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LS: कांग्रेस ने उठाया ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की ओर से बांध बनाने का मुद्दा, कहा- जल सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

Tue, 11 Feb 2025 06:58 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 11 Feb 2025 06:58 PM IST
सार

संसद में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी असम की जीवन रेखा है और भारत की रणनीतिक संपत्ति है। यारलुंग त्सांगपो ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने के चीन के फैसले ने भारत की जल सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के असंगत रूप से बढ़ते नियंत्रण को लेकर जानकारी दी है।

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Congress raised issue of China building a dam on Brahmaputra in LS, increased concern about water security
गौरव गोगोई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

संसद में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने चीन के ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने के फैसले का मुद्दा उठाया। लोकसभा में उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी असम की जीवन रेखा है और भारत की रणनीतिक संपत्ति है। यारलुंग त्सांगपो ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने के चीन के फैसले ने भारत की जल सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। 

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लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के असंगत रूप से बढ़ते नियंत्रण को लेकर जानकारी दी है। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता ने मांग की है कि जल समझौता और प्रबंधन को प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्रालय के स्तर पर चीन के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों का प्रमुख भाग होना चाहिए। 
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उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर सहमति बनानी होगी कि चीन बाढ़ पूर्वानुमान और प्रबंधन को लेकर हाइड्रोलोजिकल डाटा हमसे साझा करे। मेरा सवाल है क्या सरकार जानती है कि चीन एक बांध बना रहा है? इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय फोरम पर उठाने के लिए सरकार ने क्या किया है? 
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चीन से अपनी चिंताओं को औपचारिक रूप से व्यक्त कर चुका भारत
छह फरवरी को संसद में सरकार की ओर से इस मुद्दे पर जानकारी दी गई। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सीमा क्षेत्रों पर नदियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चीन के साथ 2006 में स्थापित संस्थागत विशेषज्ञों के तंत्र के तहत कूटनीतिक माध्यमों से चर्चा की जाती है।  मंत्री ने कहा कि 30 दिसंबर 2024 को भारत ने इस परियोजना के बारे में अपनी चिंताओं को औपचारिक रूप से चीन से व्यक्त किया था। इसके अलावा विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था। इसमें दोनों देशों ने जल्द ही विशेषज्ञों की बैठक बुलाने पर सहमति व्यक्त की थी। बैठक में हाइड्रोलॉजिकल डाटा साझा करने और ट्रांस-बॉर्डर नदियों से संबंधित अन्य सहयोग पर चर्चा होगी।


राज्य विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सरकार अपने हितों की रक्षा के लिए सीमा पार नदियों के मुद्दे पर चीन के साथ बातचीत करना जारी रखने का इरादा रखती है। सरकार ब्रह्मपुत्र नदी से संबंधित सभी घटनाक्रमों पर सावधानीपूर्वक नजर रखती है, जिसमें चीन द्वारा जलविद्युत परियोजनाओं को विकसित करने की योजना भी शामिल है, और हमारे हितों की रक्षा करने के लिए आवश्यक उपाय करती है। उन्होंने कहा कि सरकार जीवन व आजीविका की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी। हम चीन के साथ जुड़े रहकर अपने हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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