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असम में नए नियम: सीएम के काफिले के लिए एंबुलेंस नहीं रोकी जाएगी, हिमंत सरकार को क्यों उठाना पड़ा ऐसा कदम?

Sun, 04 Oct 2026 08:22 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 04 Oct 2026 08:22 AM IST
सार

असम के सिलचर में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के काफिले के गुजरने के दौरान एंबुलेंस के रुकने का वीडियो सामने आया। घटना के बाद सरमा ने माफी मांगते हुए इसे अस्वीकार्य बताया और जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि काफिले का रास्ता किसी की जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। आखिर एंबुलेंस क्यों रुकी? मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने को कहा और पहले से क्या निर्देश जारी थे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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CM Himanta’s Convoy Passed After Ambulance Was Stopped? Assam CM Apologises, Promises Action Against Them
हिमंत बिस्व सरमा, असम के मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

असम सरकार ने हाल ही में वीआईपी संस्कृति खत्म करने का एक बड़ा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा दी। असम मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इसके साथ ही जिला आयुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के काफिले की वजह से एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को न रोका जाए। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को कोई असुविधा न हो। देश के कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी पूर्व में वीआईपी संस्कृति खत्म करने और जनता की सुविधा के लिए ऐसे कड़े फैसले ले चुके हैं। 

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सीएमओ ने जारी किए नए दिशा-निर्देश
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बृहस्पतिवार को मरीज की मौत के तुरंत बाद सीएम के काफिले के वाहनों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी। अधिकारियों को दो टूक कह दिया गया है कि आपातकालीन वाहनों को रोकने जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। काफिले में केवल वही गाड़ियां रहेंगी जो सुरक्षा/प्रोटोकॉल के लिहाज से अति-आवश्यक होंगी। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या किसी भी आपातकालीन वाहन को मुख्यमंत्री के काफिले के लिए एक सेकंड भी नहीं रोका जाएगा। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं या अधिकारियों के निजी/सरकारी वाहनों को सीएम काफिले में पीछे चलने की अनुमति नहीं होगी। 
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हिमंत सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
दरअसल, गत बुधवार को सिलचर में मुख्यमंत्री के काफिले के लिए रास्ता साफ करने के लिए एक मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस को कथित तौर पर रोक दिया गया था। गंभीर रूप से बीमार मरीज की अगले दिन सिलचर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। इसके बाद लापरवाही बरतने पर चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया और मुख्यमंत्री ने मरीज के परिवार से माफी मांगी। सरमा ने खुद इस घटना को अस्वीकार्य बताया और कहा कि मुख्यमंत्री के काफिले के रास्ते को कभी भी किसी मरीज की जिंदगी से ज्यादा प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलचर में उनके काफिले को रास्ता देने के लिए एंबुलेंस को रोका गया था। उन्होंने मरीज और उसके परिवार से माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही निर्देश दे रखे हैं कि उनके काफिले की आवाजाही से आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद इस मामले में इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ। सरमा ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच के जरिए यह तय किया जाएगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

सिलचर में एंबुलेंस को काफिले के लिए क्यों रोका गया?

  • यह घटना 30 सितंबर को सिलचर के रामनगर आईएसबीटी इलाके में हुई, जहां मुख्यमंत्री के काफिले की आवाजाही के दौरान पुलिस यातायात नियंत्रित कर रही थी।
  • उस समय एंबुलेंस कुछ देर के लिए रुकी रही और मुख्यमंत्री का काफिला वहां से गुजर गया। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने घटना का वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया।
  • हालांकि, घटना की पूरी स्थिति और एंबुलेंस में मरीज की मौजूदगी को लेकर जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
  • स्थानीय पुलिस की ओर से सामने आए एक विवरण में एंबुलेंस के खाली होने की बात कही गई है, जबकि चालक के बयान में करीब एक मिनट रुकने की बात सामने आई है। इसलिए मामले में जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

हिमंत बिस्व सरमा ने घटना के बाद क्या कहा?
हिमंत बिस्व सरमा ने साफ कहा कि किसी मुख्यमंत्री के काफिले का रास्ता किसी ऐसे व्यक्ति की जिंदगी से ऊपर नहीं हो सकता, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत हो। उन्होंने घटना को अस्वीकार्य बताया और मरीज तथा उसके परिवार से माफी मांगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आम नागरिकों को उनके काफिले की वजह से परेशानी न हो, इसके लिए पहले से निर्देश जारी किए गए हैं। अब उन्होंने अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया है कि उनके निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ। साथ ही नियम तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

मुख्यमंत्री के काफिले को लेकर पहले क्या निर्देश दिए?
सरमा ने कहा कि उनके काफिले की आवाजाही के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सिलचर की घटना ने इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री 30 सितंबर को एक दिन के कार्यक्रम के लिए सिलचर पहुंचे थे, जिसमें चुनाव से जुड़ी एक सार्वजनिक सभा भी शामिल थी। उनके काफिले की आवाजाही के दौरान यातायात को नियंत्रित किया गया। घटना के बाद अब यह सवाल भी सामने आया है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को रास्ता देने के लिए स्थानीय स्तर पर क्या व्यवस्था अपनाई जा रही है।

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