathavadia
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विस्तार
गुजरात के सूरत में नए मछली बाजार का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखे जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कुछ मछली कारोबारियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। वहीं, स्थानीय नगर निगम ने साफ किया है कि आधिकारिक तौर पर बाजार का नाम रखने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
क्यों लगा पीएम मोदी के नाम का बोर्ड?
सूरत शहर के नानपुरा इलाके में लक्कड़कोट में एक नया मछली बाजार बनाया गया है। इसे सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने बनाया है। बाजार के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है- श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाजार। बोर्ड के एक कोने में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी है। इस बोर्ड के लगने के बाद कुछ मछली कारोबारियों ने इसका विरोध किया।
पीएम के नाम पर क्यों जताई आपत्ति?
मछली कारोबारी सुरेंद्र लश्करी ने बाजार के नाम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। इसलिए उनका नाम मछली बाजार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लश्करी ने कहा, नरेंद्र मोदी ने अपनी जिंदगी में कभी समुद्री भोजन (सी फूड) नहीं खाया है। वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। इसलिए यह बोर्ड नहीं लगाया जाना चाहिए।
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एसएफएमए ने नाम का समर्थन क्यों किया?
हालांकि, सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन (एसएफएमए) के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने अपने स्तर पर एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें बाजार का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की बात कही गई थी। बोर्ड पर मछली कारोबारियों की एसोसिएशन का नाम भी लिखा है।
बाजार के लिए केंद्र ने कितने रुपये दिए?
नवसारीवाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने बाजार बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने मछुआरों के कल्याण के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई कई योजनाओं और कामों का भी जिक्र किया।
नवसारीवाला ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने यह योजना शुरू की थी। इसके तहत एसएमसी को इस बाजार को बनाने के लिए 3 करोड़ रुपये मिले। इससे पहले किसी ने हमारे लिए कुछ नहीं किया। अब बाजार बन गया है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है। फिर भी कुछ लोगों को इससे परेशानी हो रही है।
एसएमसी ने इस विवाद पर क्या कहा?
हालांकि, एसएमसी के मध्य क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता आरडी गंजावाला ने अलग जानकारी दी। उन्होंने साफ किया कि नगर निगम ने अभी बाजार के नाम को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है।
उन्होंने बताया कि सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन ने एसएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष और मध्य क्षेत्र के अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया था। इसमें बाजार का नाम प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर रखने की मांग की गई थी।
गंजावाला ने कहा, बोर्ड बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव के लगाया गया था। हमने उन्हें इसकी जानकारी दे दी है। उन्होंने मौखिक रूप से भरोसा दिया है कि वे खुद बोर्ड हटा देंगे। उन्होंने बताया कि बाजार का नाम रखने के प्रस्ताव पर जरूरी प्रक्रिया अभी चल रही है।
गंजावाला ने यह भी पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने मत्स्य संपदा योजना के तहत इस परियोजना के लिए 3 करोड़ रुपये की मदद दी है। बाकी रकम सूरत नगर निगम ने खर्च की है। नगर निगम के अधिकारी के अनुसार, इस मछली बाजार में थोक बिक्री के लिए 80 बड़े स्टॉल हैं। इसे बनाने में कुल करीब 9 करोड़ से 10 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
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क्यों लगा पीएम मोदी के नाम का बोर्ड?
सूरत शहर के नानपुरा इलाके में लक्कड़कोट में एक नया मछली बाजार बनाया गया है। इसे सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने बनाया है। बाजार के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है- श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाजार। बोर्ड के एक कोने में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी है। इस बोर्ड के लगने के बाद कुछ मछली कारोबारियों ने इसका विरोध किया।
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पीएम के नाम पर क्यों जताई आपत्ति?
मछली कारोबारी सुरेंद्र लश्करी ने बाजार के नाम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। इसलिए उनका नाम मछली बाजार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लश्करी ने कहा, नरेंद्र मोदी ने अपनी जिंदगी में कभी समुद्री भोजन (सी फूड) नहीं खाया है। वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। इसलिए यह बोर्ड नहीं लगाया जाना चाहिए।
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एसएफएमए ने नाम का समर्थन क्यों किया?
हालांकि, सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन (एसएफएमए) के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने अपने स्तर पर एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें बाजार का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की बात कही गई थी। बोर्ड पर मछली कारोबारियों की एसोसिएशन का नाम भी लिखा है।
बाजार के लिए केंद्र ने कितने रुपये दिए?
नवसारीवाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने बाजार बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने मछुआरों के कल्याण के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई कई योजनाओं और कामों का भी जिक्र किया।
नवसारीवाला ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने यह योजना शुरू की थी। इसके तहत एसएमसी को इस बाजार को बनाने के लिए 3 करोड़ रुपये मिले। इससे पहले किसी ने हमारे लिए कुछ नहीं किया। अब बाजार बन गया है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है। फिर भी कुछ लोगों को इससे परेशानी हो रही है।
एसएमसी ने इस विवाद पर क्या कहा?
हालांकि, एसएमसी के मध्य क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता आरडी गंजावाला ने अलग जानकारी दी। उन्होंने साफ किया कि नगर निगम ने अभी बाजार के नाम को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है।
उन्होंने बताया कि सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन ने एसएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष और मध्य क्षेत्र के अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया था। इसमें बाजार का नाम प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर रखने की मांग की गई थी।
गंजावाला ने कहा, बोर्ड बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव के लगाया गया था। हमने उन्हें इसकी जानकारी दे दी है। उन्होंने मौखिक रूप से भरोसा दिया है कि वे खुद बोर्ड हटा देंगे। उन्होंने बताया कि बाजार का नाम रखने के प्रस्ताव पर जरूरी प्रक्रिया अभी चल रही है।
गंजावाला ने यह भी पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने मत्स्य संपदा योजना के तहत इस परियोजना के लिए 3 करोड़ रुपये की मदद दी है। बाकी रकम सूरत नगर निगम ने खर्च की है। नगर निगम के अधिकारी के अनुसार, इस मछली बाजार में थोक बिक्री के लिए 80 बड़े स्टॉल हैं। इसे बनाने में कुल करीब 9 करोड़ से 10 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।