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कांग्रेस का आरोप- घाटे में चलने वाली कंपनियां भाजपा को दे रही मोटा चंदा, मौन हैं जांच एजेंसियां
Thu, 31 Jan 2019 10:32 PM IST
अमित मंडल
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Thu, 31 Jan 2019 10:32 PM IST
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प्रियंका चतुर्वेदी
- फोटो : amar ujala
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राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने वाली कंपनियों के लिए फायदे में होना जरुरी है। इतना ही नहीं, शर्त यह भी है कि वह कंपनी तीन साल से लगातार फायदे में चलनी चाहिये। अगर कोई कंपनी घाटे में है और वह अच्छा-खासा चंदा राजनीतिक दलों को दे रही है तो यह वित्त जांच एजेंसियों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि जांच एजेंसियों इस ओर देख ही नहीं रही हैं। वजह, राजनीतिक दबाव के चलते ये एजेंसियां मौन हैं। दूसरी तरफ, चंदा देने की एवज में उन कंपनियों को जो फायदा मिलता है, वह ज्यादातर बैंकिंग संस्थानों के जरिए पहुंचता है। जैसे, सक्षम न होते हुए भी इन कंपनियों को बड़ा लोन दे दिया जाता है।
बता दें कि इस तरह से राजनीतिक फंडिंग के अनेक मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ताजा मामला भाजपा को मिले कथित चंदे का है। कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे गौरख धंधे की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि इस तरह के गोलमाल पर न ईडी, न सेबी और न ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का ध्यान जा रहा है।भाजपा के दबाव में वित्तीय संस्थाएं ऐसे मामलों को स्टेप डाउन कर जाती हैं। आरोप है कि इस राजनीतिक दल की एक शैल कंपनी आरके डेवलेपर है। साथ ही स्किल रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड और दर्शन डेवलेपर प्राइवेट लिमिटेड भी ऐसी ही कंपनी हैं।इन्होंने सेक्शन 182 के अंतर्गत भाजपा को कथित तौर पर 20 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। इसी सेक्शन में ये प्रावधान है कि जो कंपनी राजनीतिक फंडिंग करती है, उसे तीन साल तक प्रोफ़िट मेकिंग कंपनी यानी लाभ में चलने वाला उद्योग, होना जरुरी है।बैलेंस शीट बताती है कि आरके डेवलेपर को 2012-13 में करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। स्किल रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, जिसने भाजपा को 2 करोड़ का चंदा दिया है, वह भी लॉस मेकिंग कंपनी बताई गई है। चतुर्वेदी के मुताबिक, हैरानी की बात ये है कि इन तीनों कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट में यह तक नहीं बताया है कि उन्होंने भाजपा को चंदा दिया है।मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर की 2017-18 की रिपोर्ट में यह सब जानकारी सार्वजनिक है।
चंदा देने वाली ये कंपनियां सरकार से कैसे फायदे लेती हैं
कांग्रेस की महिला नेता का आरोप है कि भाजपा ने चंदा जुटाने का यह एक नया मॉडल तैयार किया है। पार्टी की रणनीति यह है कि जो कंपनी चंदा देगी, उसे मनमाना धंधा करने का पूरी छूट मिलेगी।इस खेल में जनता के 31 हजार करोड़ रुपए दाव पर लग गए हैं।बैंक के माध्यम से इन कंपनियों को योग्यता पूरी न होते हुए भी बड़ी लोन राशि दिला दी जाती है। बाद में वह राशि वापस बैंक को मिलती है, इसमें संदेह है। प्राइवेट नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कॉरपोरेशन ‘दिवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड’ भी एक ऐसी ही कंपनी है।स्लम रिहैबिलिटेशन और स्लम डेवलपमेंट की आड़ में इस कंपनी के महाराष्ट्र में कई प्रोजेक्ट चलते हैं। इनकी आड़ में कंपनी ने 32 देशों के बैंकों से पैसा लिया है।करीब 9,000 करोड़ रुपए के कैपिटल वाली कंपनी का 98,000 करोड़ रुपए का बैंकिंग एक्सपोजर है।इसमें एसबीआई से लिया गया 11,000 करोड़ रुपये का लोन भी शामिल है।बैंक ऑफ बड़ौदा से भी करीब 4,000 करोड़ रुपए का लोन लिया हुआ है।98,000 करोड़ रुपए में से करीब 31,000 करोड़ रुपए का गबन है।इसके लिए 45 शैल कंपनी बनाई गई।इन कंपनियों में एक ही डायरेक्टर, एक जैसे ईमेल एड्रेस, वैसे ही कॉरपोरेट एड्रेस और यहां तक कि ऑडिटर भी एक ही हैं।
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केंद्र सरकार को देना चाहिये इन सवालों का जवाब: कांग्रेस पार्टी
