तेलंगाना चुनाव में टीआरएस-भाजपा के निशाने पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री
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तेलंगाना में अगले महीने विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पर अपना गढ़ बचाने की चुनौती है तो कांग्रेस और भाजपा मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने के लिए ताबड़तोड़ रैलियां कर रही हैं।
तेलंगाना में टीआरएस का सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा से है, लेकिन टीआरएस व भाजपा के निशाने पर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनकी पार्टी टीडीपी है। 119 सदस्यीय विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे।
टीडीपी पर हमलावर टीआरएस
कांग्रेस का तेलंगाना में टीडीपी और दूसरे छोटे दलों के साथ गठबंधन है। इसलिए कांग्रेस चंद्रबाबू को निशाना नहीं बना रही, लेकिन टीआरएस और भाजपा अपनी चुनावी रैलियों में सीधे तौर पर चंद्रबाबू पर हमला बोल रही हैं। दोनों दलों के नेता आरोप लगा रहे हैं कि अगर कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन जीतता है तो तेलंगाना में चंद्रबाबू नायडू की कठपुतली सरकार होगी, जो उनके इशारे पर काम करेगी।
आरोप का बचाव करते हुए कांग्रेस का कहना है कि विभाजनकारी और विनाशकारी राजनीति को खत्म करने के लिए उसने तेदेपा के साथ हाथ मिलाया है। आंध्र प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बने तेलंगाना में पिछली बार की तरह इस बार भी राज्य बंटवारे का मुद्दा जोर-शोर से उठ रहा है। टीआरएस इसके बहाने टीडीपी पर हमलावर है।
सीट बंटवारे की घोषणा 9 नवंबर तक : कांग्रेस
तेलंगाना में महागठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस का कहना है कि 9 नवंबर तक सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। तेलंगाना में कांग्रेस के प्रभारी आरसी खुंटिया ने बताया कि गठबंधन में शामिल सभी पार्टियों के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। अगले चार से पांच दिन में इसकी घोषणा की जाएगी।
खुंटिया ने कहा कि सीट बंटवारे में किसी तरह की अड़चन नहीं है। सत्तारूढ़ टीआरएस से मुकाबले के लिए कांग्रेस, टीडीपी, भाकपा और तेलंगाना जनसमिति ने महागठबंधन बनाया है।