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महासचिव पद भी विवाद का कारण, कई नेताओं को प्रियंका, वेणुगोपाल और माकन को लेकर है आपत्ति

Wed, 26 Aug 2020 04:04 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 26 Aug 2020 04:04 AM IST
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Congress Crisis, The post of general secretary is also the cause of controversy, many leaders have objections to Priyanka, Gandhi, Venugopal and ajay Maken
Priyanka Gandhi, Kc Venugopal, Ajay Makan - फोटो : PTI

कांग्रेस में लंबे समय से महासचिवों के खाली पड़े पद और हाल में बनाए गए महासचिव भी पार्टी में जारी घमासान का एक बड़ा कारण हैं। तमाम वरिष्ठ नेता महासचिव बनने की प्रतीक्षा में हैं, जबकि केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा और हाल ही में अजय माकन को भी महासचिव बना दिया गया।

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कांग्रेस में अध्यक्ष के बाद महासचिव पद है। कांग्रेस में सक्रिय नेता जानते हैं कि अध्यक्ष की कुर्सी उनके लिए नहीं है। पार्टी में उपाध्यक्ष पद राहुल के लिए बना और उनके अध्यक्ष बनने के बाद उस पद पर कोई नियुक्त नहीं हुआ। कांग्रेस में अभी जो 11 महासचिव उनमें अंबिका सोनी, गुलामनबी आजाद, मुकुल वासनिक, लुई जिन्हो फैलिरो और ओमान चांडी सालों से इस पद पर हैं।
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वेणुगोपाल को राज्यसभा भेजने का भी विरोध
उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत को राहुल ने अध्यक्ष रहते महासचिव बनाकर असम का प्रभार दिया था। गहलोत के राजस्थान का सीएम बनने पर वेणुगोपाल को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद वेणुगोपाल को राज्यसभा भेजने का भी पार्टी में मुखर विरोध हुआ।
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राहुल ने प्रियंका को महासचिव बनाकर यूपी का प्रभार दिया। प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने पर सबकी सहमति होने से विरोध नहीं हुआ। तब ज्योतिरादित्य सिंधिया भी आधे यूपी राज्य के प्रभारी थे। लिहाजा इसे एक प्रयोग के तौर पर देखा गया।

राहुल के फैसले पर उठे सवाल
राजस्थान में सियासी घमासान के बाद वहां के प्रभारी अविनाश पांडेय की छुट्टी कर अजय माकन को प्रभारी महासचिव बना दिया गया। माकन के पास अनुभव है लेकिन उनसे पहले से तमाम वरिष्ठ बारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में उनकी तैनाती को राहुल की पसंद बताकर फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।


राहुल ने अपने कार्यकाल में तमाम राज्यों में अनुभवी नेताओं की जगह युवाओं को प्रभारी बनाया। महासचिव की लाइन में कई विभागों के प्रभारी भी दावा ठोक रहे हैं। उनका तर्क है कि पार्टी में जिम्मेदारी के मुताबिक पद भी मिले क्योंकि संगठनों के प्रभारी न तो महासचिव हैं और न सचिव की श्रेणी में आते हैं।

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