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लद्दाख में सेना के पीछे हटने से नाराज हैं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

Fri, 12 Feb 2021 07:55 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 12 Feb 2021 07:55 PM IST
सार

  • राहुल गांधी ने बताया प्रधानमंत्री को 'डरपोक'
  • क्या सचमुच लद्दाख में भारत ने चीन के आगे टेक दिए घुटने?

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Congress leader Rahul Gandhi become so angry at the Chinese incursion in Ladakh, attacks on PM Narendra Modi
Indian Army and PLA at Ladakh - फोटो : PTI

विस्तार

लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हट रही हैं। चीन की फौज वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मार्च-अप्रैल 2020 के तैनाती वाले स्थल की तरफ लौट रही है। भारत ने भी लद्दाख में उत्तर से लेकर दक्षिणी क्षेत्र से फौज को पीछे बुलाने का काम तेज कर दिया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कायरता बताया है। उन्होंने इसे चीन के सामने भारत के घुटने टेकने और गलवां में सैनिकों की शहादत के साथ धोखा बताया है।

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राहुल गांधी भारतीय सेना के पीछे हटाने के फैसले को लेकर बेहद नाराज हैं। उन्हें लग रहा है कि गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों ने शहादत दी। अपने पराक्रम से भारतीय सैनिकों ने गलवां, स्प्रिंग एरिया, गोगरा पोस्ट समेत तमाम क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाई। 135 किमी की पैंगोंग झील से लेकर कैलाश रेंज की चोटियों तक काबिज हुए और अब बिना कुछ हासिल हुए भारत अपनी ही जमीने से पीछे हट रहा है।

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क्या भारत ने गंवाई लद्दाख में चीन पर मिली बढ़त?

लद्दाख में कैलाश रेंज पर भारतीय सेना ने बढ़त हासिल कर ली थी। अगस्त महीने में ब्लैक टॉप, हेलमेट टॉप जैसी चोटियों पर भारत सेना के कब्जे के बाद चीन के महत्वपूर्ण सामरिक इलाके भारतीय सेना की जद में आ गए थे। चीन के क्षेत्र मोल्डो तक भारतीय सुरक्षा बलों की निगहबानी में आ गए थे। इतना ही नहीं पीओके से होकर चीन की सीमा में जाने वाले हाईवे पर भी भारतीय सेना आसानी से नजर रख सकती थी।

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चीन लगातार यहां से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने का दबाव बना रहा था। इसी के साथ-साथ स्प्रिंग एरिया, गोगरा पोस्ट समेत सभी क्षेत्रों से भारतीय सेना पीछे हट रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पैंगोंग त्सो क्षेत्र से चीन की सेना अपने स्थाई तंबू आदि हटा रही है। भारी टैंक आदि पीछे ले जा रही है। चीन के साथ-साथ भारतीय सैनिक भी पीछे हट रहे हैं। राहुल गांधी ने सैनिकों की इसी वापसी को चीनी फौज के सामने भारत का घुटना टेकना बताया है।

किन पॉइंट्स पर हुआ समझौता?

भारत और चीन के बीच में बनी सहमति का आधार धीरे-धीरे सामने आएगा। केन्द्र सरकार इस मामले में अभी सावधानी भरा स्टैंड लेकर चल रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लद्दाख क्षेत्र में सैनिकों की वापसी को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहा है। केवल जानकारी ही दी है। लेकिन सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पांच जुलाई को एनएसए अजीत डोभाल और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वांग यी के बीच गलवां को लेकर बनी सहमति को ही आगे बढ़ाया गया है।

सूत्र बताते हैं कि गलवां घाटी में भारत की सीमा कुछ पीछे आ गई थी और चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मार्च-अप्रैल 2020 के तैनाती वाली जगह पर चली गई थी। दोनों सेनाओं के बीच के क्षेत्र को दोनों देशों ने बफर जोन की मान्यता दे दी है। सूत्र बताते हैं कि इसी तरह की शर्त पर दोनों देश पूरे लद्दाख क्षेत्र में तनाव को कम करने पर राजी हो रहे हैं। चीन की सेना पीछे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लौट जाएगी और भारत की सेना अपने क्षेत्र में पीछे लौट आएगी।

बीच का क्षेत्र दोनों देशों के लिए बफर जोन होगा। इस तरह से भारतीय सैनिक अब फिंगर-3 (धन सिंह थापा पोस्ट) के बाद आगे पेट्रोलिंग के लिए नहीं जाएंगे। जबकि पहले फिंगर-4 तक पेट्रोलिंग के लिए जाते थे। चीन के सैनिक फिंगर-8 तक पीछे हटेंगे। हालांकि इस क्षेत्र में चीन के सैनिक भी नहीं आएंगे, लेकिन बफर जोन का ज्यादातर हिस्सा भारत के कब्जे और दावे वाले क्षेत्र में पड़ रहा है। इसी को केन्द्र में रखकर कांग्रेस अध्यक्ष इसे चीन के सामने घुटने टेकने की संज्ञा दे रहे हैं।

ड्रैगन दो कदम आगे और एक कदम पीछे

चीन की यह पुरानी नीति है। पड़ोसी देश की सीमा में दो कदम आगे बढ़ो और विवाद बढ़ने पर समझौते में एक कदम पीछे हट जाओ। इस तरह से चीन कुटिल तरीके से एक कदम जमीन पर अपना हक पा लेता है। चीन ने यहां भी यही कुटिल चाल चली। वह पहले भारत के कब्जे वाले भू-भाग में घुस आया। गलवां घाटी, गोगरा पोस्ट, हॉटस्प्रिंग एरिया समेत तमाम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समझौते और सहमति को एकतरफा बदलने की कोशिश की, फिर बाद में एक कदम पीछे हटने पर राजी हो गया।

कैलाश रेंज की चोटियों से क्या होगा?

भारतीय सेना ने 1962 की लड़ाई के दौरान कैलाश रेंज की पहाड़ी चोटियों पर अपना दावा छोड़ दिया था, लेकिन मई-जून में चीन की सेना से विवाद बढ़ने के बाद अगस्त में इनकी चोटियों पर कब्जा कर लिया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ब्लैक टॉप, हेलमेट टॉप पर भारतीय सेना के जाने के बाद चीन के माथे पर बल आ गए थे। अब ताजा सहमति के अनुसार लद्दाख के अन्य क्षेत्र से सनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों के सैन्य कमांडर फिर वार्ता की मेज पर बैठेंगे।



इसके बाद अगले चरण में सैन्य बल पीछे हटेंगे। कैलाश रेंज की पहाड़ियों से भारतीय सेना चीनी सैनिकों के पीछे हटने के बाद हटेगी और काफी कुछ राजनयिक स्तर की वार्ता में तय होगा। कूटनीति के जानकार कहते हैं कि इसके अलावा अब कोई और चारा नहीं बचा था।

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