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कांग्रेस की पराजय: अशोक चव्हाण समिति ने सोनिया गांधी को सौंपी रिपोर्ट, होगी कार्रवाई या खानापूर्ति
Tue, 01 Jun 2021 11:14 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 01 Jun 2021 11:14 PM IST
सार
हाल ही में हुए पांच राज्यों के विस चुनाव में कांग्रेस की पराजय के कारणों की पड़ताल करने वाली अशोक चव्हाण समिति ने मंगलवार को रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंप दी। अब देखना होगा कि किन नेताओं को 'सजा' दी जाएगी।
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Maharashtra Minister & Congress leader Ashok Chavan
- फोटो : ANI
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विस्तार
हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के कारणों का पता लगाने के लिए गठित पांच सदस्यीय समूह ने अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दी है। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम व मौजूदा मंत्री अशोक चव्हाण की अध्ययक्षता में यह समिति गठित की गई थी।
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11 मई को गठित इस समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। बाद में इसे एक सप्ताह का समय और दिया गया। इस समिति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी, विंसेट पाला और लोकसभा सदस्य ज्योति मणि भी शामिल थे।
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इस समिति के गठन के बाद से इसके सदस्यों ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के नेताओं के साथ कई बैठकें कीं। समिति ने संबंधित राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश इकाइयों के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की है तथा उनका फीडबैक भी लिया।
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कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की पिछले दिनों हुई डिजिटल बैठक में सोनिया गांधी ने प्रस्ताव दिया था कि चुनावी नतीजों के कारणों का पता लगाने के लिए एक छोटा समूह गठित किया जाए। इस पर सीडब्ल्यूसी ने अपनी सहमति दी थी।
गौरतलब है कि असम और केरल में सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। वहीं, पश्चिम बंगाल में उसका खाता भी नहीं खुल सका। पुडुचेरी में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा जहां कुछ महीने पहले तक वह सत्ता में थी। तमिलनाडु में उसके लिए राहत की बात रही कि द्रमुक की अगुवाई वाले उसके गठबंधन को जीत मिली।
सोनिया को था इंतजार, एक्शन होगा?
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार था। इससे लगता है कि इस बार कांग्रेस एक्शन के मूड में है। देखना दिलचस्प होगा कि पराजय के लिए चिन्हित कारणों व नेताओं पर कदम उठाए जाएंगे या हार को सामूहिक जिम्मेदारी मानकर इस रिपोर्ट को भी फाइल कर दिया जाएगा।