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संविधान दिवस : राष्ट्रपति कोविंद ने जताई चिंता, न तारीख पर तारीख ठीक न संसद में व्यवधान

Tue, 27 Nov 2018 05:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 27 Nov 2018 05:21 AM IST
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Constitution Day: President said date extending in court is wrong as interruption in parliament
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को संविधान दिवस के मौके पर संसद की कार्यवाही में गतिरोध और कोर्ट में मामलों की सुनवाई टलने पर चिंता जताई। राष्ट्रपति ने कहा, ‘संविधान हमारे लिए जीवंत और प्रेरणादायक दस्तावेज है। संसदीय कार्यवाही में व्यवधान सही नहीं है। इसी प्रकार कोर्ट की ओर से तारीख पर तारीख मिलना भी ठीक नहीं है। न्यायपालिका में सुनवाई स्थगित नहीं होनी चाहिए और जल्दी न्याय मिलना चाहिए।’

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राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अवसर की समानता 1949 में जरूरी थी और आज भी है। संसद में काम होना भी जरूरी है। यह हम लोगों का सांविधानिक दायित्व है। उन्होंने न्यायपालिका में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को स्थान देने की मुहिम पर जोर देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रयासों से फैसले की प्रति हिंदी में भी उपलब्ध हो रही है। न्यायालय की कार्यवाही से आम लोगों को जोड़ने के लिए स्थानीय भाषा में इसकी प्रति उपलब्ध करानी चाहिए।
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राजनीतिक न्याय के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्र चुनाव कराने और वयस्कों को वोटिंग का अधिकार देना ही राजनीतिक न्याय नहीं है। चुनाव के दौरान दलों और प्रत्याशियों के खर्च में पारदर्शिता भी इसमें शामिल है। सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। 

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संविधान से नहीं चले, तो अराजकता फैलेगी : गोगोई

Constitution Day: President said date extending in court is wrong as interruption in parliament
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमारा संविधान हाशिए पर खड़े लोगों के साथ बुद्धिजीवियों की आवाज है। संविधान ने संकट के क्षणों में हमारा मार्गदर्शन किया है। इसमें दर्ज की गई हर सलाह देश हित में है। अगर हम संविधान के मुताबिक नहीं चले तो अराजकता बढ़ेगी। जब संविधान लागू किया गया था उस वक्त व्यापक पैमाने पर इसकी आलोचना हुई थी, लेकिन समय ने आलोचनाओं को कमजोर किया। गर्व की बात है कि कई दशक से इसका जिक्र बेहद जोश के साथ किया जा रहा है। 

न्यायपालिका समेत सभी अंग ‘लक्ष्मण रेखा’ का करें पालन : रविशंकर प्रसाद

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रवि शंकर प्रसाद (फाइल फोटो)

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका को यह फैसला करना चाहिए कि वह शासन के मुद्दों पर अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए कहां तक जा सकती है। साथ ही उन्होंने सभी अंगों को अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ का पालन करने पर जोर दिया। प्रसाद ने यह बात संविधान दिवस के कार्यक्रम में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की मौजूदगी में कही। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जज भी मौजूद थे। 

कानून मंत्री ने कहा कि शासन को बहुत अधिक जटिल काम बनाया जा रहा है, ऐसे में आवश्यकता है कि यह पता चले कि आखिर न्यायपालिका कहां तक जा सकती है। यह न्यायपालिका को तय करना है। उन्होंने कहा कि जब एक सरकार संचालित होती है तो बहुत सारे प्रतिस्पर्धी हित होते हैं, बहुत सारे जटिल दावे होते हैं और बहुत से अन्य निहित हित हैं, जिन्हें समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वह पूरे सम्मान के साथ काम करने के जुनून को समझते हैं लेकिन यह जुनून ऐसा नहीं होना चाहिए जो दूसरों के अधिकार क्षेत्र में दखल दे। वह अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विकास सिंह के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच अलग शक्तियों का मुद्दा उठाया था। 

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