{"_id":"68a5c1952cc6dbcc860518a5","slug":"constitution-amendment-bill-amit-shah-targeted-the-protesting-opposition-2025-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"130वां संविधान संशोधन विधेयक: शाह बोले- जनता तय करे, पीएम...सीएम या मंत्री को जेल से सरकार चलानी चाहिए या नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
130वां संविधान संशोधन विधेयक: शाह बोले- जनता तय करे, पीएम...सीएम या मंत्री को जेल से सरकार चलानी चाहिए या नहीं
Wed, 20 Aug 2025 06:07 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 20 Aug 2025 06:07 PM IST
सार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए, जिनका उद्देश्य आपराधिक मामलों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिनों के भीतर पद से हटाना है। विपक्ष ने इन विधेयकों का विरोध किया है। इन विधेयकों को जेपीसी को भेजा गया है। शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार नेताओं को कानून के दायरे में लाने की पहल कर रही है, जबकि कांग्रेस ने अतीत में प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखने की कोशिश की थी।
विज्ञापन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री की आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से जुड़े तीन विधेयक पेश किए। विपक्ष ने इन विधेयकों का जमकर विरोध किया। तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया है। इसी बीच, गृह मंत्री ने इन विधेयकों को लेकर विपक्ष के विरोध पर पलटवार किया है।
कांग्रेस पर शाह ने साधा निशाना
अमित शाह ने एक्स पर लिखा, एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आप को कानून के दायरे में लाने का संविधान संशोधन पेश किया है और दूसरी ओर कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकारें चलाने और कुर्सी का मोह न छोड़ने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया है। देश को वह समय भी याद है, जब इसी महान सदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान संशोधन संख्या-39 से प्रधानमंत्री को ऐसा विशेषाधिकार दिया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती थी।
ये भी पढ़ें: लोकसभा में सरकार ने पेश किए तीन विधेयक, विपक्ष का जोरदार हंगामा; जेपीसी को भेजे जाएंगे बिल
विज्ञापन
उन्होंने लिखा कि एक तरफ कांग्रेस की कार्य संस्कृति और नीति यह रही है कि वह संविधान संशोधन करके प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखती है। जबकि, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की नीति है कि हम हमारी सरकार के प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों को ही कानून के दायरे में ला रहे हैं।
अमित शाह ने बताया क्यों सरकार लाई ये विधेयक
अमित शाह ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देखकर आज मैंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष की सहमति से संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिससे महत्त्वपूर्ण सांविधानिक पद, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएं। इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है । इन तीनों विधेयकों से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वह यह है कि:
(1) कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है।
(2) संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएंगे, जो अरेस्ट होने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे। विगत कुछ वर्षों में, देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे।
ये भी पढ़ें: क्या हैं वो विधेयक, जिनसे गंभीर अपराध में फंसे पीएम-सीएम को हटाया जा सकेगा, विपक्ष क्यों विरोध में?
(3) इस बिल में आरोपित राजनेता को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर अदालत से जमानत लेने का प्रावधान भी दिया गया है। अगर वे 30 दिन में जमानत प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो 31वें दिन या तो केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्यमंत्री उन्हें पदों से हटाएंगे, अन्यथा वे स्वयं ही कानूनी रूप से कार्य करने के लिए अयोग्य हो जाएँगे। क़ानूनी प्रक्रिया के बाद ऐसे नेता को यदि जमानत मिलेगी, तब वे अपने पद पर पुनः आसीन हो सकते हैं। अब देश की जनता को यह तय करना पड़ेगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा सरकार चलाना उचित है?
क्या है तीन विधेयक
लोकसभा में पेश विधेयक हैं-संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को ऐसे अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है, तो वे 31वें दिन अपना पद खो देंगे। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में संशोधन का प्रावधान किया गया है। केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम 1963 में गंभीर आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए केंद्र शासित प्रदेश सरकार संशोधन विधेयक में इस अधिनियम की धारा 45 में संशोधन कर इस आशय का प्रावधान किया गया है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक में ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री, मंत्री को हटाने के लिए इस अधिनियम की धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव है।
विज्ञापन
कांग्रेस पर शाह ने साधा निशाना
अमित शाह ने एक्स पर लिखा, एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आप को कानून के दायरे में लाने का संविधान संशोधन पेश किया है और दूसरी ओर कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकारें चलाने और कुर्सी का मोह न छोड़ने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया है। देश को वह समय भी याद है, जब इसी महान सदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान संशोधन संख्या-39 से प्रधानमंत्री को ऐसा विशेषाधिकार दिया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती थी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: लोकसभा में सरकार ने पेश किए तीन विधेयक, विपक्ष का जोरदार हंगामा; जेपीसी को भेजे जाएंगे बिल
विज्ञापन
उन्होंने लिखा कि एक तरफ कांग्रेस की कार्य संस्कृति और नीति यह रही है कि वह संविधान संशोधन करके प्रधानमंत्री को कानून से ऊपर रखती है। जबकि, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की नीति है कि हम हमारी सरकार के प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों को ही कानून के दायरे में ला रहे हैं।
अमित शाह ने बताया क्यों सरकार लाई ये विधेयक
अमित शाह ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देखकर आज मैंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष की सहमति से संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिससे महत्त्वपूर्ण सांविधानिक पद, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएं। इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है । इन तीनों विधेयकों से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वह यह है कि:
(1) कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है।
(2) संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएंगे, जो अरेस्ट होने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे। विगत कुछ वर्षों में, देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे।
ये भी पढ़ें: क्या हैं वो विधेयक, जिनसे गंभीर अपराध में फंसे पीएम-सीएम को हटाया जा सकेगा, विपक्ष क्यों विरोध में?
(3) इस बिल में आरोपित राजनेता को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर अदालत से जमानत लेने का प्रावधान भी दिया गया है। अगर वे 30 दिन में जमानत प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो 31वें दिन या तो केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्यमंत्री उन्हें पदों से हटाएंगे, अन्यथा वे स्वयं ही कानूनी रूप से कार्य करने के लिए अयोग्य हो जाएँगे। क़ानूनी प्रक्रिया के बाद ऐसे नेता को यदि जमानत मिलेगी, तब वे अपने पद पर पुनः आसीन हो सकते हैं। अब देश की जनता को यह तय करना पड़ेगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा सरकार चलाना उचित है?
क्या है तीन विधेयक
लोकसभा में पेश विधेयक हैं-संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को ऐसे अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है, तो वे 31वें दिन अपना पद खो देंगे। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में संशोधन का प्रावधान किया गया है। केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम 1963 में गंभीर आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए केंद्र शासित प्रदेश सरकार संशोधन विधेयक में इस अधिनियम की धारा 45 में संशोधन कर इस आशय का प्रावधान किया गया है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक में ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री, मंत्री को हटाने के लिए इस अधिनियम की धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन