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कोरोना वायरस: गंभीर लक्षण वाले मरीजों के लिए दवाइयों के मिश्रण का इस्तेमाल कर रहे हैं डॉक्टर

Fri, 24 Jul 2020 08:59 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 24 Jul 2020 08:59 AM IST
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Clinicians turn to cocktail of drug for severe coronavirus cases in India
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

कोरोना के मध्यम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टर दवाइयों के मिश्रण का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पहले विशिष्ट योजनाओं के तहत के ही मरीजों का इलाज किया जाता था। मरीजों का इलाज ऑक्सीजन सपोर्ट से लेकर प्लाज्मा थेरेपी तक अलग-अलग तरह से किया जा रहा है।

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मैक्स हेल्थकेयर के समूह मेडिकल डायरेक्टर डॉ संदीप बुद्धिराजा का कहना है कि कोरोना के मरीजों का इलाज करने के लिए कोई विशेष इलाज का प्रोटोकॉल या ध्यान रखने के मानक नहीं है, लेकिन पिछले तीन महीनों में हमने काफी कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग थेरेपी की मंजूरी मिलने के बाद, हमें एक ऐसी थेरेपी मिली है जो सही समय पर देने से अच्छे परिणाम देती है।
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इधर हैदराबाद के गांधी अस्पताल के डॉ राजा राव का कहना है कि कोविड-19 के इलाज के लिए कोई मापदंड नहीं है, मरीज की स्वास्थ्य की हालत और लक्षणों के आधार पर मरीज को एक दवाई या फिर कई सारी दवाई दी जाती हैं। हर मरीज को रेमडेसिवीर या स्टेरॉयड की जरूरत नहीं है। 
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जैसे ही मरीज की ऑक्सीजन की परिपूर्णता 94 फीसदी से कम होती है, तभी मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है। बीएमसी की डिप्टी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ दक्षा शाह का कहना है कि अप्रैल महीने से कोविड-19 के लिए मिथाइलप्रेडनिसोलोन दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके परिणाम अच्छे हैं। 


उन्होंने बताया कि इसके अलावा डेक्सामेथासोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, इस दवाई से कई लोगों की जिंदगियां बची हैं। डेक्सामेथासोन की एक गोली की कीमत दस रुपये से भी कम है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, यहां भी मरीज को रेमडेसीविर, स्टेरॉयड्स और एंटीबॉडी दी जाती हैं। 

ये बीमारी मरीज के शरीर पर कैसे असर डालती है, इसका अध्ययन करने के बाद दिल्ली में मरने वाले मरीजों की संख्या को रोकने में काफी मदद मिली। 

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