कांग्रेस को झटका, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिया इस्तीफा, भाजपा में होंगे शामिल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपनी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सभापति वेंकैया नायडू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अमेठी पर मजबूत पकड़ रखने वाले संजय सिंह इससे पहले भी कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। तब उन्होंने पहले जनता दल का और फिर बाद में भाजपा का दामन थामा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंह ने भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी के खिलाफ चुपनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह अमेठी से भाजपा विधायक हैं। वह कल भाजपा में शामिल होंगे।
दूसरी बार पार्टी से इस्तीफा देते हुए सिंह ने कहा कि बहुत सोच-विचार के बाद फैसला लिया है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस अभी भी अतीत में है। वह भविष्य से अनजान है। आज देश पीएम मोदी के साथ है और अगर देश उनके साथ है, तो मैं उनके साथ हूं। मैं कल भाजपा में शामिल होउंगा। मैंने पार्टी से और राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस में 15-20 सालों से संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है।'
राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने संजय सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।Congress Rajya Sabha MP, Sanjay Singh: Congress is still in the past, unaware of the future. Today, country is with PM Modi & if the country is with him, I'm with him. I will join BJP tomorrow. I have resigned from the party, as well as my membership of Rajya Sabha. pic.twitter.com/waAuPdFu9A
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 30, 2019
Rajya Sabha Chairman M Venkaiah Naidu has accepted the resignation of Sanjay Singh as member of Rajya Sabha. Sanjay Singh will join Bharatiya Janata Party tomorrow. (file pic of M Venkaiah Naidu) pic.twitter.com/KdhSgsLXkD
— ANI (@ANI) July 30, 2019
सिंह को कांग्रेस ने असम से राज्यसभा सांसद बनाया था। अमेठी का नेहरू-गांधी परिवार से गहरा नाता रहा है। 1980 में जब नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य ने अमेठी से चुनाव लड़ने का फैसला किया तब उन्होंने संजय गांधी को अपना समर्थन दिया था। अमेठी के पास वाली लोकसभा सीट रायबरेली से उस समय इंदिरा गांधी चुनाव लड़ा करती थी। बाद में जब संजय की जगह राजीव गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा तो वह उनके दोस्त बन गए।
गांधी परिवार के साथ रिश्ता होने की वजह से उन्हें राजनीति के मैदान में काफी चर्चा मिली। हालांकि 1988 में सिंह ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और जनता दल में शामिल हो गए। जनता दल के पक्ष में देशवासियों की लहर होने के बावजूद सिंह को फायदा नहीं मिला और वह अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और 1998 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी से चुनाव जीतने में सफल रहे।
1999 में वह इसी सीट से भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे लेकिन उन्हें राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने टक्कर दी और वह परिवार के नाम पर जीत हासिल करने में सफल रहीं। 2003 में सिंह राजीव गांधी की जयंति के मौके पर दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में वह दूसरी बार सुल्तानपुर से लोकसभा सांसद चुने गए।