सपा-बसपा गठबंधन पर मुख्यमंत्री योगी बोले- सांप और छछूंदर जैसी है दोस्ती
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की दोस्ती पर चुटकी ली है। उन्होंने गोरखपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज फिर दोनों (बीएसपी और सपा) के गठबंधन की बातें सुनने को मिल रही हैं। ऐसा तब होता है जब तूफान आने पर सांप और छछूंदर एकसाथ मिल जाते हैं।
बता दें कि इससे पहले सीएम योगी ने इस गठबंधन पर कहा था कि गोरखपुर व फूलपुर में लोकसभा उपचुनाव को लेकर उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। दोनों सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार भारी अतंर से जीतेंगे। गौरतलब है कि उत्तर यूपी के फूलपुर और गोरखपुर सीट पर उपचुनाव होना है। इनमें गोरखपुर सीट उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की है, जबकि फूलपुर सीट उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की है। राज्य में इन्हीं दोनों सीटों पर उपचुनाव होना है। मालूम हो कि रविवार (4 मार्च) को बसपा ने सपा के उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा की थी।
Aaj phir dono (BSP & SP) ke gathhbandhan ki baatein sunne mein aa rahi hain. Aisa lagta hai jaise koi toofan aata hai toh saanp aur chuchundar ek saath milke khade ho jaate hain. Inki yeh sthiti aa chuki hai: UP Chief Minister Yogi Adityanath during a public rally in Gorakhpur pic.twitter.com/IIEmL3fMCj
विज्ञापन विज्ञापन— ANI UP (@ANINewsUP) March 5, 2018
बता दें कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को बसपा के समर्थन देने की घोषणा के बाद फूलपुर उप चुनाव के सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं। यहां करीब तीन लाख वोट बसपा के माने जाते हैं। बसपा के तटस्थ रहने पर उसके वोटों में सभी दल सेंध लगाते लेकिन बसपा सुप्रीमो के आह्वान के बाद अब इन्हें बांटना आसान नहीं होगा। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम, यादव और अन्य पिछड़ी जातियों के वोटों के साथ बसपा के वोटों को अपने खाते में जोड़ने के लिए जोर लगाएगी।
फूलपुर में सपा, बसपा का मजबूत जनाधार
2014 के लोकसभा और पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव छोड़ दिए जाएं तो फूलपुर क्षेत्र में सपा और बसपा का मजबूत जनाधार रहा है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में 2014 में पहली बार कमल खिला था। इससे पहले 2009 के चुनाव में बसपा के कपिल मुनि करवरिया इस क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। इससे पहले 2004 में सपा के अतीक अहमद तो 1999 में धर्मराज पटेल विजयी हुए थे। इससे पहले 1996 और 1998 में सपा के ही जंगबहादुर पटेल लगातार दो बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इससे पहले 1989 के चुनाव में भी जनता दल के टिकट पर रामपूजन पटेल विजयी हुए थे। पिछले चुनाव में भी सपा दूसरे तथा बसपा तीसरे स्थान पर रही। ऐसे में सपा उम्मीदवार को बसपा के समर्थन से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।