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किच्छा से चुनाव लड़ना सीएम रावत का बहाना, असली 9 सीटों पर निशाना

Wed, 25 Jan 2017 06:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 25 Jan 2017 06:29 PM IST
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CM Rawat's excuse : want to contest on Kichha seat,but the real target is 9 seats .
सीएम हरीश रावत के उतरने से सीट पर रोचक मुकाबला हो गया है। यहां भाजपा प्रत्याशी राजेश शुक्ला से उनकी टक्कर रहेगी। किच्छा में सीएम के उतरने का महत्व सीट से अधिक जनपद की नौ सीटों पर कमजोर स्थिति को लेकर भी देखा जा रहा है। सीएम हरीश रावत पार्टी का घोषित चुनावी चेहरा हैं।
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उन्हें दो सीटों हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से उम्मीदवार बनाया गया है ताकि पार्टी हरिद्वार और यूएस नगर में दूसरी सीटों पर उनके प्रभामंडल का फायदा ले सकें।  सियासी जानकार इसे गढ़वाल और कुमाऊं में संतुलन बिठाने  की कवायद के तौर पर भी देख रहे हैं।
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CM Rawat's excuse : want to contest on Kichha seat,but the real target is 9 seats .
सीएम का फोकस किच्छा के साथ ही गदरपुर, सितारगंज और रुद्रपुर की सीट पर भी रहेगा। उनका कद इन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे अपने प्रत्याशियों के कद को भी बड़ा कर सकता हैं। इसके साथ ही पार्टी में अंदरखाने नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं को मनाने में भी सीएम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

अगर विधानसभा की इन चारों सीटों पर हरदा द्वारा चलाए गए तीर सटीक निशाने पर बैठ गए और नाराज कार्यकर्ताओं को भी उन्होंने अपने वश में कर लिया तो इससे भाजपाइयों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।

परिसीमन के बाद रुद्रपुर से अलग किच्छा विस सीट बनी थी। वर्ष 2007 में नई सीट पर पहले ही चुनाव में भाजपा ने कब्जा जमाया। भाजपा के राजेश शुक्ला ने आठ हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। कांग्रेस प्रत्याशी 25 हजार से कुछ अधिक मतों पर ही ठिठक गए थे।

CM Rawat's excuse : want to contest on Kichha seat,but the real target is 9 seats .
मुख्यमंत्री के किच्छा से चुनाव लड़ने का दूसरा सबसे बड़ा असर तराई-भावर की कई सीटों पर पड़ेगा। सीएम तराई की नौ विस सीटों के साथ ही लालकुआं, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढुंगी तक सीधे चुनाव नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।

इन सीटों के कांग्रेस प्रत्याशियों को इससे फायदा होगा। इस सीट से चुनाव लडने से कुमाऊं के मतदाताओं को भी कांग्रेस के पक्ष में साधा जा सकेगा। किच्छा विस क्षेत्र में ही पर्वतीय मूल के मतदाताओं की खासी तादाद है। यहां पर्वतीय मूल के 15 हजार से अधिक मतदाता हैं।

ये मतदाता सीधे तौर पर मंडल में पांच जिलों की विधानसभा सीटों के मूल निवासी हैं। इनके भीतर पर्वतीय विस क्षेत्रों में समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता है।
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