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कांग्रेस को लगा समय पर राजनीतिक निर्णय न ले पाने का रोग

Wed, 12 Jul 2017 09:42 PM IST
शशिधर पाठक /अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक /अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Jul 2017 09:42 PM IST
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Congress did not take political decisions on time
कांग्रेस पार्टी के आला दर्जे के नेताओं को पार्टी के मर्ज की दवा का मर्ज समझ में नहीं आ रही है। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि कांग्रेस पिछले कई सालों से अनिर्णय का शिकार हो गई है। इसके चलते पार्टी अपने राजनीतिक अभियान को धार नहीं दे पा रही है।
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गुजरात विधानसभा चुनाव के बाबत पार्टी अभी भी असमंजस में है। यही स्थिति मध्यप्रदेश, हिमाचल, राजस्थान में भी है। सांगठनिक ढांचे में सुधार को लेकर कांग्रेस कोई निर्णय नहीं ले पा रही है। जबकि इसका सीधा असर पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है।
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गुजरात में शंकर सिंह बाघेला का दावा है कि वह अपने नेतृत्व में चुनाव होने पर इस बार बाजी पलट सकते हैं। गुजरात में बापू के नाम से मशहूर बाघेला एक तरह से इसे जीवन की आखिरी राजनीतिक लड़ाई बताते हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी घमासान को देखते हुए कांग्रेस ने गुजरात से किसी को पहले से मुखयमंत्री पद का उम्मीदवार न घोषित करने का मन बनाया है।
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इसके पीछे की एक वजह शक्ति सिंह गोहिल, भरत सिंह सोलंकी भी बताये जा रहे हैं। जबकि इस साल के अंत में राज्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। राज्य के प्रभारी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी कहना है कि पार्टी किसी को भी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर घोषित नहीं करेगी। ऐसे में बाघेला अपनी साख बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसके सामानांतर पार्टी भी उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश कर रही है।

मध्यप्रदेश किसके हाथ होगी कांग्रेस

Congress did not take political decisions on time
मध्यप्रदेश में कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमल नाथ में से किसी एक को चुनना है। दोनों ही नेता राज्य में अपना जनाधार रखते हैं। पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह राज्य में साइलेंट पॉलिटिकल मूव के मास्टर हैं तो कांतिलाल भूरिया भी रेस में हैं।

लेकिन कमलनाथ और ज्योतिरादित्य का पलड़ा अन्य दो नेताओं से काफी भारी है। कमलनाथ जहां लंबे समय से केन्द्रीय राजनीति में सक्रिय है और प्रदेश में ठीकठाक जनाधार रखते हैं, वहीं ज्योतिरादित्य को राजनीति विरासत में मिली है। पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के होमवर्क में भी दो ही नेता आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन दोनों नेताओं में से किसी एक को चुन पाना कांग्रेस के लिए नाको चने चबाने जैसा है।

राजस्थान
मध्यप्रदेश के साथ-साथ अगले साल राजस्थान में भी चुनाव होना है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर वर्ग में पैठ रखते हैं।

गहलोत के अनुसार उनकी भी राजनीति में आखिरी पारी ही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष के होमवर्क में गहलोत भारी भी पड़ रहे हैं, लेकिन सचिन राहुल गांधी के करीबी मित्रों में हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सीपी जोशी भी राहुल की टीम के सदस्य माने जाते हैं।

सीपी जोशी की इच्छा राज्य की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने की है, लेकिन अभी तक वह राज्य की कमान मिलने वालों की श्रेणी में नहीं है। सूत्र बताते हैं कि देर-सबेर पार्टी अशोक गहलोत के चेहरे पर ही राज्य में राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी, लेकिन अभी राज्य के भावी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने का दमखम नहीं जुटा पा रही है।

हिमाचल
हिमाचल में कांग्रेस ने न तो अभी मुख्यमंत्री वीर भद्र सिंह का  विकल्प तैयार किया है और न ही किसी को जिम्मेदारी देने का मन बनाया है। वहीं वीर भद्र सिंह के ऊपर आय से अधिक संपत्ति का मामला तलवार बनकर लटका है।  कांग्रेस अध्यक्ष हिमाचल में हर राजनीतिक गतिविधि पर खुद नजर रख रही है।
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