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से कई सवालों का जवाब मांगा है। उनका कहना है कि सरकार बताए, किस तरीके से पैसे का लेन-देन हुआ है।मार्केट से कितना पैसा उठाया गया, अनसिक्योर लोन कितना दिया गया और बिना कोई जांच पड़ताल किए लोन दे दिया गया। उन्होंने आरबीआई, एसबीआई और मिनिस्ट्री ऑफ फाईनेंस पर भी सवाल उठाया है। पैसा कहां गया है, किस पर खर्च हुआ है, सम्बंधित जाँच एजेन्सी इसकी कोई पड़ताल नहीं करती।केंद्र सरकार आरबीआई पर दिन रात यह दबाव बना रही है कि ऐसे एनबीएफसी को ज़्यादा से ज़्यादा पैसा दे।सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है कि ये एनबीएफसी कैसे कार्य करती हैं, मनमानी शैल कंपनी बनाती हैं और हवाला कारोबार भी जमकर होता है। प्रियंका के मुताबिक़, चंदा देने के बाद इन कंपनियों को मनमर्ज़ी करने की छूट मिल जाती है।
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बता दें कि इस तरह से राजनीतिक फंडिंग के अनेक मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ताजा मामला भाजपा को मिले कथित चंदे का है। कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे गौरख धंधे की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि इस तरह के गोलमाल पर न ईडी, न सेबी और न ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का ध्यान जा रहा है।भाजपा के दबाव में वित्तीय संस्थाएं ऐसे मामलों को स्टेप डाउन कर जाती हैं। आरोप है कि इस राजनीतिक दल की एक शैल कंपनी आरके डेवलेपर है। साथ ही स्किल रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड और दर्शन डेवलेपर प्राइवेट लिमिटेड भी ऐसी ही कंपनी हैं।इन्होंने सेक्शन 182 के अंतर्गत भाजपा को कथित तौर पर 20 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। इसी सेक्शन में ये प्रावधान है कि जो कंपनी राजनीतिक फंडिंग करती है, उसे तीन साल तक प्रोफ़िट मेकिंग कंपनी यानी लाभ में चलने वाला उद्योग, होना जरुरी है।बैलेंस शीट बताती है कि आरके डेवलेपर को 2012-13 में करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। स्किल रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, जिसने भाजपा को 2 करोड़ का चंदा दिया है, वह भी लॉस मेकिंग कंपनी बताई गई है। चतुर्वेदी के मुताबिक, हैरानी की बात ये है कि इन तीनों कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट में यह तक नहीं बताया है कि उन्होंने भाजपा को चंदा दिया है।मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर की 2017-18 की रिपोर्ट में यह सब जानकारी सार्वजनिक है।
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चंदा देने वाली ये कंपनियां सरकार से कैसे फायदे लेती हैं
कांग्रेस की महिला नेता का आरोप है कि भाजपा ने चंदा जुटाने का यह एक नया मॉडल तैयार किया है। पार्टी की रणनीति यह है कि जो कंपनी चंदा देगी, उसे मनमाना धंधा करने का पूरी छूट मिलेगी।इस खेल में जनता के 31 हजार करोड़ रुपए दाव पर लग गए हैं।बैंक के माध्यम से इन कंपनियों को योग्यता पूरी न होते हुए भी बड़ी लोन राशि दिला दी जाती है। बाद में वह राशि वापस बैंक को मिलती है, इसमें संदेह है। प्राइवेट नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कॉरपोरेशन ‘दिवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड’ भी एक ऐसी ही कंपनी है।स्लम रिहैबिलिटेशन और स्लम डेवलपमेंट की आड़ में इस कंपनी के महाराष्ट्र में कई प्रोजेक्ट चलते हैं। इनकी आड़ में कंपनी ने 32 देशों के बैंकों से पैसा लिया है।करीब 9,000 करोड़ रुपए के कैपिटल वाली कंपनी का 98,000 करोड़ रुपए का बैंकिंग एक्सपोजर है।इसमें एसबीआई से लिया गया 11,000 करोड़ रुपये का लोन भी शामिल है।बैंक ऑफ बड़ौदा से भी करीब 4,000 करोड़ रुपए का लोन लिया हुआ है।98,000 करोड़ रुपए में से करीब 31,000 करोड़ रुपए का गबन है।इसके लिए 45 शैल कंपनी बनाई गई।इन कंपनियों में एक ही डायरेक्टर, एक जैसे ईमेल एड्रेस, वैसे ही कॉरपोरेट एड्रेस और यहां तक कि ऑडिटर भी एक ही हैं।
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केंद्र सरकार को देना चाहिये इन सवालों का जवाब: कांग्रेस पार्टी
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से कई सवालों का जवाब मांगा है। उनका कहना है कि सरकार बताए, किस तरीके से पैसे का लेन-देन हुआ है।मार्केट से कितना पैसा उठाया गया, अनसिक्योर लोन कितना दिया गया और बिना कोई जांच पड़ताल किए लोन दे दिया गया। उन्होंने आरबीआई, एसबीआई और मिनिस्ट्री ऑफ फाईनेंस पर भी सवाल उठाया है। पैसा कहां गया है, किस पर खर्च हुआ है, सम्बंधित जाँच एजेन्सी इसकी कोई पड़ताल नहीं करती।केंद्र सरकार आरबीआई पर दिन रात यह दबाव बना रही है कि ऐसे एनबीएफसी को ज़्यादा से ज़्यादा पैसा दे।सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है कि ये एनबीएफसी कैसे कार्य करती हैं, मनमानी शैल कंपनी बनाती हैं और हवाला कारोबार भी जमकर होता है। प्रियंका के मुताबिक़, चंदा देने के बाद इन कंपनियों को मनमर्ज़ी करने की छूट मिल जाती है।