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कांग्रेस का सरकार पर वार, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा कर की 18 लाख करोड़ रुपये की 'जबरन वसूली'

Mon, 29 Jun 2020 03:49 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 29 Jun 2020 03:49 PM IST
सार

  • पिछले तीन सप्ताह के बीच 22 बार बढ़ चुके डीजल-पेट्रोल के दाम,
  • पेट्रोल में 9.17 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 10.45 रुपये प्रति लीटर तक की हुई बढ़ोतरी             
  • कांग्रेस ने आम आदमी की आवाज को बनाई ताकत, लोगों के बयान सोशल मीडिया पर किए पोस्ट 

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congress president sonia gandhi alleged Modi govt on 'extortion' of Rs 18 lakh crore by petrol and diesel fuel price hike
Congress Protest on Fuel Hike - फोटो : Social Media

विस्तार

रिकॉर्ड 22वीं बार बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.43 रुपये प्रति लीटर और डीजल 80.53 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस महीने पेट्रोल की कीमतों में न्यूनतम 9.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 10.45 रुपये प्रति लीटर का उछाल आया है।

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कांग्रेस पार्टी इसे ‘लूट’ करार दे रही है। पार्टी का कहना है कि इससे पहले से ही कोरोना के कारण बदहाल अर्थव्यवस्था की हालत और अधिक खराब होगी, महंगाई बढ़ेगी और इस कारण आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी।

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वहीं भाजपा ने कहा है कि सरकार ने जनता को कई तरह के करों में छूट देने के बाद इस तरह से कुछ टैक्स इकट्ठा करने की रणनीति बनाई गई है, जिसे अतार्किक नहीं कहा जा सकता।

कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया जबरन वसूली

डीजल-पेट्रोल कीमतों में वृद्धि के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को मोर्चा संभाला। पार्टी कार्यकर्ता सोमवार को पूरे देश में सड़कों पर उतरे।

उन्होंने कीमतों में वृद्धि के बारे में आम लोगों से बातचीत की और उनके विडियो सोशल मीडिया पर डाले। सरकार को लोगों की तकलीफ बताते हुए पार्टी ने इस बढ़ोतरी को वापस लेने की अपील की।
 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा सरकार इस तरह की ‘जबरन वसूली’ से 18 लाख करोड़ का धन इकट्ठा कर चुकी है। सरकार को इस मूल्यवृद्धि को वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक 12 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा चुकी है। कोरोना से जहां आम आदमी की कमाई के रास्ते बंद हुए हैं, सरकार इस तरह पैसे इकट्ठे करने में लगी है।

2014 से 2020 के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 61.7 फीसदी की गिरावट हो चुकी है। इसके बाद भी पेट्रोल की कीमतों में 12.6 फीसदी और डीजल की कीमतों में 44.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
 
पार्टी ने मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल से वर्तमान कीमतों की तुलना करते हुए कहा है कि यूपीए शासन काल में कच्चे तेल की कीमतें 107.09 डॉलर प्रति बैरल होने के बाद भी पेट्रोल की कीमतें केवल 71.41 रुपये प्रति लीटर थीं।

जो इस समय कच्चे तेल की कीमतें आधी से भी कम (40.66 डॉलर प्रति बैरल) रह जाने के बाद 80.38 रूपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं।
 
मनमोहन सिंह सरकार में मई 2014 में डीजल की कीमत 55.49 रुपये प्रति लीटर थी जो इस समय 80.40 रुपये प्रति लीटर हो गई है।   
 
मनमोहन सिंह सरकार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रुपये प्रति लीटर था, जो इस समय बढ़ाकर 32.98 रुपये प्रति लीटर कर दी गया है।

इसी प्रकार डीजल पर केवल 3.46 रुपये प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लिया जाता था जो इस समय 32.98 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

भाजपा ने किया बचाव

आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि मनमोहन सिंह सरकार में पेट्रो उत्पादों की कीमतें अप्रत्यक्ष तरीके से बढ़ाई जाती थीं।

जनता से कम मूल्य लेने के पीछे तेल कंपनियों को पेट्रो बांड दे दिए जाते थे। बाद में उसे जनता की ही कमाई से भरा जाता था। मनमोहन सिंह सरकार में दिए पेट्रो बांड्स को इस समय भी सरकार चुका रही है।
 
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में टैक्स की विभिन्न दरें घटा दी गई हैं। अनेक खाद्य पदार्थों की कीमतें शून्य टैक्स पर ला दी गई हैं, कई महत्वपूर्ण चीजों पर टैक्स घटाकर पांच और 12 फीसदी कर दिया गया है।
 
प्रत्यक्ष कर में भी आम लोगों को काफी राहत दी गई है। 2.50 लाख रुपये की आय तक कोई टैक्स नहीं लिया जा रहा है, तो पांच लाख रुपये तक की आय पर नाम मात्र का टैक्स लिया जाता है, जिसे विभिन्न योजनाओं में निवेश दिखाकर उसे भी शून्य किया जा सकता है।   


 
इसी प्रकार औद्योगिक कम्पनियों को भी व्यापार में बढ़ोतरी देने के लिए कई तरह के करों में छूट दी गई है। उन्हें कई प्रकार से बेहद कम ब्याज पर धन उपलब्ध कराया जा रहा है।  
 
पेट्रोल कीमतों से हो रही आय का 42 फीसदी हिस्सा राज्यों को भी दिया जाता है। जबकि राज्य इन्हीं कीमतों पर अपना वैट अलग से लगाते हैं। दिल्ली में डीजल की कीमतें पेट्रोल से ज्यादा होने के पीछे यही कारण है क्योंकि अरविंद केजरीवाल सरकार ने वैट की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी।

अगर राज्य सरकारें अपनी जनता को इस मूल्य वृद्धि से बचाना चाहती हैं तो वे इन दरों में कटौती कर सकती हैं।

वर्तमान समय में सरकार की आय बेहद कम हो गई है, जबकि इसी बीच उसे राज्यों को सहयोग करना है, कल्याणकारी योजनायें चलानी हैं और लाखों कर्मचारियों-सैनिकों को वेतन भी देना है।

इसलिए इस प्रकार से केंद्र की दरों को अनुचित नहीं कहा जा सकता।

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