कर्नाटक: येदियुरप्पा सरकार ने जीता विश्वास प्रस्ताव, विपक्ष ने नहीं की मत विभाजन की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Updated Mon, 29 Jul 2019 11:52 AM IST
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कर्नाटक में भाजपा सरकार का शक्ति परीक्षण
कर्नाटक में भाजपा सरकार का शक्ति परीक्षण - फोटो : ANI

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कर्नाटक का सियासी नाटक पर फिलहाल विराम लग गया है। येदियुरप्पा सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया है। इसके लिए आवाज के द्वारा वोटिंग हुई। इस दौरान सदन में भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई। विपक्ष ने मत विभाजन की मांग नहीं की।
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इस बीच सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि प्रदेश में सूखा पड़ा है। मैं किसानों को संबोधित करना चाहता हूं। मैंने राज्य की ओर से पीएम किसान योजना के तहत लाभार्थियों को 2000 रुपये की 2 किस्तें देने का फैसला किया है। मैं विपक्ष से अपील करता हूं कि हमें मिलकर काम करना चाहिए। मैं सदन से अपील करता हूं कि वे मुझ पर एकमत से विश्वास व्यक्त करें।
वहीं सिद्धारमैया ने सरकार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मैं उन परिस्थितियों के बारे में बोल सकता था जिसके तहत येदियुरप्पा सीएम बने। मैं उनके अच्छे भविष्य की कामना करता हूं और उनके इस आश्वासन का स्वागत करता हूं कि वह लोगों के लिए काम करेंगे।

रविवार को राज्य विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश ने दल बदल कानून के तहत कांगेस-जेडीएस के 14 और बागी विधायकों को अयोग्य करार दे दिया है। यह कार्रवाई तब की गई, जब कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले बीएस येदियुरप्पा को सोमवार को सदन में बहुमत साबित करना है। इससे पहले बीते बृहस्पतिवार को 3 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था। 

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले से येदियुरप्पा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार को सदन में कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि 17 विधायकों (14 कांग्रेस और 3 जेडीएस) की अयोग्यता के साथ 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या अब 207 हो जाएगी। यानी अब बहुमत के लिए भाजपा सरकार को 104 सदस्यों का समर्थन चाहिए। जबकि एक निर्दलीय के साथ आने से भाजपा के पास 106 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के विधायकों की संख्या अब 66 (एक नामित भी शामिल), जेडीएस की 34 ही रह गई है।
 
दरअसल, अरसे से चल रहे कर्नाटक के सियासी नाटक में मंगलवार को उस वक्त मोड़ गया आ था, जब सदन में विश्वास मत परीक्षण के दौरान कुल 20 विधायक जिसमें 17 बागी विधायकों के अलावा कांग्रेस, बसपा के 1-1 विधायक और एक निर्दलीय विधायक अनुपस्थित रहे थे। इसके चलते 14 माह पुरानी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई थी। विश्वास मत परीक्षण में कुमारस्वामी के पक्ष में 99 और भाजपा के पक्ष में 105 वोट पड़े थे।
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