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चेहरा घोषित करके राजस्थान और अन्य राज्यों में उतरने से परहेज करेगी कांग्रेस
शशिधर पाठक, उमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Feb 2018 12:52 AM IST
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कांग्रेस पार्टी जहां उसकी सरकार नहीं है, उन राज्यों में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव के दौरान चेहरा घोषित करके उतरने से परहेज कर सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ राजस्थान के नेताओं की बैठक में वह इसी रणनीति को लेकर सक्रिय दिखाई दिए। माना यह जा रहा है कि राज्यों के विधानसभा चुनाव में गुटबाजी को समाप्त करके और पूरी पार्टी को एक जुटता के सूत्र में बांधने के लिए कांग्रेस इस रणनीति को अपना रही है। इस तरह से साल के अंत में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में पार्टी के चेहरा घोषित करने की संभावना न के बराबर है।
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राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष, युवा नेता सचिन पायलट कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हाल में उपचुनाव में उनकी सफलता भी दिखाई दी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी राज्य के कद्दावर नेता हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने कौशल का इम्तिहान पास कर लिया है। इसी तरह से सीपी जोशी, गिरजा व्यास, भंवर जितेन्द्र सिंह समेत कांग्रेस के पास नेताओं की कतार है।
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पार्टी इनमें से किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके चुनाव में उतरने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हैं कि सभी नेता अपनी एकजुटता के साथ आपसी गुटबाजी छोड़कर भावी चुनौतियों का सामना करें। कांग्रेस ने इस फॉर्मूले को गुजरात में भी अपनाया था और रणनीतिकारों का मानना है कि सफल रही थी।
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राजस्थान जैसी ही स्थिति मध्यप्रदेश की है। वहां कांग्रेस के पास नेताओं की कमी नहीं है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की राज्य में पदयात्रा ने जहां हलचल तेज कर दी है, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ सरीखे तमाम जनाधार वाले नेता हैं। यहां भी किसी एक चेहरे को घोषित करने के बाद गुटबाजी बढ़ने की पूरी संभावना है। ऐसे में पार्टी के रणनीतिकार चाहते हैं कि चुनाव के दौरान चेहरा घोषित करने से परहेज करना बेहतर होगा। छत्तीसगढ़ में भी यही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।
सूत्र बताते हैं कि हरियाणा समेत अन्य राज्यों में भी इसी नीति को पार्टी वरीयता दे सकती है। गुटबाजी पर नियंत्रण को लेकर कांग्रेस काफी गंभीर है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा, अध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कु. शैलजा और कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत अन्य हरियाणा में कांग्रेस के मजबूत कंधे हैं। इन सबका अपने क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव है।
कांग्रेस अध्यक्ष के साथ बैठक में शामिल सूत्र का कहना है कि उनका नजरिया गुटबाजी को लेकर बेहद सख्त है। राहुल गांधी का मानना है कि कांग्रेस के पास नेताओं की कमी नहीं है। लेकिन नेताओं के बीच की तगड़ी गुटबाजी के कारण पार्टी चुनाव में पूरी ताकत से नहीं उतर पाती। भितरघात स्थिति को कमजोर कर देता है।