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सीएम उद्धव ठाकरे ने एमएलसी पद की शपथ ली, राज्यपाल से की मुलाकात
Mon, 18 May 2020 07:00 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Mon, 18 May 2020 07:00 PM IST
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सीएम उद्धव ठाकरे ने एमएलसी के रूप में शपथ लेने के बाद राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की
- फोटो : Twitter
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को एमएलसी के रूप में शपथ लेने के बाद राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। इस दौरान सीएम ठाकरे के साथ उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे के साथ मुख्य सचिव अजोय मेहता भी मौजूद थे।
इससे पहले दिन में, सीएम उद्धव ठाकरे ने दक्षिण मुंबई के विधान भवन में आयोजित एक समारोह में विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनके साथ आठ अन्य लोगों ने भी एमएलसी के रूप शपथ ली। इन सभी नेताओं को परिषद के अध्यक्ष रामराजे नाईक निंबालकर ने शपथ दिलाई।
बता दें कि जब उद्धव ठाकरे एक भी सदन के सदस्य नहीं थे, तब राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की तरफ से दो मौकों पर उन्हें एमएलसी के रूप में नामित करने की सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की थी।
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दरअसल, पिछले साल नवंबर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले उद्धव ठाकरे न तो विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत उन्हें पद पर बने रहने के लिए 28 मई तक (6 महीने) विधायक या एमएलसी बनना जरूरी था। आसान भाषा में समझें तो उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और इस हिसाब से 28 मई तक उनका विधायक बनना जरूरी था। लेकिन मुश्किल यह थी कि कोरोना वायरस के चलते सभी सियासी गतिविधियां थमी हुई थीं।
सीएम उद्धव ठाकरे और आठ अन्य 14 मई को निर्विरोध चुने गए थे।
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इससे पहले दिन में, सीएम उद्धव ठाकरे ने दक्षिण मुंबई के विधान भवन में आयोजित एक समारोह में विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनके साथ आठ अन्य लोगों ने भी एमएलसी के रूप शपथ ली। इन सभी नेताओं को परिषद के अध्यक्ष रामराजे नाईक निंबालकर ने शपथ दिलाई।
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बता दें कि जब उद्धव ठाकरे एक भी सदन के सदस्य नहीं थे, तब राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की तरफ से दो मौकों पर उन्हें एमएलसी के रूप में नामित करने की सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की थी।
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दरअसल, पिछले साल नवंबर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले उद्धव ठाकरे न तो विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत उन्हें पद पर बने रहने के लिए 28 मई तक (6 महीने) विधायक या एमएलसी बनना जरूरी था। आसान भाषा में समझें तो उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और इस हिसाब से 28 मई तक उनका विधायक बनना जरूरी था। लेकिन मुश्किल यह थी कि कोरोना वायरस के चलते सभी सियासी गतिविधियां थमी हुई थीं।
सीएम उद्धव ठाकरे और आठ अन्य 14 मई को निर्विरोध चुने गए थे।