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JPC: संयुक्त संसदीय समिति से दूरी बना सकती है कांग्रेस, गृह मंत्रालय के तीन विधेयकों पर विपक्षी मोर्चेबंदी तेज

Mon, 29 Sep 2025 03:39 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 29 Sep 2025 03:39 PM IST
सार

कांग्रेस गृह मंत्रालय के तीन विधेयकों की जांच के लिए गठित होने वाली संयुक्त संसदीय समिति से दूर रह सकती है। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक रूप से बताया जाएगा। त्रिणमूल, शिवसेना (उद्धव) और आप पहले ही समिति का बहिष्कार कर चुके हैं, जबकि समाजवादी पार्टी भी विपक्षी एकजुटता की वकालत कर रही है। 

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Congress likely keep away from joint Parliament committee jpc on three home ministry Bills by Sources
लोकसभा। - फोटो : ANI

विस्तार

संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आ रहा है। कांग्रेस पार्टी संभवत: तीन अहम गृह मंत्रालय विधेयकों की जांच के लिए गठित होने वाली इस समिति से दूरी बनाए रख सकती है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष को आधिकारिक तौर पर सूचित किया जा सकता है। इस कदम से विपक्षी दलों के बीच साझा रुख और मजबूत होता दिख रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने अभी तक समिति में शामिल होने की इच्छा नहीं जताई है। पार्टी मानती है कि ये विधेयक संवैधानिक दायरे से बाहर हैं और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाए गए हैं। ऐसे में समिति में भाग लेना इन विधेयकों को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करने जैसा होगा।
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विपक्षी दलों की स्थिति
त्रिणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और आम आदमी पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे समिति का हिस्सा नहीं बनेंगे। समाजवादी पार्टी ने भी संकेत दिया है कि विपक्ष को एकजुट रहकर इस पैनल का बहिष्कार करना चाहिए। हालांकि, कुछ विपक्षी दलों ने अभी तक अपना औपचारिक रुख जाहिर नहीं किया है, लेकिन किसी ने भी समिति में शामिल होने की मंशा नहीं दिखाई है।
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लोकसभा अध्यक्ष का बयान
इससे पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा था कि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने लिखित रूप में समिति के बहिष्कार की जानकारी नहीं दी है। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर उन्हें कोई औपचारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ है।


तीन अहम विधेयक
मानसून सत्र के अंतिम दिन गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए थे। इनमें केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों में यह प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तार रहता है तो उसे पद से हटाया जा सकेगा।

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विवाद और विरोध
इन विधेयकों पर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया था। विपक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव असंवैधानिक है और इसे राज्यों में विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। विरोध के बीच ही इन विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया था। इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे, लेकिन अब तक समिति का गठन नहीं हो पाया है।


 
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