{"_id":"65631126ba5af804ad0d25ba","slug":"congress-up-preparations-executive-formation-rahul-gandhi-priyanka-gandhi-news-and-updates-2023-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Congress: 'ढाई फीसदी' पर कांग्रेस का यह कैसा दांव! क्या पार्टी ने कर दी कोई बड़ी गलती","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Congress: 'ढाई फीसदी' पर कांग्रेस का यह कैसा दांव! क्या पार्टी ने कर दी कोई बड़ी गलती
सार
कांग्रेस की कार्यसमिति से यूपी में सियासी हलचल तेज। 130 सदस्यों में सिर्फ तीन महिलाएं। महिलाओं की नजरंदाजी पर आलाकमान से शिकायत की तैयारियां।
विज्ञापन
कांग्रेस की सदस्यता दिलाते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आखिरकार उत्तर प्रदेश के नए कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी गठित कर दी। सियासी नजरिए और उदयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर का एक महत्वपूर्ण पहलू तो उत्तर प्रदेश की नवगठित कार्यकारिणी में दिखा। लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलू नजरअंदाज भी कर दिए गए। दरअसल उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आवाज बुलंद करने के लिए पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने "लड़की हूं लड़ सकती हूं" जैसे महाअभियान की शुरुआत तो की लेकिन जब कार्यसमिति गठन की बारी आई तो 130 पदाधिकारियों की सूची में महज तीन महिलाओं को ही जगह मिली है। यानी अभी तक की घोषित हुई इस कार्यकारिणी में ढाई फ़ीसदी महिलाओं को ही जगह मिली है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की ओर से घोषित की गई कार्यकारिणी के बाद पार्टी के भीतर ही तमाम तरह की सुगबुगाहटें शुरू हो गईं। असंतुष्ट नेताओं का एक धड़ा अब इस मामले में आलाकमान से शिकायत करने की तैयारी में है।
लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी हैं। इस कड़ी में सबसे पहले पार्टी ने अपनी नई कार्यकारिणी का गठन किया। नई कार्यकारिणी में पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सियासी नजरिए से जातिगत समीकरणों को साधते हुए सभी सियासी समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है। ताकि आने वाले लोकसभा के चुनाव में पार्टी की ओर से जातिगत समीकरणों के आधार पर सब कुछ दुरुस्त नजर आए। पार्टी ने 130 पदाधिकारी की सूची जारी की है। इसमें उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव शामिल किए गए हैं। इन 130 पदाधिकारी की सूची में सभी सियासी समीकरणों के लिहाज से जातिगत जनाधार को मजबूती से देखा गया है। इसमें पार्टी ने पिछड़ा वर्ग के 43, सामान्य वर्ग से 41, 22 मुस्लिम और 23 दलितों को जगह दी है।
कांग्रेस कि कार्यकारिणी समिति की घोषणा के बाद ही उत्तर प्रदेश के सियासत में अंदरूनी तौर पर कई तरह के सुगबुगाहटें शुरू हो गई। पार्टी से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ नेता अपना नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि जब उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा देकर महिलाओं को आगे करने की बात की तो कांग्रेस कि कार्यकारिणी समिति में महिलाओं की भागीदारी महज ढाई फ़ीसदी पर ही क्यों सिमट गई। दरअसल पार्टी ने 130 लोगों की इस कार्यकारिणी में महज तीन महिलाओं को ही जगह दी है। इसमें महासचिव के तौर पर सरिता पटेल को और अर्चना रावत समेत पूर्वी वर्मा को सचिव बनाया गया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि जब आप महिलाओं को आगे रखने की बात करते हो और अपनी कार्य समिति में उनको जगह नहीं देते हो तो सवाल उठने लाजिमी है। उनका कहना है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की बात में कांग्रेस हमेशा आगे रही है। लेकिन जब प्रदेश की नई कार्यकारिणी में उनको जगह देने की बारी आती है तो 130 लोगों में महज तीन लोगों को ही आगे किया जाता है।
विज्ञापन
कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि वैसे तो उदयपुर में हुए पार्टी के चिंतन शिविर के बहुत से पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। पार्टी में 130 लोगों की संख्या में 50 साल से कम उम्र के लोगों को अच्छी खासी तरजीह भी दी गई है। तकरीबन 88 लोगों की उम्र 50 साल से कम है यानी की 130 लोगों की संख्या में 65 फ़ीसदी के करीब पचास साल से कम उम्र के लोग शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि फिलहाल जी कार्य समिति का गठन कर पदाधिकारी की लिस्ट जारी की गई है उसमें अभी और भी संख्या बढ़ सकती है। इसलिए जारी की गई लिस्ट पर किसी भी तरीके के सवाल या निशान उठाने का कोई मतलब नहीं बनता है।
