कांग्रेस का बसपा और सपा से नहीं होगा गठबंधन
- उप्र में छोटे दलों से समझौता संभव
- किसी ब्राह्मण नेता को चेहरा बना सकती है कांग्रेस
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कांग्रेस का बसपा और सपा से अब कोई गठबंधन नहीं होगा। उत्तर प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों की ओर से सकारात्मक संदेश नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह अधिकांश सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। जदयू, अजित सिंह के लोकदल और छोटे दलों के लिए कुछ सीटें छोड़ी जा सकती है। आम तौर चुनाव से पहले किसी के मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने से परहेज करने वाली कांग्रेस इस बार के चुनाव में किसी ब्राह्मण नेता को अपना चेहरा बना सकती है।
कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्रत्त्ी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा से समझौते की कोई संभावना नहीं है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी का खोया जनाधार हासिल करने के लिए रणनीति तय कर रहे हैं।
पांच राज्यों के चुनावों के बाद राहुल गांधी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित होकर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे सकते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ढ़ाई दशक से उत्तर प्रदेश में बेहद पिछड़ी हुई है। बिहार में इस बार की सफलता ने उप्र में भी पैठ बनाने की उम्मीदें जग गईं हैं।
राहुल ने कहा संकल्प के साथ मैदान में आएगी पार्टी
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के नेताओं से कहा है कि इस बार पार्टी सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए बल्कि चुनाव जीतकर सरकार बनाने के संकल्प के साथ मैदान में उतरेगी। इसी रणनीति के तहत सबसे पहले ब्राह्मण वोट बैंक को प्रभावित करने के प्रयास होंगे। ब्राह्मण वोट बैंक कांग्रेस का पारंपरिक आधार रहा है लेकिन फिलवक्त यह पार्टी की झोली से खिसक चुका है। भाजपा भी इस वोट बैंक पर दावा जताती रही है।
बसपा प्रमुख मायावती ने सतीश मिश्र को पार्टी में अहम स्थान देकर कई चुनाव में ब्राह्मण वोट बैंक के बड़े हिस्से को प्रभावित किया। दलित और ब्राह्मण वोट के साथ मुस्लिम वोट बैंक को ही जोड़कर बसपा सफलता हासिल करती रही है।
कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में दलित और मुस्लिम शामिल रहे हैं लेकिन वर्तमान यह समीकरण बिखर चुका है और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास अपना कोई प्रतिबद्ध वोट बैंक नहीं रह गया है। इस कमी को महसूसते हुए पहले ब्राह्मण वोट बैंक का आधार हासिल करने की कोशिश होगी ताकि बाद में दूसरे वोट बैंक को भी रिझाया जा सके।
उप्र में कांग्रेस की गंभीरता के बाबजूद फिलहाल उसके लिए राह आसान नहीं दिखती। सपा ने उन सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं जो सीटें इस वक्त उसके कब्जे में नहीं है। उधर बसपा ने पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। भाजपा अपना चेहरा तय नहीं कर पा रही है। ऐसे में कांग्रेस ने सबसे पहले भाजपा के वोट बैंक में ही सेंध की योजना बनाई है।