Congress Vs EC: चिदंबरम के बयान को चुनाव आयोग ने बताया बेतुका, गौरव गोगोई बोले- संसद में खुली बहस होनी चाहिए
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग पर बिहार और तमिलनाडु की एसआईआर प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया, जिसे आयोग ने 'भ्रामक' बताया। गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए संसद में बहस की मांग की। विपक्ष का कहना है कि एसआईआर विवाद अब लोकतंत्र की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा तमिलनाडु में 6.5 लाख नए मतदाताओं के जुड़ने और बिहार में 65 लाख मतदाताओं के संभावित विलोपन पर सवाल उठाने के बाद चुनाव आयोग ने रविवार को उनके बयानों को 'झूठा, भ्रामक और बेतुका' करार दिया है। चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत प्रवासी मजदूरों को तमिलनाडु में अवैध रूप से मतदाता बनाया जा रहा है।
आयोग का पलटवार: संविधान और RP एक्ट का हवाला
EC ने जवाब में कहा कि भारत के नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(e) के तहत देश में कहीं भी निवास करने का अधिकार है। RP एक्ट 1950 की धारा 19(b) के अनुसार, जो व्यक्ति किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, वह उस क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज करा सकता है। यानी जो व्यक्ति बिहार से चेन्नई आया है और वहां नियमित रूप से रह रहा है, वह वहां मतदाता बन सकता है।
एसआईआर पर भ्रम फैलाने का आरोप
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में अभी SIR प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है, इसलिए बिहार में चल रही एसआईआर को उससे जोड़ना पूरी तरह गलत है। आयोग ने कहा कि कुछ राजनेता मीडिया में जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार से जुड़ी प्रक्रिया अभी जारी
ईसी ने कहा कि बिहार में जो मतदाता वास्तव में स्थायी रूप से राज्य से बाहर चले गए हैं और अन्य राज्यों में नियमित रूप से रह रहे हैं, उनकी जानकारी केवल SIR पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगी। अभी इस पर कोई अंतिम आंकड़ा तय नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग पर कब-क्या बोले चिदंबरम?
दरअसल, चिदंबरम ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि एसआईआर की प्रक्रिया और भी ज्यादा दिलचस्प होती जा रही है। एक तरफ बिहार में जहां 65 लाख मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा मंडरा रहा है, वहीं तमिलनाडु में 6.5 लाख लोगों को मतदाता के रूप में जोड़ने की खबरें चिंताजनक और स्पष्ट रूप से अवैध हैं। उन्हें स्थायी रूप से प्रवासी कहना प्रवासी मजदूरों का अपमान है और तमिलनाडु के मतदाताओं के अपनी पसंद की सरकार चुनने के अधिकार में घोर हस्तक्षेप है।
यदि प्रवासी मजदूर के परिवार का बिहार में स्थायी निवास है और वह बिहार में ही रहता है, तो उसे तमिलनाडु में "स्थायी रूप से प्रवासित" कैसे माना जा सकता है? चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है और राज्यों के चुनावी चरित्र और पैटर्न को बदलने की कोशिश कर रहा है। शक्तियों के इस दुरुपयोग का राजनीतिक और कानूनी रूप से विरोध किया जाना चाहिए। ये सब उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया।
चिदंबरम का आरोप और EC की चेतावनी
इसके चार घंटे बाद ही चिदंबरम ने एक और पोस्ट कर चुनाव आयोग पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने अपने इस पोस्ट में लिखा कि हर भारतीय को किसी भी राज्य में रहने और काम करने का अधिकार है जहां उसका स्थायी घर हो। यह स्पष्ट और सही है चुनाव आयोग इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा कि बिहार की वर्तमान मतदाता सूची में शामिल कई लाख लोगों को इसलिए बाहर रखा जाना चाहिए क्योंकि वे राज्य से "स्थायी रूप से पलायन" कर गए थे? यही सवाल है।
इससे पहले कि आप इस निष्कर्ष पर पहुमचें कि कोई व्यक्ति राज्य से "स्थायी रूप से पलायन" कर गया है, क्या प्रत्येक मामले की गहन जाच नहीं होनी चाहिए? 37 लाख लोगों से जुड़ी ऐसी जांच 30 दिनों की अवधि में कैसे की जा सकती है? बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होना एक गंभीर मुद्दा है, और इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। कुलमिलाकर आसान भाषा में समझें तो चिदंबरम कहना चाह रहे हैं कि बिहर से आकर अगर कोई तमिलनाडु में रहने लगा है, वो भी अस्थाई रूप से तो उसे तमिननाडु की मतदाता सूची में नहीं जोड़ना चाहिए बल्कि बिहार की मतदाता सूची में उनका नाम रहना चाहिए। इसी पर आयोग और चिदंबरम में के बीच बहस चल रही है।
ये भी पढ़ें- असम के मुख्यमंत्री बोले- राहुल गांधी देशद्रोही, बताया PAK और बांग्लादेशी मुसलमानों का समर्थक
गौरव गोगोई ने संसद में बहस की उठाई मांग
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया को संदेहास्पद करार दिया और कहा कि जब इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, तो इस पर संसद में खुली बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एसआईआर का नहीं बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और भरोसे से जुड़ा है।
ये भी पढ़ें- कांग्रेस नेता नागेश ने मांगी पुरानी शिकायत की प्रति, चुनाव आयोग ने कहा- नहीं मिला कोई पत्र
चुनाव आयोग पर बढ़ता अविश्वास
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर कई बार सवाल उठाए हैं, खासकर चुनाव की तारीखों की घोषणा, वोटिंग डाटा की पारदर्शिता और अब मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर। अब एसआईआर को लेकर हो रहा विवाद इस बहस को और गहरा कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार के दबाव में चुनाव आयोग एकतरफा फैसले कर रहा है।
ये भी पढ़ें- कैदी नंबर 15528 बने दुष्कर्म के दोषी पूर्व सांसद प्रज्वल; जेल में रोते-रोते बिताई पहली रात
संवैधानिक संस्था की साख दांव पर
चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर उठ रहे सवाल केवल एक राज्य की एसआईआर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गए हैं। यह बहस अब लोकतंत्र की आधारशिला स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में देश की प्रतिबद्धता पर केंद्रित हो गई है। संसद में अगर इस पर चर्चा होती है तो यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.