{"_id":"667bc16a81926e86b90b0f36","slug":"cm-stalin-says-tamil-nadu-assembly-to-adopt-resolution-to-urge-the-centre-for-caste-based-census-2024-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"TN: तमिलनाडु में जातीय गणना की मांग ने पकड़ा जोर, CM स्टालिन बोले- केंद्र से इसके लिए करेंगे अनुरोध","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
TN: तमिलनाडु में जातीय गणना की मांग ने पकड़ा जोर, CM स्टालिन बोले- केंद्र से इसके लिए करेंगे अनुरोध
Wed, 26 Jun 2024 12:51 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 26 Jun 2024 12:51 PM IST
सार
पट्टाली मक्कल काची के नेता जीके मणि को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि वन्नियारों के लिए अलग आरक्षण लागू तभी संभव हो पाएगा, जब जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी।
विज्ञापन
एमके स्टालिन
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सहयोगियों सहित राज्य के राजनीतिक दल सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य में जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे हैं। इसी बीच सोमवार को स्टालिन ने कहा कि सरकार विधानसभा के मौजूदा सत्र में एक प्रस्ताव लाएगी, जिसमें केंद्र से आम जनगणना के साथ-साथ जाति आधारित जनगणना कराने की आग्रह करेगी।
विज्ञापन
पीएमकी की मांग पर बोले स्टालिन
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के नेता जीके मणि, जिन्होंने वन्नियारों के लिए अलग आरक्षण लागू करने की मांग की थी, को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति आधारित जनगणना कराने के बाद ही यह संभव होगा। साथ ही उन्होंने मणि को याद दिलाया कि उनकी पार्टी पीएमके केंद्र में भाजपा के सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा थी।
विज्ञापन
स्टालिन ने कहा कि बिहार में भी जातिवार जनगणना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि वन्नियारों के लिए आरक्षण का एक अच्छा समाधान तभी निकाला जा सकता है, जब आम जनगणना के साथ जाति आधारित जनगणना की जाए। उन्होंने कहा, 'हमने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है जिसमें केंद्र से जनगणना कराने का अनुरोध किया जाएगा।'
विज्ञापन
जल्दबाजी में पेश किया गया था...
मणि ने कहा कि राज्य सरकार वन्नियारों के लिए आरक्षण को उसी तरह लागू कर सकती है, जैसा कि उसने मुसलमानों के लिए किया था (आंतरिक रूप से पिछड़ा वर्ग श्रेणी के चलते हुए)। इस पर कानून मंत्री एस. रघुपति ने कहा कि वन्नियारों के लिए 10.5 फीसदी आंतरिक आरक्षण को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने रद्द कर दिया था क्योंकि इसे उचित आंकड़े और सबूत के बिना जल्दबाजी में पेश किया गया था।
उन्होंने कहा कि डीएमके सरकार ने न्यायमूर्ति भारतीदासन की अध्यक्षता वाली पिछड़ा वर्ग आयोग समिति को कार्यक्षेत्र दिया है और वह शिक्षा एवं रोजगार पर आंकड़े भी एकत्र कर रही है। उन्होंने कहा, 'लेकिन आर्थिक और सामाजिक स्थिति का विवरण केवल जाति आधारित जनगणना के माध्यम से एकत्र किया जा सकता है।'
डीएमके को वन्नियार विरोधी पार्टी दिखाने की साजिश
परिवहन मंत्री एसएस शिवशंकर ने आरोप लगाया कि पीएमके ने डीएमके को वन्नियार विरोधी पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश की, जबकि यह दिवंगत मुख्यमंत्री एम करुणानिधि थे, जिन्होंने तमिलनाडु में सबसे पिछड़े वर्गों (एमबीसी) के लिए 20 फीसदी आरक्षण लागू किया था। उन्होंने कहा, पीएमके ने एक राजनीतिक दल के साथ गठबंधन किया, जिसने आरक्षण के लिए प्रदर्शन के दौरान वनियारों को गौरैया की तरह मार डाला।