केंद्रीय अर्धसैनिक बल: जब पेंशन खत्म हुई तो किसी डीजी ने नहीं किया विरोध, न जीएसटी से दी छूट, न ही मिली 100 दिनों की छुट्टी
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलौत को अपना मांग पत्र सौंपा है। इससे पहले केंद्र में इसी तरह के दर्जनों ज्ञापन दिए जा चुके हैं। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है, केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा सरहदों के वास्तविक चौकीदारों को पुरानी पैंशन से वंचित रखना दुर्भाग्य के समान है...
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की दर्जनभर मांगों को लेकर राष्ट्रपति, राज्यपालों व केंद्रीय मंत्रियों को ज्ञापन दिया गया है, मगर अभी तक कहीं से कोई सकारात्मक पहल की खबर नहीं आई। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि जब इन बलों में पेंशन खत्म की गई तो किसी भी फोर्स के तत्कालीन आईपीएस डीजी ने उसका विरोध नहीं किया। इतना ही नहीं, जिस तरह से आर्मी कैंटीन को जीएसटी से छूट प्रदान की गई है, वैसे ही इन बलों की कैंटीन को भी छूट देने के लिए दर्जनों बार गुहार लगाई गई, मगर किसी भी डीजी ने साथ नहीं दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भलाई के नाम पर बने पुनर्वास एवं कल्याण बोर्ड, पूर्व अर्धसैनिकों के साथ स्पष्ट रूप से छलावा है। यहां तक कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जवानों को एक साल में सौ दिन की छुट्टी देने की घोषणा पर भी अमल नहीं हो सका। केंद्र व राज्यों सरकारों द्वारा अर्धसैनिक बलों के प्रति किए जा रहे सौतेले व्यवहार व घोर उपेक्षा के खिलाफ 14 फरवरी को राजघाट पर विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों पूर्व अर्धसैनिक भाग लेंगे।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति के जरिए आने वाले आईपीएस, आईजी या उससे ऊपर के पदों पर ही आना पसंद करते हैं। सीबीआई में आईपीएस एसपी के लिए स्वीकृत 60 पदों में से 35 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में आईपीएस एसपी के लिए 83 पद मंजूर किए गए हैं। अभी चालीस पद खाली पड़े हैं। सीएपीएफ में आईपीएस डीआईजी के लिए 251 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 171 पद खाली हैं। सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ में आईपीएस डीआईजी के 38 पद हैं। जब आईपीएस ने ज्वाइन नहीं किया, तो अस्थायी तौर पर 30 पद कैडर अधिकारियों को दे दिए गए। इसी तर्ज पर बीएसएफ में काम चलाया जा रहा है। इस बल में भी 26 डीआईजी के पद हैं, जिनमें से 15 पद 31 दिसंबर तक कैडर अधिकारियों को दिए गए हैं। यहां भी आईपीएस नहीं आना चाहते।
100 दिनों की छुट्टी साबित हुई अब जुमला
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलौत को अपना मांग पत्र सौंपा है। इससे पहले केंद्र में इसी तरह के दर्जनों ज्ञापन दिए जा चुके हैं। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है, केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा सरहदों के वास्तविक चौकीदारों को पुरानी पैंशन से वंचित रखना दुर्भाग्य के समान है। इन बलों में कैडर अधिकारियों की बजाए आईपीएस अधिकारियों को जबरदस्ती डीजी पद पर लगाया जा रहा है। इनका पैरामिलिट्री जवानों के वेलफेयर से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी बल के डीजी ने 2004 में पेंशन खत्म करने का विरोध नहीं किया। पिछले पांच वर्षों से सीपीसी कैंटीन, जीएसटी के चलते बाजार भाव पर आ गई है, लेकिन किसी डीजी ने गृहमंत्री या वित्तमंत्री के सामने जीएसटी छूट को लेकर रोष व्यक्त नहीं किया।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा, केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 100 दिन की छुट्टी देने की घोषणा, अब जुमला साबित हो रही है। कम छुट्टियों के चलते आए दिन जवान आत्महत्या कर रहे हैं। सांसद विवेक नारायण शेजवलकर के नेतृत्व में पूर्व अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री ने मिलने का समय मांगा था। मुलाकात का वक्त दिया गया, मगर केंद्रीय गृह मंत्री मिले नहीं। यह सरहदी चौकीदारों का घोर अपमान है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पिछले एक दशक के दौरान 81,000 जवानों ने स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया है। वर्ष 2011 से 2020 तक 16 हजारों जवानों ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। एक सिपाही को भर्ती करने से लेकर उसकी ट्रेनिंग और उसे ड्यूटी देने तक सरकार का 15 से 20 लाख रुपये खर्च हो जाता है। इतनी भारी संख्या में जवानों का समय से पहले रिटायरमेंट ले लेना या नौकरी से त्यागपत्र दे देना, इसके पीछे कई बड़े कारण रहे हैं। इससे डीजी को कोई मतलब नहीं है।
केंद्र में किसी भी सरकार ने 'सीएपीएफ' की दिक्कतों को करीब से जानने की जरूरत नहीं समझी। रणबीर सिंह का कहना है कि आईपीएस लॉबी का कैडर अफसरों के प्रति सौतेला व्यवहार जगजाहिर है। कैडर रिव्यू में निचले स्तर के फॉलोअर्स रैंक से लेकर निरीक्षक रैंक तक के कमेरा वर्ग की अनदेखी की जा रही है। उच्च स्तर के एडीजी, आईजी, डीआईजी व कमांडेंट आदि पदों की बेहिसाब वृद्धि हो रही है। कंपनी व बटालियन में कार्यरत सिपाहियों के पदों में कमी करना, ये सब बातें जवानों का मोह भंग करने के लिए पर्याप्त हैं।