सोमवार को इंडिया गेट पर कांग्रेस ने प्लान किया दो घंटे का धरना, दूर तक गई आवाज
- अचानक लिया कांग्रेस के चुपचाप घर न बैठने का निर्णय
- छात्रों की आवाज से लोगों का ध्यान न हटने की अपनाई रणनीति
- सरकार और भाजपा के धर्मनिरपेक्षता पर को लिया निशाने पर
- प्रियंका का मीडिया में बयान, सोनिया गांधी के वक्तव्य ने दी धार
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विस्तार
कांग्रेस पार्टी ने विपक्ष के नेताओं के साथ कांस्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार पर हमला बोला था, इसके बाद कई रणनीतिकारों की राय थी कि आज का काम पूरा हो गया, लेकिन दो रणनीतिकारों को मामला चुभ रहा था। बताते हैं दो बजे की बैठक में इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति के पास दो घंटे के लिए धरने पर बैठने का सुझाव आया।
महिला फायर ब्रांड नेता सुष्मिता देव की भी यही मंशा थी। सुझाव कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को भी पसंद आया। प्रियंका का भी मानना था कि जामिया में इतनी बड़ी घटना हुई है। छात्रों के साथ बर्बरता हुई है और ऐसे में कांग्रेस पार्टी चुप होकर घर नहीं बैठ सकती।
लेकिन छात्रों के प्रति लोगों का आकर्षण हाइजैक नहीं करना
पार्टी के रणनीतिकारों ने रणनीति बनाई तो सुझाव आया कि इससे भाजपा मुद्दे के राजनीतिक करण का आरोप लगाएगी और छात्रों की आवाज अपनी धार खो देगी। बताते हैं प्रियंका गांधी के नेतृत्व में तय हुआ कि नहीं, कांग्रेस इसकी मोनोपोली नहीं बनने देगी।
पार्टी के नेता केवल दो घंटे के लिए धरने पर बैठेंगे। यहां कुछ भी हाईजैक नहीं होने देना है। छात्रों की आवाज में केवल उनका साथ देंगे। ताकि लोकतंत्र की आवाज को बल दिया जा सके। इसलिए यह धरना भी इंडिया गेट पर ही होगा और केवल दो घंटे का होगा।
प्रियंका आई और बड़े नेता भी आ गए इंडिया गेट
प्रियंका गांधी वाड्रा धरना स्थल पर पहुंचने के लिए हामी भरने के बाद केसी वेणुगोपाल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, सुष्मिता देव, रागिनी नायक समेत अन्य ने अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट की तरफ कूच किया। बताते हैं इसके पीछे एक बड़ा कारण 16 दिसंबर की तारीख भी थी।
16 दिसंबर को ही भारत ने 1971 में पाकिस्तान पर जीत दर्ज करके बांग्लादेश के अस्तित्व को निश्चित कर दिया था। इसे भारत विजय दिवस के रूप में मनाता है। यह बांग्लादेश आज देश के शीर्ष नेतृत्व के कामकाज पर नाराजगी जाहिर कर रहा है।
विदेश मंत्री अपना दौरा रद्द कर रहे हैं। दूसरी तरफ नागरिकता कानून को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है और सरकार ढिठाई भरा व्यवहार कर रही है। सूत्र बताते हैं कि दो घंटे के धरने का नतीजा यह रहा कि देश भर के मीडिया ने इससे प्रमुखता दे दी।
सरकार समाज और देश के विकास के हर ज्वलंत मुद्दे पर फेल: सुष्मिता देव
सुष्मिता देव कहती हैं कि सरकार समाज और देश के विकास के हर ज्वलंत मुद्दे पर फेल है। अर्थव्यस्था, रोजगार, किसान, मजदूर, उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मामले में फिसड्डी साबित हो रही है। इसलिए ध्यान बंटाने के लिए देश को हिन्दू-मुसलमान में गुमराह करने, उलझाए रखने, ध्यान बंटाने में लगी है।
सुष्मिता देव का कहना है कि आजादी और बंटवारे के बाद इतना संघर्ष, हिंसा सबको दरकिनार करके भारत ने धर्म निरपेक्षता को अपनाया। भारत ने पाकिस्तान के इस्लामिक राज्य बनने के निर्णय के बाद यह कदम उठाया था। पिछले 70 साल में देश सबको साथ लेकर चला।
विभिन्नता में एकता, धर्म, संप्रदाय सबमें समन्वय लेकर चले, लेकिन 2014 बाद से केंद्र सरकार ने इस ढाचें को तहस-नहस कर दिया है। सुष्मिता का कहना है कि सरकार नरेटिव बनाने में लगी है। हम इसका विरोध करेंगे।
सोनिया गांधी के वक्तव्य ने दी धार
धरने पर कांग्रेस के नेता बैठे थे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी बारीकी से इसकी मॉनिटरिंग कर रहे थे। दस जनपथ के सूत्र बताते हैं कि कुछ देर बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने वक्तव्य जारी करने का निर्णय लिया।
अपने वक्तव्य में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष तथा केंद्रीय गृहमंत्री की राजनीतिक मंशा पर जमकर हमला बोला। सरकार के कामकाज पर केन्द्र सरकार के गठन का उद्देश्य बताते हुए हमला बोला।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी हमला बोला। उन्होंमे जामिया मिलिया के छात्रों पर हमला, लाइब्रेरी में पुलिस के जबरिया घुसने को देश की आत्मा चोट बताया।