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पेट्रोल-डीजल कीमतों पर कांग्रेस का हमलाः पार्टी ने कहा- तेल कीमतों पर चार कदम आगे जाकर दो कदम पीछे खींच रही सरकार
Sun, 22 May 2022 08:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 22 May 2022 08:07 PM IST
सार
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि सरकार तेल कीमतों के बारे में चार कदम आगे जाकर दो कदम पीछे खींचने की रणनीति अपना रही है। दो कदम पीछे खींचने को वह जनता के लिए बड़ी राहत करार दे रही है, जबकि धीरे-धीरे दाम बढ़ाने पर उसने चुप्पी साध रखी है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Pixabay
विस्तार
केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर जनता को राहत दी है। पेट्रोल कीमतों में करीब साढ़े नौ रुपये और डीजल पर सात रुपये की कटौती को बड़ी राहत बताया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस ने इसे सरकार के आंकड़ों की बाजीगरी बताया है। पार्टी ने कहा है कि सरकार ने केवल दो महीनों में पचास पैसे, अस्सी पैसे लगातार बढ़ाकर कुल दस रूपयों की बढ़ोतरी की और अब 9.50 रुपये की कमी को बड़ी कटौती बता रही है, जबकि इसके बाद भी सच्चाई है कि सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर दो महीने पहले की कीमतों की तुलना में भी 50 पैसे ज्यादा कमा रही है।
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कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि सरकार तेल कीमतों के बारे में चार कदम आगे जाकर दो कदम पीछे खींचने की रणनीति अपना रही है। दो कदम पीछे खींचने को वह जनता के लिए बड़ी राहत करार दे रही है, जबकि धीरे-धीरे दाम बढ़ाने पर उसने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कमी के बाद भी पहले की तुलना में पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा कमाई कर रही है। उसे इस कमी को वापस लेना चाहिए।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी को बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है, जबकि इसी बीच सीएनजी की कीमतों में प्रति किलोग्राम दो रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। केवल दो महीने के बीच गैस की कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन इस पर सरकार ने अब तक चुप्पी साध रखी है। जबकि जनपरिवहन और निजी वाहनों में उपयोग के कारण इसका बड़ी आबादी पर असर पड़ रहा है।
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कांग्रेस नेता ने कहा है कि कीमतों में कमी के बाद भी ये नई कीमतें मार्च 2022 के स्तर पर आ गई हैं। लेकिन यह पूछा जाना चाहिए कि क्या तेल कीमतों के उस स्तर पर जनता खुश थी। उन्होंने कहा कि जनता तब भी तेल कीमतों की महंगाई से परेशान थी और इस कमी के बाद भी परेशान है। लिहाजा सरकार को इसे कीमतों में कमी बताने की बजाय बढ़ी कीमतों को कम करने पर विचार करना चाहिए।