हालांकि पार्टी की नई कार्यकारिणी की गठन में महिलाओं की भागीदारी न होने पर पार्टी के कुछ नेताओं ने इस पूरे मामले को प्रियंका गांधी के सामने भी रखने की बात कही है। पार्टी से जुड़े एक नेता और कार्यकारिणी में महिलाओं की भागीदारी तकरीबन न के बराबर होने पर उनका कहना है कि वह इस पूरे मामले में न सिर्फ प्रियंका गांधी से मिलेंगे बल्कि उन तक और भी कई पार्टी के कार्यकर्ता तथा महिलाएं अपनी बात भी रखेंगी। महिलाओं की भागीदारी न होने पर सवाल उठाते हुए असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं के मुद्दे को आगे करके ही कांग्रेस पार्टी ने चुनाव को एक धार देने की कोशिश की थी। अब आने वाले लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी महिलाओं के ही मुद्दे को आगे कर सियासत में संदेश देना चाहती है। लेकिन महिलाओं की कार्यसमिति में भागीदारी न होने से पार्टी के संदेश की जमीनी हकीकत पता चल जाती है। इसलिए इस मामले में अब महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुछ असंतुष्ट नेता पार्टी आलाकमान से भी मुलाकात करेंगे।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी हैं। इस कड़ी में सबसे पहले पार्टी ने अपनी नई कार्यकारिणी का गठन किया। नई कार्यकारिणी में पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सियासी नजरिए से जातिगत समीकरणों को साधते हुए सभी सियासी समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है। ताकि आने वाले लोकसभा के चुनाव में पार्टी की ओर से जातिगत समीकरणों के आधार पर सब कुछ दुरुस्त नजर आए। पार्टी ने 130 पदाधिकारी की सूची जारी की है। इसमें उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव शामिल किए गए हैं। इन 130 पदाधिकारी की सूची में सभी सियासी समीकरणों के लिहाज से जातिगत जनाधार को मजबूती से देखा गया है। इसमें पार्टी ने पिछड़ा वर्ग के 43, सामान्य वर्ग से 41, 22 मुस्लिम और 23 दलितों को जगह दी है।
विज्ञापन
कांग्रेस कि कार्यकारिणी समिति की घोषणा के बाद ही उत्तर प्रदेश के सियासत में अंदरूनी तौर पर कई तरह के सुगबुगाहटें शुरू हो गई। पार्टी से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ नेता अपना नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि जब उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा देकर महिलाओं को आगे करने की बात की तो कांग्रेस कि कार्यकारिणी समिति में महिलाओं की भागीदारी महज ढाई फ़ीसदी पर ही क्यों सिमट गई। दरअसल पार्टी ने 130 लोगों की इस कार्यकारिणी में महज तीन महिलाओं को ही जगह दी है। इसमें महासचिव के तौर पर सरिता पटेल को और अर्चना रावत समेत पूर्वी वर्मा को सचिव बनाया गया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि जब आप महिलाओं को आगे रखने की बात करते हो और अपनी कार्य समिति में उनको जगह नहीं देते हो तो सवाल उठने लाजिमी है। उनका कहना है कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की बात में कांग्रेस हमेशा आगे रही है। लेकिन जब प्रदेश की नई कार्यकारिणी में उनको जगह देने की बारी आती है तो 130 लोगों में महज तीन लोगों को ही आगे किया जाता है।
विज्ञापन
कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि वैसे तो उदयपुर में हुए पार्टी के चिंतन शिविर के बहुत से पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। पार्टी में 130 लोगों की संख्या में 50 साल से कम उम्र के लोगों को अच्छी खासी तरजीह भी दी गई है। तकरीबन 88 लोगों की उम्र 50 साल से कम है यानी की 130 लोगों की संख्या में 65 फ़ीसदी के करीब पचास साल से कम उम्र के लोग शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि फिलहाल जी कार्य समिति का गठन कर पदाधिकारी की लिस्ट जारी की गई है उसमें अभी और भी संख्या बढ़ सकती है। इसलिए जारी की गई लिस्ट पर किसी भी तरीके के सवाल या निशान उठाने का कोई मतलब नहीं बनता है।
हालांकि पार्टी की नई कार्यकारिणी की गठन में महिलाओं की भागीदारी न होने पर पार्टी के कुछ नेताओं ने इस पूरे मामले को प्रियंका गांधी के सामने भी रखने की बात कही है। पार्टी से जुड़े एक नेता और कार्यकारिणी में महिलाओं की भागीदारी तकरीबन न के बराबर होने पर उनका कहना है कि वह इस पूरे मामले में न सिर्फ प्रियंका गांधी से मिलेंगे बल्कि उन तक और भी कई पार्टी के कार्यकर्ता तथा महिलाएं अपनी बात भी रखेंगी। महिलाओं की भागीदारी न होने पर सवाल उठाते हुए असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं के मुद्दे को आगे करके ही कांग्रेस पार्टी ने चुनाव को एक धार देने की कोशिश की थी। अब आने वाले लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी महिलाओं के ही मुद्दे को आगे कर सियासत में संदेश देना चाहती है। लेकिन महिलाओं की कार्यसमिति में भागीदारी न होने से पार्टी के संदेश की जमीनी हकीकत पता चल जाती है। इसलिए इस मामले में अब महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुछ असंतुष्ट नेता पार्टी आलाकमान से भी मुलाकात करेंगे।