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बंगाल: सीएम ममता ने की 16 अगस्त को हर साल 'खेला होबे दिवस' मनाने की घोषणा, भाजपा ने किया कटाक्ष
Thu, 22 Jul 2021 02:34 PM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Thu, 22 Jul 2021 02:34 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हर साल 16 अगस्त को 'खेला होबे दिवस' मनाने की घोषणा पर भाजपा नेता स्वप्न दासगुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस दिन की तुलना डायरेक्ट एक्शन डे के साथ की।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी
- फोटो : PTI
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विस्तार
भाजपा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हर साल 16 अगस्त को 'खेला होबे दिवस' मनाने की घोषणा पर तंज कसा है। दरअसल, भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की इस घोषणा के बाद कटाक्ष करते हुए कहा, 'काफी रोचक बात है कि ममता बनर्जी ने 16 अगस्त को खेला होबे दिवस घोषित किया है। यह वही दिन है, जब मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन डे शुरू किया था और कोलकाता में 1946 में ग्रेट कलकत्ता किलिंग शुरू हुआ था।’
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भाजपा के खिलाफ नारे का इस्तेमाल
उन्होंने आगे कहा, 'खेला होबे' के नारे का इस्तेमाल भाजपा के खिलाफ आतंक पैदा करने के लिए किया जा रहा है। ममता ने 16 अगस्त के दिन को चुना है, यह दिन पश्चिम बंगाल के इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि मुस्लिम लीग ने 1946 में डायरेक्ट किलिंग शुरू की थी और परिणामस्वरूप, कई लोग मारे गए थे। मैं समझता हूं कि उनकी कोई ऐतिहासिक स्मृति नहीं है। उन्होंने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए इस दिन को कैसे चुना, जिसे इस देश के लोग कभी स्वीकार नहीं करेंगे?
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दासगुप्ता ने कहा, ‘खेला होबे क्या है? यह आतंक पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नारा है, खासकर भाजपा के खिलाफ, जिसमें संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। इसके परिणामस्वरूप कई लोग बेघर हो जाते हैं, जिसमें 50 से अधिक राजनीतिक हत्याएं की जाती हैं।’
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खतरे में आजाद!
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कहा था, ‘खेला सभी राज्यों में तब तक होगा जब तक कि भाजपा को देश से हटा नहीं दिया जाता। हम 'खेला दिवस' मनाएंगे। 16 अगस्त को हम गरीब बच्चों को फुटबॉल देंगे। आज, हमारी आजादी दांव पर है। भाजपा ने हमारी आजादी को खतरे में डाल दिया है। उन्हें अपने ही मंत्रियों और दुरुपयोग एजेंसियों पर भरोसा नहीं है।’
इधर, 2024 के विधानसभा चुनावों में अन्य राजनीतिक दलों के साथ आने के बनर्जी के अनुरोध पर भी दासगुप्ता ने अपीन प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी को गैर-भाजपा दलों से अपनी अपील करने का अधिकार है। वास्तव में, 2019 के चुनावों के बाद, ममता बनर्जी लगातार कोशिश कर रही हैं कि वे खुद को एक अग्रणी नेता के रूप में पेश करें। हालांकि, भारत के लोगों ने उन्हें देखा है कि वह एक क्षेत्रीय नेता हैं या राष्ट्रीय नेता हैं। मुझे लगता है कि उनकी अपील पश्चिम बंगाल तक ही सीमित होगी।