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Kisan: किसान सम्मान यात्रा निकालेगी कांग्रेस, किसानों की समस्याओं को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी

Tue, 10 Dec 2024 05:58 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 10 Dec 2024 05:58 PM IST
सार

Kisan Samman Yatra: लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर आगामी तीन जनवरी को एक बड़ी बैठक कर इस यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में पार्टी के प्रदेश स्तर के प्रमुख नेता और केंद्रीय इकाई से कुछ नेता भाग ले सकते हैं। इस बैठक में यात्रा के स्वरूप, रूट और प्रमुख मुद्दों की पहचान की जाएगी।

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Congress will take out Kisan Samman Yatra, preparations to raise problems of farmers on a large scale
कांग्रेस - फोटो : एएनआई

विस्तार

यूपी में कांग्रेस को दुबारा खड़ी करने के लिए पार्टी बड़ा अभियान चलाने जा रही है। पार्टी मध्य जनवरी में उत्तर प्रदेश किसान सम्मान एवं न्याय पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रही है। इस यात्रा में पूरे प्रदेश के हर जिले में पहुंचकर पार्टी किसानों के मुद्दे उठाएगी और उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। इसे पार्टी की 2027 यूपी विधानसभा की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।   
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लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर आगामी तीन जनवरी को एक बड़ी बैठक कर इस यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में पार्टी के प्रदेश स्तर के प्रमुख नेता और केंद्रीय इकाई से कुछ नेता भाग ले सकते हैं। इस बैठक में यात्रा के स्वरूप, रूट और प्रमुख मुद्दों की पहचान की जाएगी। इसके बाद इसे व्यापक रूप से जनता के बीच पहुंचाने का काम किया जाएगा। 
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कांग्रेस पार्टी किसानों के मुद्दे पर मुखर रही है। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा में भी किसानों के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था। किसान आंदोलन के दौरान भी उन्होंने किसानों को अपना पूरा समर्थन दिया था। कांग्रेस को जिस तरह हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में चुनावी लाभ मिला था, कांग्रेस के रणनीतिकार मानते हैं कि यह कांग्रेस की इसी नीति का परिणाम था। 
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अब कांग्रेस के लिए 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण होने जा रहा है। पार्टी के लिए यह चुनाव जीवन-मरण के प्रश्न की तरह होगा। ऐसे में यदि किसानों-मजदूरों के बीच वह अपनी पकड़ मजबूत बनाने में सफल रहती है तो 2027 में उसकी भूमिका मजबूत हो सकती है। कांग्रेस नेता इसी रणनीति पर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पार्टी सबसे निचले स्तर से अपने को मजबूत कर ऊपर उठने की कोशिश करने जा रही है।

'किसानों के साथ अत्याचार कर रही सरकार' 
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि इस समय पूरे देश में किसानों की स्थिति सबसे खराब है। उनकी फसलों की कीमत तक उन्हें नहीं मिल रही है। और सबसे दुखद बात यह है कि यदि किसान अपनी बात कहने के लिए दिल्ली तक आना चाहते हैं तो उन्हें आने तक नहीं दिया जा रहा है। उन पर गोली और आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। 

अखिलेश शुक्ला ने कहा कि भारत जैसे देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य औऱ कुछ नहीं हो सकता कि जो देश किसानों और मजदूरों के कारण जाना जाता हो, जिनके बल पर देश की 140 करोड़ की जनता अपना भूख मिटाती हो, उस देश में उसी किसान-मजदूर की बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस अन्याय को दूर करने के लिए और किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस इस यात्रा को निकालने जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी किसानों के अधिकारों की हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। 

'किसान ही कांग्रेस की पहचान' 
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के नेशनल कोऑर्डिनेटर और प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने अमर उजाला से कहा कि किसान और मजदूर ही कांग्रेस पार्टी की पहचान रहे हैं। कभी गाय-बछड़ा ही कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह हुआ करता था। यह बताता है कि कांग्रेस के लिए किसान कितना महत्त्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा ही किसानों की बात उठाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान दौर में उन बातों को और अधिक मजबूती से उठाने की आवश्यकता है क्योंकि केंद्र और यूपी सरकार किसानों की कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।     


प्रबल प्रताप शाही ने कहा कि किसान दिल्ली आना चाहते थे, लेकिन यूपी सरकार ने उन्हें दिल्ली और नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बॉर्डर पर ही रोक दिया। उन्हें बात करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अचानक ही रातों रात उन पर हमला कर उन्हें वहां से जबरदस्ती हटा दिया गया। यह बताता है कि सरकार किसानों के प्रति कितनी असंवेदनशील है। वह उनकी बात सुनने और उनके मुद्दों का समाधान करने की बजाय उन पर गोली और डंडे चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह बात कभी स्वीकार नहीं करेगी। अब किसानों को जागरूक करने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है। इसके बाद आगे की रणनीति बनाकर किसानों के मुद्दे को एक संघर्ष के रूप में तब्दील किया जाएगा और किसानों को उनका अधिकार दिलाने की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ी जाएगी।


 
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