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‘मुझे चुप कराने की साजिश’: जेएनयू से बर्खास्तगी पर बोले कांग्रेस सांसद अकोइजाम, भाजपा पर लगाया बदले का आरोप
Tue, 13 Oct 2026 12:07 PM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:07 PM IST
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अंगोमचा बिमोल अकोइजाम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद नौकरी से हटाए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पूरी कार्रवाई को ‘विच हंट’ यानी चुन-चुनकर निशाना बनाने की मुहिम बताया और आरोप लगाया कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के मुद्दों पर उनकी बेबाक आवाज दबाने के लिए राजनीतिक बदले की भावना से यह कदम उठाया गया है। अकोइजाम ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। उन्होंने साफ किया कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।
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‘जांच बंद होने के एक घंटे में रिपोर्ट तैयार, फिर बर्खास्तगी’
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अकोइजाम ने दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और तय प्रक्रिया की अनदेखी की। उनके मुताबिक, 12 बजकर 40 मिनट पर उन्हें ईमेल मिला कि जांच बंद कर दी गई है। इसके एक घंटे के भीतर रिपोर्ट तैयार करके कुलपति को सौंप दी गई, लेकिन उन्हें रिपोर्ट की प्रति नहीं दी गई। इसके कुछ ही समय बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी हो गया और दोपहर ढाई बजे तक मामला मीडिया में लीक हो गया। अकोइजाम ने कुलपति के कथित बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने खुद रिपोर्ट पढ़ी तक नहीं थी, तो बर्खास्तगी का आदेश इतनी जल्दी कैसे जारी कर दिया गया? उनका कहना है कि शुरुआत से ही पूरी प्रक्रिया में गंभीर खामियां रही हैं।
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‘शैक्षणिक मामले को यौन उत्पीड़न का केस कैसे बनाया?’
यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए अकोइजाम ने कहा कि मूल शिकायत अकादमिक और पढ़ाने के तरीके से जुड़े मामलों को लेकर विभाग में दी गई थी। उनका सवाल है कि यह मामला अचानक यौन उत्पीड़न और महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून (पॉश एक्ट) के तहत कैसे पहुंच गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मीडिया में सामने आए ‘अंकों के बदले यौन संबंध’ जैसे आरोप मूल शिकायत में थे ही नहीं। अकोइजाम ने शिकायत से जुड़े 97 छात्रों और 15 हस्ताक्षरकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि हस्ताक्षर करने वालों में तीन लड़के भी शामिल हैं। उन्होंने इसी आधार पर शिकायत की प्रकृति और पॉश कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। हालांकि, ये सभी अकोइजाम के अपने दावे हैं।
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‘300 ईमेल नहीं, मुझे सिर्फ 43-44 ईमेल मिले’
जांच में सहयोग नहीं करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के आरोपों को भी अकोइजाम ने गलत बताया। उनका कहना है कि कुलपति की ओर से मीडिया में 300 ईमेल भेजे जाने की बात कही जा रही है, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें सिर्फ 43 या 44 ईमेल मिलने की बात सामने आएगी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 31 मई को लिखित जवाब दिया था और 16 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अपना बयान दर्ज कराया था। इसके अलावा, उनके मुताबिक, 14 अगस्त को उनके आठ गवाह भी जांच पैनल के सामने पेश हुए थे। अकोइजाम ने कहा कि अदालत में सभी रिकॉर्ड रखे जाएंगे और इससे साफ हो जाएगा कि जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप कितना सही है।
'पूर्वोत्तर की आवाज दबाना चाहती है सरकार'
अकोइजाम ने इस पूरी कार्रवाई को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर के उन नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो सरकार से सवाल पूछते हैं और अपने क्षेत्र के मुद्दे खुलकर उठाते हैं। भाजपा चाहती है कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के लोग चुप रहें और सत्ता के सामने झुककर रहें, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। अकोइजाम ने कहा, 'मैं चुप रहने वालों में से नहीं हूं। वे मुझे खामोश करने में कामयाब नहीं होंगे। मणिपुर और पूर्वोत्तर से हजारों बिमोल उठ खड़े होंगे।” उन्होंने दोहराया कि वह इस लड़ाई को अदालत तक ले जाएंगे और कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखेंगे।
9 अक्तूबर को किया गया था बर्खास्त
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का आदेश जारी किया था। विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, आंतरिक समिति ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। अकोइजाम विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में कार्यरत थे। उन पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
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पुलिस ने दर्ज की है एफआईआर
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। 11 अक्तूबर 2026 को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है। वहीं, अकोइजाम ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और अदालत में होने वाली सुनवाई अहम होगी।