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मालेगांव ब्लास्ट केस: कर्नल पुरोहित की जमानत पर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा
amarujala.com- Presented by: मोहित
Updated Mon, 21 Aug 2017 03:43 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को जमानत दे दी। अदालत के इस फैसले पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कांग्रेस-बीजेपी इस फैसले पर आपस में भिड़ गई।
पढ़ें- मालेगांव ब्लास्ट केस: जब पहली बार आया 'हिंदू आतंकवाद' का नाम
कांग्रेस ने कहा कि जब से मोदी सरकार आई है हिंदूवादी संगठनों के आरोपियों को जमानत दी जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार आएसएस के उन तमात आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है जो बम धमाकों में शामिल रहे हैं।
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वहीं पूर्व विधायक और जमात-ए-उलमा के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि बीजेपी एनआईए और एटीएस का गलत इस्तेमाल कर रही है। इन सब आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार करते हुआ कहा कि 'हिंदू आतंकवाद के नाम पर निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।
पढ़ें- जेल से रिहा होकर बोलीं साध्वी प्रज्ञा- कांग्रेस शासन में पार हो गई थी अत्याचारों की पराकाष्ठा
29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
जिसके बाद 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के अलावा फरवरी 2007 में हुए समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट का प्रमुख आरोपी असीमानंद का नाम भी शामिल था।
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कांग्रेस ने कहा कि जब से मोदी सरकार आई है हिंदूवादी संगठनों के आरोपियों को जमानत दी जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार आएसएस के उन तमात आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है जो बम धमाकों में शामिल रहे हैं।
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वहीं पूर्व विधायक और जमात-ए-उलमा के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि बीजेपी एनआईए और एटीएस का गलत इस्तेमाल कर रही है। इन सब आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार करते हुआ कहा कि 'हिंदू आतंकवाद के नाम पर निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है।
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29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए ब्लास्ट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 79 घायल हो गए थे। शुरुआत में इस मामले में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया था लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
जिसके बाद 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के अलावा फरवरी 2007 में हुए समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट का प्रमुख आरोपी असीमानंद का नाम भी शामिल था।